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सुपरइंटेलिजेंस से AI दिग्गजों में चिंता, विकास की रफ्तार धीमी करने की उठी मांग

Published: Sun, 13 Sep 2026 10:26 PM (IST)

ऑर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) की तेज रफ्तार और सुपरइंटेलिजेंस के संभावित खतरों को लेकर दुनिया की प्रमुख एआई कंपनियों के शीर्ष अधिकारी चिंतित हैं।

AI की तेज रफ्तार पर प्रमुख दिग्गजों ने जताई चिंता

AI की तेज रफ्तार पर प्रमुख दिग्गजों ने जताई चिंता

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जागरण न्यूज नेटवर्क, नई दिल्ली। ऑर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) जितनी तेजी से आगे बढ़ रही है, उतनी ही तेजी से उसके संभावित खतरों को लेकर बहस भी तेज हो रही है। अब यह चिंता केवल तकनीक के आलोचकों तक सीमित नहीं है।

दुनिया की प्रमुख एआई कंपनियों के शीर्ष अधिकारी भी इस सवाल पर खुलकर बोल रहे हैं कि कहीं सुपरइंटेलिजेंस की दौड़ में सुरक्षा पीछे तो नहीं छूट रही।

बीबीसी की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी एआई कंपनी एंथ्रोपिक के सीईओ डेरियो एमोडेई ने हाल में कंपनी से इस्तीफा देने वाले शोधकर्ता जैकब काक्सन की चिंताओं का समर्थन करते हुए एआई विकास की रफ्तार को धीमा करने की जरूरत बताई।

उनका कहना है कि अगर एआई की क्षमता इसी तरह तेजी से बढ़ती रही और पर्याप्त सुरक्षा उपाय नहीं किए गए, तो आने वाले वर्षों में इसके नियंत्रण से बाहर होने का खतरा पैदा हो सकता है। स्थिति गंभीर हुई तो यह मानवता के अस्तित्व के लिए भी चुनौती बन सकती है।

AI की रफ्तार पर दिग्गजों ने जताई चिंता

काक्सन ने इंटरनेट मीडिया मंच 'एक्स' पर एक पोस्ट में आरोप लगाया था कि ओपनएआई और एंथ्रोपिक जैसी अग्रणी कंपनियां पर्याप्त सुरक्षा उपायों के बिना सुपरइंटेलिजेंस की ओर तेजी से बढ़ रही हैं।

उनका कहना था कि ऐसी स्थिति में कंपनियां मानवता के भविष्य को लेकर बेहद जोखिम भरा दांव लगा रही हैं। काक्सन करीब तीन वर्षों तक ओपनएआई और एंथ्रोपिक में शोध से जुड़े रहे हैं।

एमोडेई की चिंता को ओपनएआई के प्रमुख सैम आल्टमैन और एक्स तथा स्पेसएक्स के प्रमुख एलन मस्क का भी समर्थन मिला। एमोडेई की पोस्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए आल्टमैन ने कहा कि वह एमोडेई और काक्सन की चिंताओं से सहमत हैं और इस दिशा में कुछ हद तक रफ्तार धीमी करने की जरूरत है।

उन्होंने कहा कि ओपनएआई के भीतर भी यह विषय इन दिनों प्रमुख चर्चा का हिस्सा है। स्वतंत्र मूल्यांकनकर्ताओं को सुरक्षा व्यवस्था की जांच के लिए कर्मचारियों जैसी पहुंच देने के एमोडेई के सुझाव पर भी आल्टमैन ने सहमति जताई। मस्क ने संक्षिप्त प्रतिक्रिया में कहा, "डेरियो सही हैं।"

खतरे की चेतावनी पर मतभेद भी

हालांकि एआई के संभावित खतरों को लेकर सभी दिग्गज एक राय नहीं हैं। ग्राइंडर के सीईओ जार्ज एरिसन ने बीबीसी से कहा कि काक्सन और अन्य लोगों का यह कहना कि एआई मानव सभ्यता के लिए खतरा है, अपने आप में खतरनाक और गैरजिम्मेदाराना है।

एआई कंपनियों के लिए चिप बनाने वाली कंपनी एनवीडिया के प्रमुख जेनसन हुआंग ने भी काक्सन की चिंताओं को खारिज किया है। उनका रुख है कि एआई के विकास को लेकर इस तरह की आशंकाओं को बढ़ा-चढ़ाकर पेश नहीं किया जाना चाहिए।

डर का माहौल या वाकई गंभीर खतरा?

एआई की रफ्तार धीमी करने की मांग के सामने एक दूसरा सवाल भी खड़ा है—क्या ऐसा करना अमेरिका को चीन के मुकाबले कमजोर कर देगा? सीनेटर बर्नी सैंडर्स ने कहा है कि अगर अमेरिका एआई की दौड़ धीमी करता है तो चीन को इस क्षेत्र में बढ़त मिल सकती है।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप भी इस आशंका से सहमत नहीं हैं कि एआई मानव सभ्यता के अंत का कारण बन सकती है। उनका कहना है कि उनकी चिंता यह है कि अगर अमेरिका एआई की दौड़ में पीछे रह गया तो वह खुद को मुश्किल स्थिति में डाल सकता है।

फिलहाल उनका मानना है कि अमेरिका चीन से आगे है। कुछ विशेषज्ञ एआई उद्योग की आर्थिक स्थिति को भी इस बहस से जोड़कर देखते हैं।

उनका तर्क है कि एआई विकसित करने की लागत लगातार बढ़ रही है, जबकि कंपनियों की कमाई उस अनुपात में नहीं बढ़ रही। ऐसे में कुछ कंपनियां एआई को लेकर पैदा होने वाले डर और भविष्य की संभावनाओं दोनों को अपने कारोबारी हितों के लिए इस्तेमाल कर सकती हैं।

यही वजह है कि एआई पर मौजूदा बहस केवल तकनीक के खतरे तक सीमित नहीं है। इसमें सुरक्षा, रोजगार, भू-राजनीतिक प्रतिस्पर्धा और कंपनियों की आर्थिक स्थिति—सभी पहलू शामिल हैं।

एक तरफ एआई को मानव क्षमता बढ़ाने वाली क्रांतिकारी तकनीक माना जा रहा है, तो दूसरी तरफ सवाल यह है कि उसकी रफ्तार पर नियंत्रण कौन रखेगा और अगर कुछ गलत हुआ तो जिम्मेदारी किसकी होगी।

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