नशे के खिलाफ अंतिम लड़ाई शुरू, सरकार ने अगले 3 साल में पूरी तरह से खत्म करने का रोडमैप किया तैयार
गृह मंत्री अमित शाह ने एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स के तीसरे सम्मेलन में ड्रग्स के खिलाफ अंतिम लड़ाई का आह्वान किया।
-1790088400174_m.webp)
गृह मंत्री अमित शाह ने ड्रग्स के खिलाफ अंतिम लड़ाई शुरू की

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। छह सालों की तैयारी के बाद आखिरकार 31 दिसंबर 2029 तक देश से नशे के व्यापार को पूरी तरह से उखाड़ फेंकने के लिए अंतिम लड़ाई शुरू हो गई।
एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स के तीसरे सम्मेलन का उद्घाटन करते हुए गृह व सहकारिता मंत्री अमित शाह ने कहा कि पहले और दूसरे सम्मेलन में संस्थागत व्यवस्था बनाने और उसे कार्यवाही में बदलने की तैयारी के बाद अब इस रोडमैप को निर्णायक लड़ाई में परिवर्तित करने का समय आ गया है।
उनके अनुसार नशा मुक्त भारत का साकार करने के लिए 35 से अधिक विभागों के साथ चर्चा के बाद विजन डाक्यूमेंट 2026-2029 तैयार किया गया है, जिसमें सभी स्टेकहोल्डर्स को निश्चित लक्ष्य दिये गए हैं।
अमित शाह ने उम्मीद जताई कि विजन डाक्यूमेंट और जिला से लेकर केंद्र स्तर तक तैयार एंटी ड्रग्स नेटवर्क द्वारा 2029 तक हम भारत से नशे के व्यापार को जड़ से उखाड़ फेंकने में सफल होंगे। उन्होंने कहा कि नशे के खिलाफ पहली लड़ाई जिले स्तर पर ही लड़ी जाएगी।
इसके लिए जिले को नशे के विरुद्ध लड़ाई की मूल इकाई बनाना होगा। उन्होंने 36 राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों से आए एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स के अधिकारियों को संबोधित करते हुए कहा कि न एक ग्राम ड्रग्स भारत में आने देंगे, न भारत को मार्ग बनाकर यहां से एक ग्राम ड्रग्स बाहर जाने देंगे, इसी लक्ष्य के साथ आगे बढ़ना है।
उन्होंने अधिकारियों को नशे के विरुद्ध लड़ाई को संवेदना के साथ टाप प्रायोरिटी बनाकर और एक साथ मिलकर लड़ने और जीतने का मंत्र दिया।
31 दिसंबर 2031 तक पूरी तरह से ध्वस्त हो नशे का व्यापार
आसान नहीं है। यह माओवादी हिंसा, पूर्वोत्तर भारत से अलगाववाद और जम्मू-कश्मीर को आतंकवाद से मुक्त करने से कहीं ज्यादा कठिन काम है। लेकिन इस लड़ाई में भी हम टारगेट, टाइमलाइन और एकाउंटेविलिटी तय कर संपूर्ण विजय की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।
न्होंने कहा कि अब हमें मीटिंग से मिशन, रिपोर्टिंग से रिजल्ट और सीजर से नेटवर्क की समाप्ति और केस दर्ज करने से सजा दिलाने की ओर जाना है। उन्होंने एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स को एंटी नारको मिशन कमांड के रूप में विकसित करने की जरूरत पर बल दिया। बैकवर्ड-फॉरवर्ड इन्वेस्टिगेशन के साथ-साथ फाइनेंशियल इन्वेस्टिगेशन और डिजिटल लिंक्स ढूंढना हमारी प्राथमिकता होनी चाहिए
नशे के खिलाफ लड़ाई का प्रारूप बताते हुए अमित शाह ने कहा कि हमें
कार्टेल पर एंट्री पॉइंट, अंतरराज्यीय डिस्ट्रीब्यूशन सिस्टम और जिलों में लोकल सेल के नेटवर्क तीनों स्तरों पर एक साथ प्रहार करना होगा। इसके लिए जिलों को तीन क्लस्टर में बांटा जाएगा। ड्रग बनाने वाले या देश में प्रवेश देने वाले जिले, ट्रांसपोर्टेशन कोरिडोर वाले जिले और उपभोग वाले जिले।
इसके साथ ही भारत में मौजूद विदेशी आरोपियों को वापस भेजने और उन्हें ब्लैकलिस्ट करने का अभियान भी चलाना जाएगा, ताकि वे दोबारा भारत न आ सकें। वहीं विदेशों में बैठकर देश में ड्रग्स सप्लाई कर रहे भगोड़ों को पकड़कर भारत की अदालत के सामने लाने को भी उन्होंने प्राथमिकता में रखा।
उन्होंने कहा कि इसके सभी एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स को सूचना को एक्शनेबल इंटेलिजेंस में बदलने की पूरी प्रक्रिया को अपने राज्य की पुलिस की कार्य संस्कृति का हिस्सा बनाना चाहिए।
अमित शाह ने नशे के लिए इस लड़ाई में स्कूल टीचर, कांस्टेबल, पुलिस महानिदेशक, मुख्य सचिव से लेकर केंद्रीय गृह सचिव तक सक्रिय भागीदारी की जरूरत बताते हुए कहा कि सभी को एकजुट होकर काम करना होगा।
इसमें लोगों को जागरूक करना भी बड़ा काम है। इसके लिए एक लाख नशामुक्त मित्र को तैयार किया जा रहा है, जो 10 लाख स्कूलों, कॉलेजों और संस्थानों में जाकर युवाओं को जागरूक करेंगे और कैंपस के निदेशकों को संवेदनशील बनाएंगे।
