बीजेपी और अकाली दल में फिर होगा गठबंधन, गृहमंत्री अमित शाह ने दिए संकेत
गृह मंत्री अमित शाह ने पंजाब में राजग सरकार बनने का संकेत देते हुए शिरोमणि अकाली दल की राजग में वापसी की पुष्टि की है।

अमित शाह ने अकाली दल के NDA में शामिल होने के संकेत दिए
HighLights
अमित शाह ने अकाली दल की राजग वापसी का संकेत दिया।
पंजाब में भाजपा-अकाली दल गठबंधन की सरकार बनने की संभावना।
खराब चुनावी प्रदर्शन के बाद अकाली दल की वापसी महत्वपूर्ण।
राज्य ब्यूरो, नई दिल्ली। राजग में फिर शिरोमणि अकाली दल की वापसी जल्द होने वाली है। गृह व सहकारिता मंत्री अमित शाह ने इसके परोक्ष संकेत दिए। बिना किसी दल का नाम लिए दिल्ली में एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने पंजाब में राजग सरकार बनने का दावा किया। पहली बार भाजपा के शीर्ष स्तर से पंजाब विधानसभा चुनाव के पहले अकाली दल के साथ गठबंधन का संकेत दिया गया है।
दरअसल मानसून सत्र के दौरान संसद भवन में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के साथ सुखबीर बादल की मुलाकात के बाद से ही अकाली दल की राजग में वापसी की अटकलें शुरू हो गई थी। लेकिन भाजपा के प्रदेश और राष्ट्रीय स्तर के तमाम नेता पंजाब में विधानसभा की सभी 117 सीटों पर लड़ने का दावा कर रहे थे। लेकिन साथ भाजपा के साथ-साथ अकाली दल की ओर से भी सीटों के बंटवारे को दोनों दलों के बीच चल रही बातचीत का संकेत भी दे रहे थे।
2024 के लोकसभा चुनाव के दौरान अकाली दल की 13 फीसद की तुलना में भाजपा को 18 फीसद से अधिक मत मिलने का हवाला देते हुए अधिक सीटों की मांग की जा रही थी। इसके पहले गठबंधन में भाजपा 22-23 सीटों पर ही लड़ती रही है। लेकिन इस बार भाजपा बराबर सीटों की मांग कर रही थी। सूत्र यह भी बताते हैं कि अकाली दल 45 सीटें भाजपा को देने के लिए तैयार भी गई थी।
शाह के बयान से साफ है कि सीटों के बंटवारे का फार्मूला भी तय हो गया है। गौरतलब है कि 1998 में राजग गठबंठन के अस्तित्व में आने से पहले भाजपा और अकाली दल के बीच गठबंधन रहा है। भाजपा और अकाली दल के बीच गठबंधन 1996 में गठबंधन हुआ था, जो 2020 तक चला।
2020 में तीन कृषि कानूनों के विरोध में अकाली दल खुद गठबंधन से बाहर हो गई। लेकिन 2022 के विधानसभा और 2024 के लोकसभा चुनाव में खराब प्रदर्शन को देखते हुए 2027के विधानसभा चुनाव के पहले दोनों दलों के नेता गठबंधन की संभावना तलाशने में जुट गए थे।
खासतौर पर अलग-थलग पड़ी अकाली दल के लिए अस्तित्व पर संकट की चर्चा भी शुरू हो गई थी। कुछ समय के लिए जदयू के दो बार बाहर जाने और वापस आने को छोड़ दें तो टीडीपी के बाद अकाली दल की वापसी को राजग गठबंधन के और अधिक मजबूत होने का संकेत माना जा रहा है।
