भोपाल, एएनआइ। सामाजिक कार्यकर्ता अब्दुल जब्बार, जिन्होंने 1984 के भोपाल गैस त्रासदी के पीड़ितों और बचे लोगों के लिए न्याय के लिए लड़ाई लड़ी। अब एक लंबी बीमारी के बाद गुरुवार को उनका मध्य प्रदेश की राजधानी के एक निजी अस्पताल में निधन हो गया। जब्बार का पिछले कुछ महीनों से इलाज चल रहा था। बता दें कि उन्हें 50 फीसदी तक दिखना बंद हो गया था और दुनिया की सबसे खराब औद्योगिक आपदा भोपाल गैस त्रासदी में फेफड़े से जुड़ी समस्या का सामना करना पड़ा था।

उन्होंने गैस त्रासदी पीड़ितों के परिजनों और बचे लोगों के लिए मुआवजे की मांग करते हुए कई विरोध प्रदर्शन किए। जब्बार भोपाल गैस पीड़िता महिला उद्योग संगठन के संयोजक थे, जिन्होंने सबसे खतरनाक औद्योगिक त्रासदी पीड़ितों और उनके परिजनों को न्याय दिलाने के लिए सहजता से काम किया।

मध्य प्रदेश सरकार ने गुरुवार को घोषणा की थी कि वह उसके इलाज का खर्च वहन करेगी। इससे पहले कि सरकार अपनी चिकित्सा स्थिति को सुधारने के लिए कुछ कर पाती, घोषणा के कुछ ही घंटों बाद जब्बार का निधन हो गया।

जहरीले गैस की चपेट में रात

2/3 दिसंबर 1984 की भयावह रात को यह हादसा हुआ, जब यूनियन कार्बाइड की फर्टिलाइजर फैक्ट्री से जहरीली गैस का रिसाव हो गया। यह रिसाव इतना ज्यादा था कि पूरे शहर पर बादल की तरह एक शमियाना सा छा गया। बीच रात को लोग सो रहे थे। इस जहरीले गैस की चपेट में आकर कईयों की मौत हो गयी और जो बचे उनके फेफड़े कमजोर हो गए, आखें खराब हो गईं और भी कई तरह से लोग विकलांग हो गए। रिपोर्ट के मुताबिक, इसमें 15000 लोगों की जान गई थी।

Posted By: Nitin Arora

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