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'तो क्या सभी पुरुषों को जेल में डाल दें?', आवारा कुत्तों के मामले में SC की टिप्पणी पर एक्ट्रेस राम्या के बयान ने मचाया बवाल

Published: Thu, 08 Jan 2026 04:39 PM (IST)

कन्नड़ अभिनेत्री और पूर्व सांसद दिव्या संपदना उर्फ राम्या ने आवारा कुत्तों पर सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी पर कड़ी प्रतिक्रिया ...और पढ़ें

एक्ट्रेस राम्या ने सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी की आलोचना। (फाइल फोटो)

एक्ट्रेस राम्या ने सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी की आलोचना। (फाइल फोटो)

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। कन्नड़ फिल्म एक्ट्रेस और पूर्व सांसद दिव्या संपदना उर्फ राम्या ने आवारा कुत्तों के मामले को लेकर सुप्रीम की सुनवाई पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट की कुत्ते के मूड के बारे में की गई टिप्पणी की तुलना पुरुषों से की।

सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को कहा कि कुत्ते का मूड पता लगाना संभव नहीं है। यह बात कोर्ट ने उन लोगों के जवाब में कही जिन्होंने आवारा कुत्तों के खतरे से जुड़े उसके आदेश को चुनौती दी थी और यह तर्क दिया था कि जानवरों के साथ सहानुभूति से पेश आने पर हमलों को टाला जा सकता है। इस पर राम्या ने बयानबाजी करके मामले पर विवाद खड़ा कर दिया है।

राम्या ने क्या कहा?

सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए एक्ट्रेस रम्या ने एक इंस्टाग्राम स्टोरी पर लिखा, "किसी आदमी का मन भी नहीं पढ़ा जा सकता - पता नहीं वह कब रेप/मर्डर करेगा तो क्या सभी आदमियों को जेल में डाल दें?" यह पहली बार नहीं है जब रम्या ने ऐसे विवादों में कड़ी टिप्पणी की है। वह अक्सर सामाजिक और नागरिक महत्व के मुद्दों पर बोलती रही हैं।

राम्या पहले भी रेणुकास्वामी मर्डर केस पर बोलने के बाद एक विवाद में फंस गई थीं। उन्होंने कथित मर्डर केस में एक्टर दर्शन की गिरफ्तारी पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा था कि कोई भी कानून से ऊपर नहीं है और कोई भी लोगों को पीटकर या मारकर नहीं घूम सकता।

क्या है मामला?

दरअसल, सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं की ओर से सीनियर वकील कपिल सिब्बल ने दलील दी कि अगर कुत्तों की जगह पर कब्जा किया जाएगा तो वे हमला करेंगे। इस पर जस्टिस विक्रम नाथ ने जवाब दिया कि यह सिर्फ काटने की बात नहीं है, बल्कि कुत्तों से होने वाले खतरे की भी बात है। उन्होंने कहा, "आप कैसे पहचानेंगे? सुबह कौन सा कुत्ता किस मूड में है, आपको नहीं पता।"

सुप्रीम कोर्ट की तीन जजों की बेंच में जस्टिस विक्रम नाथ, संदीप मेहता और एनवी अंजारिया शामिल थे। यह पीठ आवारा कुत्तों और मवेशियों के मामले की सुनवाई कर रही थी।

पिछले साल नवंबर में सुप्रीम कोर्ट ने अस्पतालों, स्कूलों, स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स, बस स्टैंड और रेलवे स्टेशनों जैसी जगहों से आवारा कुत्तों को हटाने का निर्देश दिया था और स्टेरिलाइजेशन और वैक्सीनेशन की सही प्रक्रिया के बाद उन्हें तय शेल्टर में भेजने का आदेश दिया था।

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