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    महाराष्‍ट्र के 28 डॉक्‍टरों की इस टीम पर आप भी करेंगे नाज, इन्‍हें हमारा सलाम

    By Kamal VermaEdited By:
    Updated: Wed, 03 Oct 2018 08:17 PM (IST)

    हाल ही में महाराष्‍ट्र से दो मामले ऐसे सामने आए जिसमें दो बाइक सवारों ने दो अलग-अलग लोगों की जान बचाकर उन्‍हें नई जिंदगी दी। इन दोनों मामलों ने आम जन का ध्‍यान अपनी ओर खींचा है।

    महाराष्‍ट्र के 28 डॉक्‍टरों की इस टीम पर आप भी करेंगे नाज, इन्‍हें हमारा सलाम

    नई दिल्‍ली [जागरण स्‍पेशल]। हाल ही में महाराष्‍ट्र से दो मामले ऐसे सामने आए जिसमें दो बाइक सवारों ने दो अलग-अलग लोगों की जान बचाकर उन्‍हें नई जिंदगी दी। इन दोनों मामलों ने आम जन का ध्‍यान अपनी ओर खींचा है। इन दो अलग-अलग मामलों में जो दो लोग जीवन के रखवाले बने उनमें से एक का नाम अजीम अहमद और तेजस कांबली है। यह दोनों ही पेशे से डॉक्‍टर हैं। लेकिन इनका परिचय केवल यहीं पर ही खत्‍म नहीं हो जाता है। न ही दो लोगों की जान बचाना इनके लिए कोई इत्तफाक ही था। दरअसल, यह दोनों महाराष्‍ट्र के उन 28 डॉक्‍टरों की टीम का हिस्‍सा हैं जो अपनी रॉयल एनफील्‍ड बाइक पर सभी तरह की इमरजेंसी मेडिकल किट और इक्‍यूपमेंट लेकर चलते हैं। इनकी खासियत है कि यह मेडिकल प्रैक्शिनर्स अपने साथ ऑक्‍सीजन सिलेंडर समेत आपात स्थिति में काम आने वाले कई तरह के सामान और दवाई अपने पास रखते हैं, जिससे वक्‍त पड़ने पर मरीज की जान बचाई जा सके।

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    वरदान है ये एंबुलेंस सर्विस
    मुंबई समेत लगभग पूरे महाराष्‍ट्र के लिए यह बाइक सवार मोबाइल डॉक्‍टर और एबुलेंस की टीम लोगों के लिए वरदान साबित हो रही है। इसकी वजह ये भी है कि एंबुलेंस को अक्‍सर जरूरतमंद के पास पहुंचने में लंबा समय लग जाता है। ऐसे में मरीज की हालत नाजुक हो सकती है या फिर उसकी जान भी जा सकती है। उसमें भी यदि बात तंग गलियों से होकर गुजरने की हो तो यह दूर की ही कौड़ी होती है। ऐसे में बाइक एंबुलेंस के अलावा दूसरी कोई एंबुलेंस मरीज तक नहीं पहुंच पाती है। ऐसे समय में चमचमाती व्‍हाइट रॉयल एनफील्ड थंडरबर्ड बाइक राहत जरूर दिलाती है। इसे सुनकर पहली बानगी आप के मन में यह ख्‍याल जरूर आएगा कि आखिर बाइक पर रोगी को कैसे अस्‍पताल पहुंचाया जा सकता है। लेकिन विश्‍वास मानें ये संभव है। यह संभव हुआ है इन बाइक पर सवार डॉक्‍टरों की बदौलत।

    महाराष्‍ट्र सरकार का पायलट प्रोजेक्‍ट
    आपको यहां पर इससे जुड़ी एक खास बात और बता देते हैं। दरअसल, यहां चलाई जा रही यह सेवा पूरी तरह से फ्री है। यह महाराष्ट्र इमर्जेंसी मेडिकल सर्विस (MEMS) का एक पायलट प्रॉजेक्ट है, जो 108 ऐम्बुलेंस सर्विस संचालित करती है। इसके जरिए तेजी से और बुरे ट्रैफिक की स्थिति में भी लोगों को मदद पहुंचाने की कोशिश की जाती है। जैसे ही 108 नंबर पर कॉल मिलती है वैसे ही नजदीकी बाइक और एक चार पहिया ऐम्बुलेंस को मदद के लिए मौके पर कंट्रोल रूम के द्वारा भेज दिया जाता है। बाइक के जरिए मदद तेजी से पहुंचाई जाती है। इस बाइक एंबुलेंस में ट्रॉमा किट, रोगी को फ्रेक्‍चर हो जाने पर दी जाने वाली सुविधा, ऑक्‍सीजन सिलेंडर, मेनवल वेंटिलेटर किट समेत आपात स्थिति में काम में आने वाली तीस तरह की दवाईयां शामिल होती हैं। इसके अलावा आपात स्थिति में गर्भवति महिलाओं के लिए डिलीवरी किट भी इनके पास होती है।

    जब महिला के लिए वरदान बने डॉक्‍टर अजीम
    पिछले सप्‍ताह सामने आए दो मामलों में से एक मामले में डॉक्‍टर अजीम अहमद मलाड में ऐसी ही एक महिला के लिए वरदान बनें थे। इस महिला को प्रीमेच्‍योर डिलीवरी के बाद शरीर से खून का रिसाव हो रहा था। अजीम ने तुरंत वहां पर पहुंचकर बच्‍चे की गर्भनाल को काटकर मां से अलग किया और खून रिसाव को भी बंद कर दिया था। वहां मौजूद लोग और महिलाएं ये सब कुछ देखकर हैरान थे। इसी दौरान सब कुछ सही होने पर परिजनों ने उनका शुक्रिया अदा करने के साथ उनको चाय-पानी के लिए भी पूछा और साथ ही उनका नबंर भी मांगा। लेकिन डॉक्‍टर अजीम ने बस इतना ही कहा कि “आप 108 डायल करें मैं आ जाउंगा”। यह इन तमाम डॉक्‍टरों की खासियत है।

    एक और मामला
    यह कुछ घटनाएं नहीं है जब इस तरह की आपात मदद मरीज को पहुंचाई गई हो। डॉक्‍टर अहमद ने इसी तरह की मदद गोरेगांव के पेरू बाग में भी पहुंचाई थी। वहां पर एक घर में आग लगी थी जिसमें तीन लोग फंसे हुए थे। यहां पहुंचना उनके लिए काफी बड़ी चुनौती थी। वह मौके पर कई पथरीले रास्‍तों से होते हुए पहुंचे थे और एक व्‍यक्ति को आग से निकालकर उसे प्राथमिक उपचार देकर उसकी जान बचाई थी। वहां की भौगोलिक स्थिति इतनी खराब थी कि मरीज को स्‍ट्रेचर से नजदीकी अस्‍पताल ले जाने के लिए कुछ अन्‍य लोगों की भी मदद ली गई थी।

    5 हजार लोगों को दी तुरंत राहत
    अगस्‍त 2017 में महाराष्‍ट्र सरकार ने इस सेवा की शुरुआत की थी। इसके लिए 245 करोड़ रुपये का सालाना बजट भी रखा गया था। शुरुआत से अब तक इस सेवा के जरिए 5000 से ज्‍यादा लोगों को मेडिकल सुविधा मुहैया करवाई गई। अकेले मुंबई में ही इस योजना से 18 डॉक्‍टर अलग-अलग लोकेशन पर जुड़े हुए हैं। 108 पर कॉल आने के बाद इनकी पूरी कोशिश होती है कि ये मरीज तक दस मिनट में पहुंचकर उसको प्राथमिक उपचार दे सकें। मुंबई के अलावा पालघर और अमरावती में इस तरह के पांच और सोलापुर और गढ़चिरोली में एक-एक डॉक्‍टर इस सेवा के अंतर्गत काम कर रहे हैं। इस सेवा से जुड़ने वाले आयुर्वेदिक और युनानी डॉक्‍टरों के अलावा ऐलोपेथिक भी हैं। मरीज का तुरंत ट्रीटमेंट करने के अलावा उसे किसी भी नजदीकी अस्‍पताल में पहुंचाने का जिम्‍मा भी यह बाइक एंबुलेंस वाले यहां पर संभालते हैं। इनका लाभ उठाने वालों के लिए यह किसी फरिश्‍ते से कम नहीं हैं।

    दूसरे राज्‍यों में भी सेवा शुरू
    इसी तर्ज की सेवा बेंगलुरु में भी मौजूद है। यहां पर राज्य सरकार द्वारा 20 बाइक एंबुलेंस संचालित की जाती हैं। पंचाब के पंचकूला जिले में एक बाइक ऐम्बुलेंस, जिसके बगल में स्ट्रेचर जुड़ा होता था, उसे पिछले साल शुरू किया गया था। पश्चिम बंगाल के जलपाईगुड़ी में 50 वर्षीय करीमुल हक को बाइक ऐम्बुलेंस दादा के रूप में जाना जाता है। किसी भी आपात स्थिति में जब कोई कहे 'घबराइए मत, मैं एक डॉक्टर हूं और मैं यहां पर रोगी को ऐम्बुलेंस पहुंचने से पहले प्राथमिक इलाज देने आया हूं, तो दिल को काफी सुकून पहुंचता है। यह बाइक पर सवार डॉक्टर्स की टीम लोगों को कुछ इसी अंदाज में अपना परिचय देती है।

    इनके जिम्‍मे हैं ये काम
    आमतौर पर ऐम्बुलेंस के बजाए बाइक 20 से 30 मिनट पहले मौके पर पहुंच जाती है। पहुंचते ही सबसे पहले मरीज की आंखों की जांच की जाती है फिर शुरुआती उपचार किया जाता है। उदाहरण के रूप में अमबिलिकल कॉर्ड काटना और आईवी ड्रिप लगाना। बाइक में एक बॉक्स भी होता है, जिसमें ट्रॉमा किट होती है। इस किट में पट्टियां, ऐंटीसेप्टिक स्प्रे समेत अन्य जरूरी सामान होता है। एक अनुमान के मुताबिक हर रोज करीब तीस कॉल्‍स इन डॉक्‍टरों के पास रिसीव होती हैं और यह मरीज को राहत देने के लिए निकल पड़ते हैं।

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