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आंध्र प्रदेश: महंगे इलाज और अच्छी शिक्षा के लिए अब शहरों की राह नहीं, गांव में ही मिल रहीं सुविधाएं

By Anoop Kumar SinghEdited By: Sakshi Gupta
Published: Tue, 03 Nov 2026 04:08 PM (IST)

आंध्र प्रदेश के चित्तूर जिले का अरगोंडा गांव एक अनूठा ग्रामीण विकास मॉडल बन गया है, जहां अपोलो हॉस्पिटल्स के ...और पढ़ें

गांव में शहर जैसी स्वास्थ्य सुविधाएं (जागरण)

गांव में शहर जैसी स्वास्थ्य सुविधाएं (जागरण)

HighLights

  1. अरगोंडा गांव में स्वास्थ्य, शिक्षा, पोषण और रोजगार की एकीकृत सुविधाएँ।

  2. अपोलो हॉस्पिटल्स की पहल से ग्रामीणों को मिल रहा बेहतर जीवन।

  3. शहरों पर निर्भरता कम कर ग्रामीण विकास का अनूठा मॉडल।

अनूप कुमार सिंह, चित्तूर। गांवों में बेहतर इलाज, अच्छी शिक्षा और रोजगार के अवसरों के अभाव में लोगों को अक्सर शहरों की ओर रुख करना पड़ता है। कई बार गंभीर बीमारी के इलाज के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ती है तो बच्चों की अच्छी पढ़ाई और महिलाओं के रोजगार के अवसर भी गांव से बाहर तलाशने पड़ते हैं।

ऐसे में यदि गांव में ही अस्पताल, विशेषज्ञ चिकित्सकों की सलाह, बच्चों की शिक्षा, महिलाओं के लिए रोजगार और बुजुर्गों की देखभाल की व्यवस्था हो जाए तो ग्रामीण जीवन की तस्वीर बदल सकती है।

आंध्र प्रदेश के चित्तूर जिले का अरगोंडा गांव इसी सोच को साकार करने की एक अनूठी पहल का उदाहरण बन रहा है। यहां स्वास्थ्य, शिक्षा, पोषण, स्वच्छता, कौशल विकास और रोजगार को एक साथ जोड़कर ग्रामीणों को बेहतर जीवन उपलब्ध कराने का प्रयास किया जा रहा है।

खास बात यह है कि इस पहल के तहत अधिकांश स्वास्थ्य सेवाएं और जरूरतमंदों के लिए कई गंभीर बीमारियों का उपचार निश्शुल्क उपलब्ध कराया जा रहा है। नाममात्र का पंजीकरण शुल्क देना होता है।
 
अपोलो हास्पिटल्स समूह के संस्थापक अध्यक्ष पद्म विभूषण डा. प्रताप सी. रेड्डी ने वर्ष 2013 में अपने पैतृक गांव अरगोंडा से इस पहल की शुरुआत की थी।
 
अपोलो हॉस्पिटल्स एंटरप्राइज लिमिटेड की कॉरपोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (सीएसआर) पहल के रूप में शुरू हुए इस कार्यक्रम का संचालन अपोलो फाउंडेशन के माध्यम से किया जाता है।
 
रेड्डी बताते हैं कि शुरुआत में गांव के लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने पर ध्यान दिया गया। बाद में इसे शिक्षा, पोषण, स्वच्छ पेयजल, स्वच्छता, कौशल विकास और रोजगार से जोड़कर टोटल हेल्थ माडल का स्वरूप दिया गया।
 
हार्वर्ड टीएच चान स्कूल आफ पब्लिक हेल्थ ने भी इस माडल का अध्ययन किया है। अब यह पहल पांच जिलों के 334 गांवों तक पहुंच चुकी है और 2,17,343 लोगों के जीवन को प्रभावित कर रही है।
 
डॉ. रेड्डी की यह सोच है कि गांवों में स्वास्थ्य, शिक्षा और रोजगार की समुचित व्यवस्था विकसित हो तो लोगों को बेहतर जीवन के लिए शहरों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। ऐसे माडल का देशभर में विस्तार वर्ष 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को भी मजबूती दे सकता है।
Andhra Pradesh Village (1)

अस्पताल से घर-घर तक पहुंची स्वास्थ्य सेवाएं

रेड्डी कहते हैं कि पहले प्राथमिक चिकित्सा के लिए भी लोगों को 20 से 60 किलोमीटर तक की दूरी तय करनी पड़ती थी। विशेषज्ञों से उपचार कराने के लिए चित्तूर या दूसरे बड़े शहरों का रुख करना पड़ता था।
 
वर्ष 2000 में अरगोंडा में अपोलो का 50 बिस्तरों वाला अस्पताल शुरू होने से ग्रामीणों को अपने क्षेत्र में आधुनिक चिकित्सा सुविधाएं मिलने का रास्ता खुला। इसके बाद टोटल हेल्थ कार्यक्रम के तहत मोबाइल चिकित्सा इकाइयों, गांवों में स्वास्थ्य उपकेंद्रों, टेलीमेडिसिन और नियमित जांच शिविरों के माध्यम से सेवाओं का विस्तार किया गया।
 
मोबाइल इकाइयों में चिकित्सक, नर्स, तकनीकी कर्मचारी, जांच की सुविधा और दवाएं उपलब्ध रहती हैं। टेलीमेडिसिन के जरिये बड़े अस्पतालों के विशेषज्ञ चिकित्सकों से परामर्श भी कराया जाता है।

सर्जरी के बाद जीवनभर फॉलोअप की सुविधा 

अरगोंडा के अस्पताल में अब तक 1.67 लाख से अधिक मरीजों का उपचार, 12 हजार से अधिक सर्जरी और घुटना प्रत्यारोपण की एक हजार से अधिक सर्जरी की जा चुकी हैं।
 
जरूरतमंदों की मोतियाबिंद सर्जरी, कैंसर की पुष्टि होने पर कुछ मरीजों का उपचार और बच्चों की हृदय सर्जरी भी निश्शुल्क कराई गई है। बच्चों की हृदय सर्जरी के बाद जीवनभर फॉलोअप की व्यवस्था भी है। मधुमेह और उच्च रक्तचाप के मरीजों के दीर्घकालिक स्वास्थ्य प्रबंधन कार्यक्रमों में नाममात्र शुल्क लिया जाता है।
Andhra Pradesh Village (3)

शिक्षा, पोषण और रोजगार से भी जुड़ा विकास

स्वास्थ्य सेवाओं के साथ बच्चों की शिक्षा और पोषण पर भी ध्यान दिया जा रहा है। सरकारी स्कूलों के 10 हजार से अधिक विद्यार्थियों की आंख, कान, दांत और खून की कमी से संबंधित जांच की गई है।
 
गर्भवती और स्तनपान कराने वाली महिलाओं को पौष्टिक भोजन तथा स्वास्थ्य निगरानी की सुविधा मिलती है। आशा कार्यकर्ताओं के माध्यम से मां और बच्चे के स्वास्थ्य पर नजर रखी जाती है। जरूरतमंद बच्चों को चश्मे और आवश्यक प्राथमिक उपचार निश्शुल्क उपलब्ध कराए जाते हैं।

300 से अधिक महिलाओं को मिला काम

महिलाओं को सिलाई, कपड़ा निर्माण और जूट के उत्पाद बनाने का प्रशिक्षण देकर रोजगार से जोड़ा गया है। इनसे संबंधित उत्पादन इकाइयों में 300 से अधिक महिलाएं काम कर रही हैं। बुजुर्गों के लिए दिन के समय देखभाल केंद्र और पोषण की व्यवस्था है। इस पहल का विस्तार चेंचू जनजातीय समुदाय तक भी किया गया है।

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