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AIADMK vs AIADMK: विजय सरकार को समर्थन का एलान, 'अम्मा' की पार्टी में कैसे पड़ी दरार?

Published: Tue, 12 May 2026 04:57 PM (IST)

तमिलनाडु में विजय सरकार के शपथ ग्रहण के बाद AIADMK में आंतरिक कलह सामने आई है, जिसमें एक गुट ने मुख्यमंत्री विजय को समर्थन देने का ऐलान किया है।

AIADMK में विजय सरकार को समर्थन पर आंतरिक कलह

AIADMK में विजय सरकार को समर्थन पर आंतरिक कलह

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डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। तमिलनाडु में सत्तारूढ़ विजय सरकार के शपथ ग्रहण के कुछ दिनों बाद फ्लोर टेस्ट की तैयारी के बीच AIADMK में एक बार फिर आंतरिक कलह साफ दिखाई दे रही है। पार्टी के दो गुट आमने-सामने हैं, जिसमें एक गुट मुख्यमंत्री विजय को समर्थन देने के लिए तैयार है।

AIADMK में पड़ी दरार 

सीवी शनमुगम के नेतृत्व वाले गुट ने TVK (तामिलागा वेट्री कजगम) समर्थित विजय सरकार को समर्थन देने का फैसला लिया है। इस घोषणा के कुछ घंटों बाद AIADMK नेता अग्री एसएस कृष्णमूर्ति ने बागी विधायकों को सख्त चेतावनी दी।

उन्होंने कहा, 'AIADMK ने अपने सभी विधायकों को कल विधानसभा के फ्लोर टेस्ट में TVK के खिलाफ वोट करने का निर्देश दिया है। पार्टी के निर्देश का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।'

पलानीस्वामी को मानते हैं नेता 

पूर्व मंत्री ओएस मणियन ने भी साफ किया कि AIADMK के सभी 47 विधायकों ने एडप्पादी के पलानीस्वामी (EPS) को विधायक दल का नेता मानते हुए समर्थन दिया है।

उन्होंने कहा कि यह समर्थन पत्र स्पीकर जेसी डी प्रभाकर को सौंप दिया गया है। दूसरी ओर, MLA एसपी वेलुमणि और शनमुगम के नेतृत्व वाले गुट ने पार्टी की वरिष्ठ नेताओं के साथ बैठक के बाद विजय सरकार को समर्थन देने का ऐलान किया।

दूसरे गुट में हलचल तेज 

शनमुगम ने कहा कि वे मुख्यमंत्री विजय से मुलाकात करेंगे और लिखित समर्थन पत्र सौंपेंगे। उन्होंने याद दिलाया, 'हमने यह पार्टी DMK के खिलाफ बनाई थी। 53 सालों से हमारी राजनीति DMK विरोध पर केंद्रित रही है।' बैठक में DMK के समर्थन से AIADMK सरकार बनाने का प्रस्ताव रखा गया, लेकिन ज्यादातर सदस्यों ने इसे ठुकरा दिया।

माना जा रहा है कि पार्टी की चुनावी हार के बाद पलानीस्वामी की नेतृत्व क्षमता पर सवाल उठाते हुए करीब 30 विधायक इस खेमे में शामिल हैं। हालांकि वेलुमणि ने जोर देकर कहा कि यह पार्टी का टूटना नहीं है, बल्कि सही फैसले का इंतजार है। उन्होंने आरोप लगाया कि पार्टी के महासचिव DMK समर्थन से सरकार बनाने के पक्ष में थे, जिसका उन्होंने विरोध किया।

AIADMK का प्रदर्शन 

AIADMK ने 234 सीटों वाली विधानसभा में 167 पर चुनाव लड़ा लेकिन सिर्फ 47 सीटें जीत सकी। चुनाव परिणामों के बाद पलानीस्वामी ने कई बैठकें कीं, लेकिन शनमुगम, वेलुमणि समेत कई वरिष्ठ नेता उनसे दूर रहे।

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