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देशभर में बढ़ते विवाद के बीच बिना इथेनोल वाले पेट्रोल का विकल्प दे सकता है केंद्र, विमर्श जारी

By Jaiprakash RanjanEdited By: Abhishek Pratap Singh
Published: Tue, 07 Jul 2026 03:06 PM (IST)

केंद्र सरकार इथेनोल मिश्रित पेट्रोल (ई-20) पर उपभोक्ताओं की शिकायतों के बाद बिना इथेनोल वाले पेट्रोल का विकल्प देने पर ...और पढ़ें

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HighLights

  1. ई-20 पेट्रोल पर उपभोक्ताओं की शिकायतों के बाद सरकार गंभीर।

  2. बिना इथेनोल वाले पेट्रोल का विकल्प देने पर विचार जारी।

  3. कीमत निर्धारण और लॉजिस्टिक्स सबसे बड़ी चुनौतियाँ हैं।

जयप्रकाश रंजन, नई दिल्ली। इथेनोल मिश्रित पेट्रोल (ई-20) को लेकर देशभर में बढ़ते विवाद और उपभोक्ताओं की शिकायतों (माइलेज में कमी, ईंजन में संभावित समस्या) के बीच केंद्र सरकार पेट्रोल पंपों पर बिना इथेनोल वाले सामान्य पेट्रोल का विकल्प उपलब्ध कराने की संभावना पर गंभीरता से विचार कर रही है।

इस बारे में सरकार के विभिन्न मंत्रालयों में विमर्श जारी है। तेल मार्केटिंग कंपनियों से भी उनके सुझाव लिए गए हैं। पेट्रोलियम मंत्रालय के अधिकारियों और सरकारी तेल विपणन कंपनियों (ओएमसी) के प्रतिनिधियों के अनुसार, इस प्रस्ताव को लागू करने में सबसे बड़ी बाधा कीमत निर्धारण तय करने को लेकर आ सकती है, जिसका समाधान निकालना है। साथ ही पेट्रोल पंपों पर बगैर मिश्रण वाले पेट्रोल के अतिरिक्त डिस्पेंसर लगाने की व्यवस्था भी करनी होगी।

फिलहाल दो तरह के पेट्रोल उपलब्ध

वर्तमान में ज्यादातर पेट्रोल पंपों पर दो तरह के ईंधन उपलब्ध होते हैं, ई-20 वाला सामान्य पेट्रोल और ओएमसी का प्रीमियम ब्रांड (जैसे स्पीड, टर्बोजेट आदि)। ई-20 वाले सामान्य पेट्रोल को तेल कंपनियां लंबे समय से अंडर-रिकवरी (लागत से कम खुदरा मूल्य) पर बेच रही हैं।

अगर बिना इथेनोल वाला सामान्य पेट्रोल का नया विकल्प दिया जाता है तो उसके लिए अलग डिस्पेंसर और स्टोरेज टैंक लगाने पड़ेंगे, जो अतिरिक्त खर्च और लॉजिस्टिक चुनौती पैदा करेगा। हालांकि असली चुनौती कीमत निर्धारण है।

कौन सी समस्या आ रही?

एक वरिष्ठ अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया, “कीमत का सवाल सबसे बड़ा पेंच है। अगर बिना इथेनोल वाला विकल्प लाते हैं तो उसकी कीमत क्या रखी जाए? यह फैसला करना होगा कि क्या शून्य इथेनोल वाले पेट्रोल के लिए बगैर अंडर-रिकवरी वाली कीमत (यानी ग्राहकों से पूरी कीमत वसूली वसूलना) तय की जाए और ई-20 वाले पेट्रोल की कीमत मौजूदा खुदरा कीमत से कुछ कम रखी जाए। ऐसे में ग्राहकों पर छोड़ दिया जाए कि वह कौन सा ईंधन चुनता है?”

ओएमसी के प्रतिनिधियों का कहना है कि ई-20 को लागू करने के बाद अब अगर एक और वैरिएंट (बिना इथेनोल) जोड़ना है तो पूरे सप्लाई चेन पर असर पड़ेगा। अलग डिस्पेंसर लगाने, रखरखाव और स्टॉक मैनेजमेंट की लागत बढ़ेगी। सरकार के विभिन्न मंत्रालयों के बीच उपरोक्त कदम को लागू करने को लेकर चर्चा चला रही है।

इसके साथ ही बाजार में हाल फिलहाल पेट्रोल पंपों पर ई-25 ईंधन की बिक्री की शुरुआत होने की संभावना भी नहीं है। पिछले महीने ही केंद्र सरकार ने ई-22 से ई-30 ईंधनों पर उत्पाद शुल्क में छूट देने का फैसला किया था। साथ ही भारत मानक ब्यूरो (बीआईएस) ने इन इंधनों के लिए मानक तय किया था। इससे यह संभावना बनी थी कि सरकार अब ई-20 के बाद ज्यादा इथेनोल मिश्रण वाले पेट्रोल की बिक्री भी जल्द शुरू कर देगी।

क्या है मौजूदा नियम?

मौजूदा नियम के मुताबिक अभी पूरे देश में ई-20 पेट्रोल (20 फीसद इथेनोल + 80 फीसद पेट्रोल) की बिक्री हो रही है। सरकारी आंकड़ों में वर्ष 2013-14 के करीब देश में बिकने वाले पेट्रोल में औसतन 1.5 फीसद इथेनोल मिलाया गया था जो अब बढ़कर 2025 में 20 फीसद तक पहुंच गई। वैसे सरकार ने यह लक्ष्य वर्ष 2030 तक हासिल करने का लक्ष्य रखा था लेकिन अब पहले ही इसे हासिल कर लिया गया है।

सरकार का कहना है कि इससे 1.44 लाख करोड़ रुपये की विदेशी मुद्रा की बचत हुई है, साथ ही किसानों की आय बढ़ोतरी और उत्सर्जन में कमी जैसे फायदे बताए जा रहे हैं। हालांकि, उपभोक्ताओं और वाहन मालिकों की ओर से माइलेज में कमी, पुरानी गाड़ियों में इंजन संबंधी चिंताएं और पसंद का अभाव जैसे मुद्दे लगातार उठ रहे हैं।

सोशल मीडिया पर विरोध बढ़ा है और कुछ जगहों पर प्रदर्शन भी हुए हैं। पहले आनाकानी के बाद सरकार व वाहन निर्माता कंपनियों ने माना है कि माइलेज 6 फीसद तक घट सकती है।

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