नई दिल्ली, जागरण ब्यूरो। लघु व सीमांत किसानों की खेती को लाभप्रद बनाने के लिए केंद्र सरकार ने कई कारगर कदम उठाए हैं। स्थानीय जलवायु के हिसाब से फसलों की उन्नत प्रजातियां विकसित की जा रही हैं, जिससे पैदावार बढ़ाई जा सके। वैज्ञानिक और मांग आधारित खेती को प्रोत्साहन देने के लिए कई कदम उठाए जाएंगे। किसान उत्पादक संगठन (एफपीओ) बनाकर बड़ा रकबा में वैज्ञानिक खेती को बढ़ावा देने के साथ अन्य सभी तरह की मदद मुहैया कराने की योजना पर काम शुरू कर दिया गया है। ऐसे छोटे किसानों को बैंकों से रियायती दर पर कर्ज मुहैया कराने का भी प्रविधान किया गया है। बढ़ती आबादी व बंटते परिवारों की वजह से छोटी होती जोत से कृषि क्षेत्र की चुनौतियां बहुत बढ़ गई हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 15 अगस्त को लालकिले की प्राचीर से इस विषय पर चिंता जताई थी। उन्होंने इन्हें संयुक्त रूप से ताकतवर बनाने की घोषणा की थी। इस दिशा में छोटे किसानों के लिए विशेष योजनाएं तैयार करने में कृषि मंत्रालय जुट गया है।

देश में 80 फीसद किसान छोटी जोत वाले किसान हैं, जिनके पास खेती वाली दो हेक्टेयर जमीन भी नहीं है। ऐसे किसानों की रोजी-रोटी के लिए सरकार विशेष मदद मुहैया कराएगीकृषि क्षेत्र में चलाई जा रही योजनाओं का लघु किसानों को ज्यादा से ज्यादा लाभ दिलाने के उद्देश्य से उनके नियमों में संशोधन भी किया जा सकता है। छोटी जोत के लिए आधुनिक टेक्नोलाजी का अधिक से अधिक प्रयोग किया जाएगा, जिसमें इंटिग्रेटेड फार्मिग सिस्टम अपनाया जाएगा। खेती की इस प्रणाली के तहत कम रकबा वाले खेतों में जहां बहु फसली खेती की जाएगी, वहीं खेती से जुड़े कई और उद्यम लगाए जा सकेंगे। छोटे खेतों में अधिक उत्पादकता वाली फसलों की खेती को बढ़ावा दिया जाएगा। मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक छोटी जोत में ¨सचाई के लिए माइक्रो इरिगेशन प्रणाली की सुविधा दी जाएगी, जिसका अधिक भार सरकार वहन करेगी। वर्ष 2015-2020 के दौरान 57 लाख हेक्टेयर से अधिक भूमि में माइक्रो इरिगेशन की सुविधा दी गई है।

Edited By: Shashank Pandey