यह एक आर्काइव लेख है, जिसे May 15, 2014 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
मोदी कैबिनेट में सबको साधने की तैयारी
सत्ता के करीब पहुंचकर भाजपा में फिर से दिख रहे मतभेद और दूरी को मिटाने की कवायद तेज हो गई। ...और पढ़ें

नई दिल्ली, जागरण ब्यूरो। सत्ता के करीब पहुंचकर भाजपा में फिर से दिख रहे मतभेद और दूरी को मिटाने की कवायद तेज हो गई। सबसे वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी को जहां लोकसभा अध्यक्ष पद देने पर लगभग सहमति बन गई है। वहीं सुषमा स्वराज को लेकर खींचतान जारी है। माना जा रहा है कि सुषमा नाराज हैं और वह कोई बड़ी जिम्मेदारी चाहती हैं। बहरहाल, इन विवादों को छोड़ दिया जाए तो नरेंद्र मोदी के कैबिनेट का खाका पूरी तरह तैयार हो गया है। आडवाणी के लोकसभा अध्यक्ष बनने की स्थिति में मोदी ही राजग के भी अध्यक्ष होंगे जबकि संयोजक के पद पर शिरोमणि अकाली दल, शिवसेना या तेदेपा के किसी नेता को बिठाया जा सकता है।
बुधवार को गांधीनगर में हुई बैठक के बाद दिल्ली में दिन भर भाजपा और संघ की बैठकों का दौर चलता रहा। पार्टी अध्यक्ष राजनाथ सिंह के आवास पर संघ नेता सुरेश सोनी, संगठन महामंत्री रामलाल, संगठन सचिव वी सतीश और सौदान सिंह की बैठक हुई। बाद में महासचिव अमित शाह भी वहां पहुंचे। लंबी बैठक के बाद राजनाथ सिंह ने लालकृष्ण आडवाणी से मुलाकात कर उनकी भूमिका पर चर्चा की। उधर, संघ कार्यालय में नितिन गडकरी और अमित शाह के साथ संघ नेताओं की बैठक हुई। दरअसल भाजपा के शीर्ष नेताओं की भूमिका को लेकर संघ भी सक्रिय हो गया है। इससे पहले सुबह उमा भारती ने नितिन गडकरी और बाद में आडवाणी से मुलाकात कर अपनी भूमिका पर उनका मन टटोला।
जातिगत समीकरण पर दुरुस्त होगी कैबिनेट
सूत्रों के अनुसार बुधवार को गांधीनगर में मोदी, राजनाथ सिंह, अरुण जेटली और नितिन गडकरी के बीच हुई बैठक में ही यह तय हो गया कि राज्यसभा के एक दो शीर्ष नेताओं को ही कैबिनेट में जगह दी जाएगी। जाहिर है कि मंत्री बनने की ख्वाहिश पाले बैठे राज्यसभा के कई नेताओं को संगठन में ही काम करना होगा। वरना लोकसभा में जीतकर आने वाले सांसदों को कुछ इस तरह समायोजित किया जाएगा, जिससे जातिगत समीकरण को भी साधा जा सके। मसलन बिहार में यादव, कुशवाहा, अल्पसंख्यक और अगड़ी जातियों से आने वालों को मौका मिलेगा तो उत्तर प्रदेश में भी यही समीकरण दोहराया जाएगा। सूत्रों के अनुसार उत्तर प्रदेश से मुरली मनोहर जोशी और कलराज मिश्रा जैसे दो ब्राह्मण चेहरों को कैबिनेट में जगह मिलना लगभग तय है।
पार्टी अध्यक्ष राजनाथ सिंह को भी संगठन छोड़कर सरकार में संभवत: रक्षा मंत्रालय संभालने को कहा जा सकता है। अरुण जेटली को वित्त जैसा महत्वपूर्ण मंत्रालय दिया जा सकता है। लेकिन सुषमा स्वराज की जिम्मेदारी अभी तय नहीं हो पाई है। गांधीनगर में बैठक से पहले गडकरी और राजनाथ सिंह ने सुषमा को टटोलने की कोशिश की थी। संभवत: मोदी और सुषमा की सीधी बात के बाद ही इसकी गुत्थी खुलेगी। कड़े संघर्ष के बाद जीतकर आने वाले सांसदों को मोदी कैबिनेट में तोहफा मिल सकता है। माना जा रहा है कि अगड़ी जातियों के साथ साथ पिछडे़, अतिपिछड़े और आदिवासी मंत्रियों का समन्वय कुछ इस तरह किया जाएगा, जिससे पूरा कैबिनेट संतुलित दिखे। यह भी लगभग तय है कि हरियाणा में पार्टी सात के आंकड़े को पार करती है तो कम से कम दो मंत्री बनाए जा सकते हैं। पंजाब से जेटली के अलावा अकाली दल के मंत्री बनाए जाएंगे। हालांकि कैबिनेट को अभी अंतिम रूप नहीं दिया गया है। दरअसल चुनावी नतीजों को देखने के बाद ही उसे अंतिम रूप दिया जाएगा। उससे पहले पार्टी पूरी सतर्कता से यह परख लेना चाहती है कि उसे पूर्ण बहुमत के लिए अन्य सहयोगियों की जरूरत है या नहीं। बताते हैं कि तमिलनाडु में भाजपा के सहयोगी दलों के नेता जीते तो उन सबको कैबिनेट में जगह मिल सकती है।
इंफ्रास्ट्रक्चर पर भाजपा का नियंत्रण
रक्षा, गृह, विदेश और वित्त जैसे मंत्रालय तो बड़ी पार्टी के पास होते ही हैं, मोदी के कैबिनेट में ढांचागत विकास के जुड़े मंत्रालय भी भाजपा के मंत्रियों के हवाले होंगे। दरअसल मोदी चाहते हैं कि उन मंत्रालयों में कोई बाहरी दखल न हो।
अमित शाह संगठन से सरकार तक होंगे प्रभावी
लोकसभा चुनाव की जीत के बाद कुछ महीनों में होने वाले विधानसभा चुनावों की दृष्टि से भी कैबिनेट की रूपरेखा तय होगी। मोदी के नजदीकी अमित शाह को फिलहाल तो कैबिनेट में स्थान नहीं मिलेगा लेकिन भविष्य में उनकी भूमिका मोदी तय कर सकते हैं। फिलहाल वह संगठन में रहते हुए मोदी के आंख, नाक, कान होंगे। बताते हैं कि राजनाथ के सरकार में आने के बाद गडकरी के लिए फिर से अध्यक्ष पद तक पहुंचना आसान होगा। वैसी स्थिति में शाह महासचिव रहते हुए उन राज्यों पर फोकस करेंगे जहां विधानसभा चुनाव होने हैं। उत्तर प्रदेश के बाद बिहार प्राथमिकता में है।
टीम मोदी के संभावित चेहरे
नई दिल्ली, जागरण न्यूज नेटवर्क। चुनाव नतीजे सामने आने भले ही शेष हों लेकिन नरेंद्र मोदी की संभावित कैबिनेट के चेहरे तय हो गए हैं। लालकृष्ण आडवाणी का लोकसभा अध्यक्ष बनना तय माना जा रहा है और जोशी मंत्रिमंडल में स्थान पा सकते हैं। वहीं 70 वर्ष से ऊपर के एकमात्र मंत्री होंगे। मोदी का मंत्रिमंडल इस तरह का हो सकता है।
सुषमा स्वराज - विदेश या रक्षा
राजनाथ सिंह - गृह या रक्षा
मुरली मनोहर जोशी - मानव संसाधन विकास
अरुण जेटली - वित्त
नितिन गडकरी - भूतल परिवहन या कृषि
रविशंकर प्रसाद - विधि
शाहनवाज हुसैन - अल्पसंख्यक मामले
स्मृति ईरानी - महिला एवं बाल विकास
डॉ. हर्षवर्धन - स्वास्थ्य
पीयूष गोयल - टेलीकॉम
गोपीनाथ मुंडे - कृषि
मेनका गांधी - पर्यावरण
रामविलास पासवान - रसायन व उर्वरक
अन्य मंत्रियों में दिल्ली से उदित राज, महाराष्ट्र से दिलीप गांधी और मध्य प्रदेश से फग्गन सिंह कुलस्ते तय माने जा रहे हैं।
