तमिलनाडु के सीफूड एक्सपोर्ट यूनिट में अमोनिया गैस लीक, 2 की मौत; 67 अस्पताल में भर्ती
तमिलनाडु के एक सीफूड एक्सपोर्ट यूनिट में अमोनिया गैस लीक होने से सात लोगों की मौत हो गई है, जबकि कई अन्य गंभीर रूप से घायल हैं।
HighLights
तमिलनाडु सीफूड यूनिट में अमोनिया गैस का रिसाव हुआ।
इस दुखद घटना में सात लोगों की मौत हो गई।
कई अन्य लोग गंभीर रूप से घायल, स्थिति गंभीर।
डिजिटल डेस्क, चेन्नई। तमिलनाडु के तिरुवल्लूर जिले में पेरियापालयम के पास कन्निगईपेर स्थित एक सीफूड निर्यात कंपनी में रविवार सुबह अमोनिया गैस रिसाव होने से कम से कम दो लोगों की मौत हो गई और 62 अन्य बीमार पड़ गए। मरने वालों की संख्या बढ़ने की आशंका है क्योंकि अस्पताल में भर्ती कई लोग फिलहाल वेंटिलेटर पर हैं।
यह रिसाव यूनिट के अमोनिया प्लांट में हुआ, जो फैक्ट्री परिसर में ही मजदूरों के हॉस्टल से लगभग 50 मीटर की दूरी पर स्थित है। रविवार का दिन होने के कारण, मजदूर अपने कमरों में आराम कर रहे थे, तभी गैस पूरे इलाके में फैल गई। इसके कारण उन्हें सांस लेने में तकलीफ और बेचैनी होने लगी। कुछ राहगीरों ने मजदूरों की चीख-पुकार और हंगामा सुना, जिसके बाद उन्होंने पुलिस को सूचना दी।
NDRF ने संभाला मोर्चा
मुख्य अमोनिया भंडारण सुविधा ग्राउंड फ्लोर पर स्थित थी। आशंका जताई जा रही है कि रिसाव पहली मंजिल तक गैस ले जाने वाली पाइपलाइन के एक नोजल से हुआ है।
राष्ट्रीय आपदा मोचन बल के एक अधिकारी ने बताया, "हमने अमोनिया के बचे हुए प्रभाव को बेअसर करने के लिए वाटर-वाशिंग (पानी की बौछार) का अभियान चलाया, और गनीमत रही कि गैस फैक्ट्री के आसपास के रिहायशी इलाकों में नहीं फैली।" स्थानीय प्रशासन की मदद के लिए NDRF की एक विशेष 'केमिकल, बायोलॉजिकल, रेडियोलॉजिकल और न्यूक्लियर टीम को तैनात किया गया था।
अधिकारियों के अनुसार, कुल 64 मजदूर (60 महिलाएं और 4 पुरुष) इस गैस रिसाव की चपेट में आए हैं।
ओडिशा की दो युवतियों की मौत
गैस की चपेट में आए 15 लोगों को स्टेनली सरकारी अस्पताल और राजीव गांधी सरकारी सामान्य अस्पताल में निगरानी में रखा गया है, जबकि 48 अन्य को दो निजी अस्पतालों में भर्ती कराया गया है।
इनमें से मूल रूप से ओडिशा की रहने वाली दो युवतियों जुमानी जुआंग (19) और मालोथी (20) की मौत हो गई। उनके शवों को पोस्टमार्टम के लिए तिरुवल्लूर के सरकारी अस्पताल में रखा गया है। इसके अलावा लगभग 130 सुरक्षित मजदूरों को कन्निगईपेर के एक मैरिज हॉल में शिफ्ट किया गया है, जहां उनके लिए भोजन, पीने के पानी और मेडिकल निगरानी की पूरी व्यवस्था की गई है।
हवा में अमोनिया का स्तर खतरनाक हद तक बढ़ा
अमोनिया का उपयोग आमतौर पर औद्योगिक प्रशीतन और सीफूड प्रोसेसिंग में किया जाता है। उच्च मात्रा में सांस के जरिए इसके शरीर में जाने पर गंभीर सांस की तकलीफ और अन्य स्वास्थ्य समस्याएं पैदा होती हैं। स्वास्थ्य मंत्री ई. अरुणराज ने बताया कि विशेषज्ञों ने यूनिट की हवा में अमोनिया का स्तर लगभग 300 पीपीएम दर्ज किया है। उन्होंने कहा, "इतने उच्च स्तर ने मजदूरों को गंभीर रूप से प्रभावित किया है, जिनमें से अधिकांश महिलाएं हैं।"
घटना के बाद, अधिकारियों ने प्रभावित क्षेत्र को सुरक्षित कर लिया है और आगे के रिसाव को रोकने के लिए उपाय शुरू कर दिए हैं। वहीं, तकनीकी विशेषज्ञ रिसाव के स्रोत का पता लगाने में जुटे हैं। मजदूरों के हॉस्टल में दाखिल हुए NDRF के अधिकारियों ने बताया कि कमरों में कपड़े, सामान और निजी चीजें बिखरी पड़ी थीं, जो इस बात का संकेत है कि गैस रिसाव से बचने और भागने से पहले कई मजदूरों ने घबराहट में अपना सामान समेटने की कोशिश की थी।
फैक्ट्री के मालिक गिरफ्तार
पेरियापालयम पुलिस ने गैर-इरादतन हत्या का मामला दर्ज कर लिया है और पूछताछ के लिए फर्म के मालिक (दोनों भाई) मोहन और जोसेफ को हिरासत में ले लिया। बाद में उन्हें इस घटना के सिलसिले में गिरफ्तार कर लिया गया। तिरुवल्लूर की कलेक्टर एस. कविता ने बताया कि फर्म के पास आवश्यक लाइसेंस मौजूद थे और सरकार द्वारा नियुक्त एक समिति ने रिसाव के कारणों की जांच शुरू कर दी है।
मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने शोक संतप्त परिवारों के प्रति अपनी संवेदना व्यक्त की है। उन्होंने मुख्यमंत्री सार्वजनिक राहत कोष से मृतकों के परिवारों को 2-2 लाख रुपये की अनुग्रह राशि देने की घोषणा की। साथ ही कहा कि सरकार शवों को अंतिम संस्कार के लिए ओडिशा ले जाने का पूरा खर्च वहन करेगी।
संयुक्त जांच के आदेश
मुख्यमंत्री ने इस मामले में औद्योगिक सुरक्षा और स्वास्थ्य निदेशालय, जन स्वास्थ्य विभाग और तमिलनाडु प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा संयुक्त जांच के आदेश दिए हैं।
औद्योगिक सुरक्षा एवं स्वास्थ्य निदेशक, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सदस्य सचिव और जन स्वास्थ्य के अतिरिक्त निदेशक वाली एक तीन सदस्यीय समिति का गठन किया गया है। यह समिति 24 घंटे के भीतर प्रारंभिक रिपोर्ट और तीन दिनों के भीतर विस्तृत रिपोर्ट सौंपेगी।
इसके साथ ही, मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को घायल मजदूरों के लिए विशेष इलाज सुनिश्चित करने और कर्मचारी राज्य बीमा योजना व कर्मकार मुआवजा अधिनियम के तहत मुआवजे की कार्यवाही शुरू करने का भी निर्देश दिया है। भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए, पूरे तमिलनाडु में खतरनाक औद्योगिक इकाइयों के तत्काल निरीक्षण का आदेश भी जारी किया गया है।
