नई दिल्ली (जयप्रकाश रंजन)। श्रीलंका में हुए आतंकी हमले के तार केरल से जुड़ने से कुछ नई उम्मीदें भी पैदा हुई हैं। इस तार की मदद से भारतीय जांच एजेंसियों को यह पता लगाने में मदद मिल सकती है कि कुछ साल पहले इस्लामिक स्टेट (आइएस) में शामिल होने सीरिया व इराक गए युवक-युवतियों का क्या हुआ? नवंबर, 2017 में आइएस का अंतिम किला मोसुल (इराक) में ध्वस्त होने के बाद उम्मीद थी कि आइएस पहुंचे भारतीयों से जुड़ा रहस्य सामने आएगा, लेकिन अब तक ऐसा नहीं हो सका है।

श्रीलंका में बीते हफ्ते ईस्टर के मौके पर आइएस से प्रभावित आतंकियों द्वारा हुए हमले के तार शुरुआत से ही भारत से जुड़े होने की बात आ रही है। दरअसल, इस तरह के हमले की आशंका जताते हुए भारत ने पहले ही श्रीलंका को सूचना भेजी थी, लेकिन वहां के प्रशासन ने उसे गंभीरता से नहीं लिया।

भारत ने यह सूचना तमिलनाडु में गिरफ्तार आइएस के संदिग्ध आतंकियों से मिली जानकारी के आधार पर साझा की थी। अब रविवार को राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआइए) ने केरल में आइएस का नेटवर्क चलाने वाले एक गिरोह को गिरफ्तार किया है। माना जा रहा है कि इन लोगों का श्रीलंका विस्फोटों के प्रमुख साजिशकर्ता जहरान हाशिम से संपर्क था।

अब तक की सूचनाओं के मुताबिक श्रीलंका में जिन आतंकियों ने हमले की साजिश रची, उनमें से कुछ आइएस में शामिल होने भी गए थे। जब आइएस का कुनबा बिखरा, तो वे वापस आ गए। श्रीलंका सरकार ने उनके बारे में सूचना होने के बाद भी कोई कदम नहीं उठाया था। मुमकिन है कि उन आतंकियों को भारत से वहां पहुंचे लोगों के बारे में भी पता हो।

हर स्तर पर हो रहा जानकारी जुटाने का प्रयास
आइएस में शामिल होने गए भारतीयों की जानकारी जुटाने के लिए भारत ने कूटनीतिक स्तर पर भी प्रयास किया है, लेकिन ठोस नतीजा नहीं मिल सका है। इस बारे में भारत ने सीरिया, इराक और अफगानिस्तान सरकार से संपर्क साधा था। मोसुल में जितने आतंकी मारे गए थे, उनकी शिनाख्त इराक सरकार करवा रही है, लेकिन इस प्रक्रिया के पूरा होने में अभी वक्त लगेगा।

अफगानिस्तान के नांगरहर में अप्रैल, 2017 में अमेरिका ने बेहद शक्तिशाली बम गिराया था, जिसमें 90 से ज्यादा आतंकियों के मारे जाने की पुष्टि हुई थी। इनमें कुछ भारतीयों के मारे जाने की बात सामने आई थी। केरल से गए कुछ युवाओं के घर पर आइएस की तरफ से फोन किया गया था कि उनकी मौत हो चुकी है।

हवाई अड्डों पर पकड़े जा चुके हैं कई युवा
2016 और 2017 में भारतीय एजेंसियों की सतर्कता से आइएस से प्रभावित कई युवाओं को हवाई अड्डों पर रोका गया था। केरल पुलिस ने नंवबर, 2017 के पहले हफ्ते में पांच ऐसे युवाओं को गिरफ्तार किया था, जो सीरिया जाने की तैयारी कर रहे थे।

इनकी जांच से ही यह पता चला कि 21 युवक-युवतियों का एक दल आइएस में शामिल होने के लिए पहले ही विदेश पहुंच चुका था। इनमें से कुछ के ईरान होते हुए अफगानिस्तान पहुंचने की बात सामने आई थी। श्रीलंका के हादसे को देखते हुए भारत के लिए इन रहस्यों पर से पर्दा हटाना और जरूरी हो गया है।

Posted By: Prateek Kumar

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