तीन साल में देश को ड्रग्स मुक्त करने का रोडमैप तैयार, अमित शाह के पंजाब दौरे से राजनीतिक हलचल तेज
गृह मंत्री अमित शाह ने 31 दिसंबर 2029 तक भारत को ड्रग्स मुक्त बनाने का लक्ष्य रखा है, जिसके लिए एक विस्तृत रोडमैप तैयार किया गया है।
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31 दिसंबर 2029 तक ड्रग्स की समस्या से मुक्ति का रोडमैप तैयार।
HighLights
अमित शाह का 2029 तक भारत को ड्रग्स मुक्त करने का लक्ष्य।
नारकोटिक्स कोऑर्डिनेशन सेंटर (एनकोर्ड) के माध्यम से प्रभावी रणनीति।
पंजाब में ड्रग्स मुक्ति अभियान पर राजनीतिक बहस तेज।
नीलू रंजन, नई दिल्ली। तीन साल में भारत को ड्रग्स की समस्या से पूरी तरह से मुक्त करने के गृह व सहकारिता मंत्री अमित शाह के एलान के भले ही पंजाब विधानसभा चुनाव से जोड़कर देखा जा रहा हो, लेकिन यह सिर्फ चुनावी मुद्दा भर नहीं है। शाह दो महीने पहले ही भारत को 31 दिसंबर 2029 तक ड्रग्स की समस्या से मुक्त करने के रोडमैप को हरी झंडी दे चुके हैं।
यही नहीं, इस रोडमैप को अमली जामा पहनाने के लिए केंद्रीय एजेंसियों के साथ-साथ राज्यों के डीजीपी और एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स के प्रमुखों के साथ बैठक भी कर चुके हैं। एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स के प्रमुखों को संबोधित करते हुए शाह ने साफ किया था कि यह लक्ष्य भले ही असंभव लग रहा हो, लेकिन देश की भविष्य को सुरक्षित करने के लिए हमें इसे हासिल करना ही होगा।
पंजाब में राजनीतिक हलचल तेज
दरअसल, दशहरे के दिन अमित शाह के पंजाब दौरे और रावण के साथ चिट्टे के दहन के कार्यक्रम को देखते हुए पंजाब में राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। सत्तारूढ आम आदमी पार्टी इसे सिर्फ चुनाव बताकर हाशिये पर डालने की कोशिश कर रही है। तर्क दिये जा रहे हैं कि पंजाब की दशकों पुरानी ड्रग्स की समस्या को तीन साल में कैसे खत्म किया जा सकता है। यह संभव नहीं है।
गृह मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि देश को माओवाद की समस्या से 31 मार्च 2026 तक मुक्त करने का लक्ष्य के एलान के बाद भी ऐसे ही सवाल उठे थे। लेकिन इसे संभव कर दिखाया गया। उन्होंने कहा कि माओवाद की समस्या से मुक्ति के बाद अमित शाह की प्राथमिकता में देश को ड्रग्स की समस्या से पूरी तरह से निजात दिलाने की है और इस लक्ष्य को भी हासिल किया जाएगा।
31 दिसंबर 2029 तक ड्रग्स की समस्या से मुक्ति का एलान
एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि 31 दिसंबर 2029 तक ड्रग्स की समस्या से मुक्ति का एलान भले ही अभी किया गया हो, लेकिन सच्चाई यह है कि इसके लिए पिछले सात सालों से काम चल रहा है। गृह मंत्री बनने के बाद से शाह ने ड्रग्स की तस्करी के खिलाफ ढांचा तैयार करना शुरू कर दिया था। इसके तहत जिलों से लेकर राज्य और केंद्र स्तर तक नारकोटिक्स कोऑर्डिशेन सेंटर (एनकोर्ड) बनाया जा चुका है।
केंद्र और राज्य स्तर के साथ-साथ सभी जिलों में गठित एनकोर्ड की बैठकों पर खुद शाह नजर रखते हैं। इसके साथ ही पूरे देश में ड्रग्स की तस्करी के रूट की मैपिंग की जा चुकी है। ड्र्ग्स की तस्करी से जुड़े लोगों का अलग से डाटा बेस तैयार किया गया है।
देश के बाहर से कार्टेल चलाने वाले सरगनाओं को वापस लाने के लिए राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सहयोग के लिए एजेंसियों के बीच समन्वय और सामंजस्य बढ़ाया गया है, जिसका परिणाम यूएई और तुर्किये जैसे देशों पहचान छुपाकर रह रहे सरगनाओं की पहचान कर उन्हें भारत लाने में सफलता मिली है।
पांच साल पहले मुंद्रा पोर्ट पर 21 हजार करोड़ रुपये की ड्रग्स की बरामदगी से लेकर पिछले दिनों लक्ष्यदीप के नजदीक 3000 करोड़ रुपये की ड्रग्स की बरामदगी और पाकिस्तानी ड्रग्स तस्करों की गिरफ्तारी एजेंसियों को मिल रही कामयाबी के सबूत हैं। वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि साल दर साल ड्रग्स की बरामदगी (मात्रा और कीमत दोनों में) और कार्टेल के ध्वस्तीकरण के आंकड़ों में इसे साफ-साफ देखा जा सकता है।
