नई दिल्ली, जागरण संवाददाता। एम्स ट्रॉमा सेंटर में मौत से जूझ रही बच्ची कोमल [परिवर्तित नाम] अगर ठीक हो भी जाती है, तो वह मंदबुद्धि ही रहेगी। जिस तरीके की उसके शरीर पर गंभीर चोटें आई हैं, उसमें उसके शारीरिक और मानसिक दोनों ही रूप में पूरी तरह स्वस्थ होने की उम्मीद 20 फीसदी से भी कम है। गुरुवार को उसकी तबीयत में काफी सुधार आया, लेकिन दिमाग में बरकरार संक्रमण, उसकी हालत को नाजुक बनाए हुए है।

कोमल का इलाज कर रहे डॉ. दीपक अग्रवाल ने बताया कि कोमल को जितनी गहरी चोटें आई है, वह भले ही ठीक हो जाए, लेकिन दिमाग में आई चोट का असर उसके मस्तिष्क पर जीवन भर रहे तो आश्चर्य नहीं। ऐसी हालत में कोई चमत्कार ही उसे पूरी तरह से स्वस्थ बना सकता है। उन्होंने बताया कि सोमवार से हमने बच्ची को एक एंटीबायोटिक दवा देना शुरू किया था। इससे छाती और खून से संक्रमण खत्म हो गया है। जिगर और गुर्दे की स्थिति में भी सुधार हो रहा है, लेकिन दिमाग से संक्रमण कम नहीं हो रहा, जो हमारे लिए चिंता का कारण बना हुआ है। दिमाग में संक्रमण समाप्त होने पर ही हम एक और सर्जरी कर सकेंगे, जोकि बेहद जरूरी है। वेंटिलेटर से हटाए जाने के बारे में उन्होंने कहा कि जिस तेजी से हालत में सुधार हो रहा है, शुक्रवार को उसे वेंटिलेटर से हटाने के बारे में विचार किया जा सकता है।

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