नई दिल्ली [जागरण ब्यूरो]। संकटग्रस्त एयर इंडिया पायलटों की हड़ताल का मुद्दा बुधवार को संसद में भी गूंजा। इस दौरान नागरिक विमानन अजित सिंह ने कहा कि सरकारी एयरलाइन दिवालिया होने के कगार पर है। अगर चीजें ठीक नहीं हुई तो एयर इंडिया को दिए गए 30 हजार करोड़ रुपये के पैकेज पर रोक लगाई जा सकती है। लोकसभा में सदस्यों ने सरकार से मांग की कि इस एयरलाइन को बार-बार होने वाली हड़ताल से बचाया जाए। इससे जुड़े मुद्दों का जल्द से जल्द निराकरण किया जाए, क्योंकि इससे दुनिया में गलत संदेश जा रहा है।

इस मुद्दे को लोकसभा में भाकपा के गुरुदास दास गुप्ता ने उठाया। उन्होंने कहा कि सरकार को एयर इंडिया के बारे में ठोस कदम उठाने चाहिए और निजी एयरलाइनों का संरक्षण देने से बाज आना चाहिए। उन्होंने एयर इंडिया को धीरे-धीरे खत्म करने की साजिश का आरोप लगाते हुए कहा पहले सरकार ने एयर इंडिया और इंडियन एयरलाइंस का विलय किया और अब उन्हें फिर से अलग करने की तैयारी है। माकपा के बासुदेव आचार्य ने भी सरकार से जवाब देने को कहा। जबकि राज्यसभा में कांग्रेस के रामचंद्र खुंटिया ने इस मसले को उठाते हुए कहा कि इतने बड़े पैकेज के बावजूद एयर इंडिया स्टाफ को वेतन नहीं मिल रहा। यात्रियों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। यूनियनों की मान्यता रद करने या पायलटों को बर्खास्त करने से समस्या का हल नहीं होने वाला।

राज्यसभा में मौजूद नागरिक विमानन मंत्री अजित सिंह ने जवाब में कहा एयर इंडिया लगभग दीवालिया हो चुकी है। उसकी हालत का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि न तो वह अपने कर्मचारियों को वेतन दे पा रही है और न ही तेल कंपनियों व एयरपोर्ट अथॉरिटी की देनदारी चुकाने की स्थिति में है। सरकार ने हाल में इसे 30 हजार करोड़ रुपये का पैकेज दिया है, मगर पायलट यदि इसे चलाना ही नहीं चाहते तो पैकेज को रद करने पर विचार करना पड़ेगा। वैसे, सरकार पायलटों से बातचीत को तैयार है। मगर हड़ताल और बातचीत एक साथ नहीं चल सकते। पायलट बीमारी का बहाना बना रहे हैं। अजित का कहना था पायलटों के कॅरियर में प्रोन्नति के अवसर व सुविधाएं बढ़ाने के लिए सरकार जस्टिस धर्माधिकारी रिपोर्ट लागू करने पर एक-दो महीने में फैसला करेगी। इससे पहले पायलटों से भी बात की जाएगी।

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