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'माओवाद से जुड़ी हर निशानी को मिटाना होगा', अमित शाह ने नक्सलवाद का नामोनिशान मिटाने का लिया संकल्प

Published: Thu, 15 Oct 2026 08:39 PM (IST)

गृह मंत्री अमित शाह ने सेवा संकल्प अभियान के तहत दिव्यांगजनों को संबोधित किया, जिनमें नक्सली हिंसा के शिकार लोग शामिल थे।

अमित शाह ने नक्सलवाद की हर निशानी को मिटाने का संकल्प लिया (फाइल फोटो)

अमित शाह ने नक्सलवाद की हर निशानी को मिटाने का संकल्प लिया (फाइल फोटो)

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जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। प्रधानमंत्री के नरेन्द्र मोदी के सरकार के प्रमुख के रूप में पूरा होने पर चलाए जा रहे सेवा संकल्प अभियान के तहत कृत्रिम अंग पाने वाले दिव्यांगजनों को गृह व सहकारिता मंत्री अमित शाह ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से संबोधित किया। इनमें बड़ी संख्या में नक्सली हिंसा के शिकार हुए दिव्यांगजन है।

शाह ने कहा कि इनमें अकेले बस्तर से 1570 से अधिक लाभार्थी हैं, जो बस्तर की पीड़ा का परिचय देती है। उन्होंने कहा कि माओवाद मुक्त भारत बनने के बाद उसके कारण मिले घावों पर अब उन पर मरहम लगाने का समय है, ताकि हर पीड़ित सम्मानपूर्वक जीवन यापन कर सके। उन्होंने माओवाद को समाप्त करने के बाद उसकी हर निशानी को मिटाने का आह्वान किया।

माओवादियों का क्रूर चेहरा सामने रखते हुए अमित शाह ने कहा कि उन्होंने अपने राजनीतिक उद्देश्य को हासिल करने के लिए आइईडी से धमाके कर निर्दोष लोगों को दिव्यांग बनाया।

उन्होंने इसे सबसे बड़ा मानवाधिकार का हनन बताया। लेकिन मोदी सरकार अब हर दिव्यांग और पीड़ित को पुनर्वास का अवसर देने के प्रति कटिबद्ध है, इस प्रयास में भारत सरकार और छत्तीसगढ़ सरकार के साथ चट्टान की तरह खड़ी है।

अमित शाह ने माओवाद को समाप्त करने के बाद उसकी हर निशानी को मिटाने के प्रयास शुरू हो चुके हैं। विपक्षी पार्टी के शासन में पांच दशकों तक जिस बस्तर में बुनियादी सेवाएं तक नहीं पहुंच सकीं, वहां आज नियद नेल्लानार योजना के तहत आधारभूत सुविधाएं पहुंच रही हैं। बस्तर ओलंपिक, बस्तर पंडुम, नियद नेल्लानार और मुख्यमंत्री सामूहिक बस योजना के माध्यम से फिर से हंसता-खेलता बस्तर बनाने की दिशा में प्रयास किया गया है।

उन्होंने कहा कि जिस बस्तर में कभी गोली, बम धमाके सुनाई देते थे और भय का माहौल था, वहां आज हजारों युवा खेलों में भाग ले कर अपनी परंपरा को जीवित रख रहे हैं।

इसके साथ ही बस्तर पंडुम के माध्यम से जनजातीय कला एवं संस्कृति को पुनर्जीवित करने का एक बहुत बड़ा प्रयास हुआ है। इसके तहत 500 से अधिक पूर्ववर्ती सुरक्षा शिविरों में से 200 से ज्यादा को शहीद वीर गुंडाधुर सेवा डेरा में बदला जा रहा है। जिस शिविर में कभी जवान बैठकर लोगों की सुरक्षा करते थे, वहीं आज विकसित बस्तर की नींव डाली जा रही है।