308 चक्के वाला ट्रक, 200 टन की मशीन और 2 करोड़ का डीजल... बेल्जियम से भारत आए सबसे बड़े वेसल की A टू Z डिटेल
उत्तर प्रदेश के चंदौली में 308 पहियों वाला एक विशाल मेगा ट्रक 200 टन वजनी औद्योगिक वेसल लेकर बेल्जियम से बलरामपुर चीनी मिल जा रहा है।

308 पहियों वाला मेगा ट्रक और 200 टन वेसल की पूरी डिटेल

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। जिस देश में सड़क किनारे जेसीबी (JCB) की साधारण सी खुदाई देखने के लिए भी सैकड़ों लोगों की भीड़ जमा हो जाती है, जरा सोचिए। अगर वहां की सड़कों पर अचानक 308 पहियों वाला एक 'दैत्यरूपी' मेगा ट्रक और उस पर लदी 200 टन की भारी-भरकम मशीन सामने आ जाए, तो नजारा कैसा होगा?
जी हां, उत्तर प्रदेश के कई जिले में कुछ ऐसा ही अद्भुत नजारा देखने को मिला। 308 चक्के वाला मेगा ट्रक को देखने के लिए लोगों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी है। फिलहाल यह ट्रक गाजीपुर के लिए रवाना हो चूका है।
लेकिन सवाल यह है कि आखिर 308 पहियों वाला यह मेगा ट्रक आ कहां से रहा है? इसे जाना कहां है? यह कौन-कौन से रास्तों से होकर गुजरा, अब तक इसमें कितना डीजल फूंक दिया गया और सबसे जरूरी बात इस भारी-भरकम मशीन का असली काम क्या है? आइए, इस मेगा ट्रक की पूरी सफरनामा और इससे जुड़े हर एक दिलचस्प फैक्ट के बारे में विस्तार से जानते हैं।

कहां से आई है 200 टन वजनी मशीन?
200 टन वजनी यह औद्योगिक वेसल यूरोपीय देश बेल्जियम से समुद्री रास्ते से भारत आया है। यह वेसल बेल्जियम के एंटवर्प बंदरगाह से ओडिशा के पारादीप बंदरगाह पहुंचा। इसके बाद इसे विशेष हाइड्रोलिक ट्रक के जरिये सड़क मार्ग से बलरामपुर स्थित चीनी मिल लाया जा रहा है।
सोमवार तक ये यह ट्रक बनारस पहुंचा था। मंगलवार सुबह राजातालाब से रिंग रोड चढ़ाते हुए हरहुआ, संदहा होते हुए गाजीपुर के लिए रवाना हो गया है।
रूट क्लेरेंस सबसे बड़ी समस्या
308 पहिए वाले, 100 फीट लंबे और लगभग सात मीटर चौड़े ट्रेलर को निकालने के लिए सड़कें बाधा बनी हुई है। कहीं सड़क की चौड़ाई कम है तो कहीं फूटओवर ब्रिज तो कहीं बिजली के खंभे और होर्डिंग्स समस्या बनी हुई है।
रास्ता साफ करने के लिए लगातार काम चल रहा है यहीं वजह है कि ट्रक अपनी औसत स्पीड से (20 किमी/प्रतिदिन) से कम रस्तार से चल पा रहा है।
किन राज्यों से होकर गुजरा ट्रक?
308 पहियों वाला यह ट्रक ओडिशा के पारादीप पोर्ट से लंबी सड़क यात्रा पर निकला है। ओडिशा के बाद इसने झारखंड,होते हुए बिहार की सीमा में कदम रखा। बिहार के औरंगाबाद, रोहतास और कैमूर जिलों से होकर गुजरते हुए, इसने नौबतपुर के रास्ते उत्तर प्रदेश के चंदौली जिले में एंट्री ली।
अब चंदौली से आगे बढ़ते हुए यह वाराणसी, गाजीपुर, आजमगढ़ और लखीमपुर खीरी समेत यूपी के कई बड़े जिलों को पार करेगा। इसके सफर का आखिरी पड़ाव बलरामपुर शुगर मिल है, जहां इस मशीन को डिलीवर किया जाना है।

किस काम आएगा 200 टन वजनी वेसल?
बेल्जियम से मंगाया गया यह 200 टन वजनी वेसल बलरामपुर चीनी मिल से जुड़े एथनॉल प्लांट में स्थापित किया जाएगा। इस वेसल के अंदर 'वैक्यूम बॉयलर' जैसे भारी औद्योगिक उपकरण लगे हैं।
बलरामपुर चीनी मिल्स लिमिटेड (BCML) इस वेसल का इस्तेमाल केवल चीनी उत्पादन तक सीमित न रखकर, गन्ने से एथनॉल जैसे सह-उत्पाद तैयार करने के लिए करेगी।
अब तक इसमें कितना डीजल फूंका गया?
ट्रक चालक के अनुसार अब तक 2 करोड़ का डीजल की खपत हो चुकी है। ट्रक के ड्राइवर ने बताया कि रोजाना 200 लीटर डीजल की खपत हो रही है। संभावना है कि आने वाले नवरात्र तक यह ट्रक लखीमपुर प्लांट तक पहुंच जाएगा।

308 पहिए वाले ट्रक की खासियत
200 टन वजनी, 100 फीट लंबे और 7 मीटर चौड़े विशाल वेसल को सड़क मार्ग से लखीमपुर खीरी स्थित बलरामपुर चीनी मिल तक पहुंचाने के लिए 308 पहियों वाले एक विशेष हैवी-ड्यूटी ट्रक का इस्तेमाल किया जा रहा है।
जेएम बक्शी ग्रुप द्वारा संचालित इस परिवहन कार्य में स्वीडिश ऑटोमोबाइल दिग्गज वोल्वो का Volvo FH16 ट्रक मॉडल लगाया गया है।
100 टन से अधिक भार सहने के लिए डिजाइन किया गया यह ट्रक 600 से 780 HP की जबरदस्त इंजन क्षमता और लगभग 3800 Nm का प्रचंड टॉर्क पैदा करता है, जो सैकड़ों टन वजन के सिंगल-यूनिट वेसल का भार 308 पहियों में समान रूप से विभाजित करके बिना किसी रुकावट के खींचने में सक्षम है।
