3 दिन जहर उगलने के बाद बदले मस्क के सुर, बोले- प्रतिस्पर्धा से भारतीय उपभोक्ताओं को मिलेगा फायदा
भारत में स्टारलिंक को अनुमति न मिलने पर पहले नाराजगी जताने वाले एलन मस्क अब सस्ते इंटरनेट और प्रतिस्पर्धा से उपभोक्ताओं को फायदे की बात कर रहे हैं।

3 दिन जहर उगलने के बाद बदले मस्क के सुर। (रॉयटर्स)
HighLights
मस्क ने स्टारलिंक की भारत में किफायती कीमत की बात कही।
प्रतिस्पर्धा से भारतीय उपभोक्ताओं को अधिक विकल्प मिलेंगे, मिलेगा फायदा।
राजीव कुमार ने मस्क के एकाधिकार को चुनौती देने का सुझाव दिया।
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। उपग्रह संचार कंपनी स्टारलिंक को भारत में कारोबार की अनुमति नहीं मिलने से बौखलाए अमेरिकी उद्योगपति एलन मस्क ने पहले तो तीन दिनों तक इस मुद्दे पर जहर उगला। अब वह सस्ते इंटरनेट की बात कहकर भारतीयों को लुभाने में जुट गए हैं।
तकनीकी दुनिया के दिग्गज मस्क ने रविवार को कहा कि भारत में स्टारलिंक की कीमत किफायती रखनी होगी। अगर यह बहुत महंगी हुई तो कोई इसे नहीं खरीदेगा। प्रतिस्पर्धा से उपभोक्ताओं को अधिक विकल्प मिलेंगे।
इससे पहले मस्क ने स्टारलिंक को लाइसेंस नहीं मिलने का मुद्दा उठाते हुए पूछा था कि क्या अंबानी भारत के असली बॉस हैं? इसके अगले दिन उन्होंने मुकेश अंबानी को भारत का प्रधानमंत्री बता दिया था। शनिवार को उन्होंने एक्स पर मीडिया रिपोर्ट के दो स्क्रीनशॉट साझा किए थे, जिनमें रिलायंस और भाजपा के संपर्कों के बारे में लिखा गया था।
मस्क का यह बदला हुआ तेवर ऐसे समय सामने आया है, जब रिलायंस इंडस्ट्रीज की डिजिटल शाखा जियो प्लेटफॉर्म्स भारत के अब तक के सबसे बड़े आईपीओ की तैयारी कर रही है। इसके लिए 21 अक्टूबर से आवेदन शुरू होने की संभावना है।
स्टारलिंक के मालिक ने एक्स पर लिखा-असल बात यह है कि प्रतिस्पर्धा से भारत के आम नागरिकों को ज्यादा विकल्प मिलेंगे और उन्हें बहुत फायदा होगा, जैसा कि हमेशा होता है। अंबानी का मुनाफा कम हो सकता है, लेकिन उनका कारोबार बंद नहीं होने वाला है।
इसके साथ ही मस्क ने मुकेश अंबानी के समर्थकों पर दोहरी बातें और अतिशयोक्ति करने का आरोप भी लगाया। कहा कि वे एक तरफ तो यह तर्क देते हैं कि भारत में अंबानी के बेहद सस्ते इंटरनेट के सामने मस्क की सेटेलाइट इंटरनेट सेवा टिक नहीं सकती। दूसरी ओर यह भी दावा करते हैं कि इससे कड़ी प्रतिस्पर्धा का खतरा है।
मस्क के एकाधिकार को चुनौती दे भारत: राजीव कुमार
नीति आयोग के पूर्व उपाध्यक्ष राजीव कुमार ने रविवार को कहा कि भारत अंतरिक्ष-आधारित कम्युनिकेशन में एलन मस्क के एकाधिकार को चुनौती दे सकता है और उसे ऐसा करना चाहिए।
एक्स पर एक पोस्ट में कुमार ने कहा कि सरकार के पास यूएसओ (सार्वभौमिक सेवा दायित्व) कोष में 145 अरब अमेरिकी डॉलर पड़े हैं।
इस राशि का इस्तेमाल अब एयरटेल और रिलायंस जियो जैसी भारतीय दूरसंचार कंपनियों की मदद के लिए किया जाना चाहिए। इससे वे एलन मस्क की स्टारलिंक से मुकाबले के लिए तत्काल अपने उपग्रह नेटवर्क स्थापित कर सकेंगे।
(समाचार एजेंसी पीटीआई के इनपुट के साथ)
