नई दिल्ली, प्रेट्र। राफेल युद्धक विमान सौदे पर उठे राजनीतिक तूफान के बीच भारतीय वायुसेना ने चुपचाप इस फ्रांसीसी विमान का स्वागत करने की तैयारी कर ली है। इसके तहत विमानों के लिए विशेष हैंगर आदि के आधारभूत ढांचे का निर्माण किया जा रहा है। इसके अलावा पायलटों का प्रशिक्षण भी जारी है।

सूत्रों ने रविवार को बताया कि अंबाला वायुसेना स्टेशन पर राफेल विमानों की पहली खेप तैनात की जाएगी। यह वायुसेना का सबसे रणनीतिक वायुसैनिक अड्डा माना जाता है। यह भारत-पाक सीमा से करीब 220 किलोमीटर दूर है। राफेल की दूसरी खेप पश्चिम बंगाल स्थित हासिमारा बेस पर तैनात की जाएगी। अधिकारियों ने बताया कि सरकार ने पहले ही राफेल विमान के आधारभूत ढांचे के लिए 400 करोड़ रुपये मंजूर कर दिए हैं। इस रकम से दोनों सैन्य अड्डों के लिए शेल्टर, हैंगर और देखरेख संबंधी ढांचे खड़े किए जा रहे हैं।

पायलटों का एक और दल फ्रांस जाएगा
आधिकारिक सूत्रों के अनुसार भारतीय वायुसेना के पायलटों के एक दल को फ्रांस में पहले ही राफेल जेट का प्रशिक्षण दिया जा चुका है। इस साल के अंत में पायलटों का एक और दस्ता फ्रांस प्रशिक्षण के लिए भेजा जाएगा। मिसाइलें और अन्य युद्धक हथियार चलाने में सक्षम इस विमान की आपूर्ति भारत को अगले साल सितंबर से शुरू हो जाएगी। वायुसेना की एक टीम लगातार फ्रांस में राफेल की निर्माता कंपनी डसाल्ट एविएशन की मदद कर रही है। वह भारतीय जरूरतों के हिसाब से इस युद्धक विमान में जरूरी बदलाव करवा रही है।

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इजरायली एचएमडी भी होगा
राफेल जेट में भारत की मांग के अनुरूप कई उन्नत किस्म के बदलाव किए जा रहे हैं। इसमें इजरायली हेल्मेट माउंटेड डिस्प्ले (एचएमडी) भी होगा। यह उपकरण विमान में लगे पायलट के हेल्मेट में होता है। इस हेल्मेट में पायलट की आंख के ऊपर ही सारी जानकारी डिस्प्ले की जाती है। इससे पायलट आंखों के सामने किसी भी आब्जेक्ट के आने पर उस पर बिना समय गंवाए आसानी से हमला कर पाता है।
इसके अलावा भारत की मांग पर विमान में कुछ रडार वार्निग रिसीवर भी लगे होंगे। लो बैंड जामरों और दस घंटे की फ्लाइट डाटा रिकार्डिग भी संभव होगी। अतिरिक्त सुविधाओं में इंफ्रारेड सर्च और ट्रैकिंग सिस्टम भी होगा।

विमानों की परीक्षण उड़ानें शुरू
सूत्रों का कहना है कि डसाल्ट एविएशन भारत को आपूर्ति की जाने वाले राफेल युद्धक विमानों की परीक्षण उड़ानें भी शुरू कर दी हैं। कंपनी को यह सख्त हिदायत दी गई है कि वह विमान की आपूर्ति की टाइमलाइन का सख्ती से पालन करें। समझौता होने की तारीख से 36 महीनों में विमानों की आपूर्ति शुरू हो जाएगी जोकि 67 महीनों में पूरी होगी। फ्रांस इस सिलसिले में भारत को प्रगति रिपोर्ट नियमित रूप से देता है।
उल्लेखनीय है कि भारत सरकार ने सितंबर, 2016 में फ्रांस के साथ एक रक्षा समझौता किया है। इसके तहत 58,000 करोड़ रुपये में 36 राफेल जेट विमान खरीदे हैं। विपक्षी दल कांग्रेस ने राफेल विमान की कीमतों समेत इस सौदे के कई पहलुओं पर सवाल उठाए हैं।

 

Posted By: Arun Kumar Singh