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केरलम में पुलिस कर्मी की हत्या के 23 साल बाद 56 आरोपित बरी, आदिवासी प्रदर्शन के दौरान हुई थी घटना

Published: Sat, 01 Aug 2026 02:00 AM (IST)

केरलम में एक अदालत ने शुक्रवार को मुथंगा आंदोलन के दौरान 2003 में पुलिस कांस्टेबल केवी विनोद की हत्या के ...और पढ़ें

केरलम में पुलिस कर्मी की हत्या के 23 साल बाद 56 आरोपित बरी (सांकेतिक तस्वीर)

केरलम में पुलिस कर्मी की हत्या के 23 साल बाद 56 आरोपित बरी (सांकेतिक तस्वीर)

HighLights

  1. आदिवासी नेता एमजी गीतानंदन को भी निर्दोष करार दिया

  2. इससे जुड़े हत्या के प्रयास मामले में चार को दोषी ठहराया

पीटीआई, वायनाड। केरलम में एक अदालत ने शुक्रवार को मुथंगा आंदोलन के दौरान 2003 में पुलिस कांस्टेबल केवी विनोद की हत्या के मामले में आदिवासी नेता एमजी गीतानंदन समेत 56 आरोपितों को बरी कर दिया, जबकि इससे संबंधित हत्या के प्रयास के एक मामले में चार व्यक्तियों को दोषी ठहराया है।

वायनाड जिला और सत्र न्यायाधीश अय्यूब खान ई. ने विनोद हत्या मामले में सभी जीवित आरोपितों को बरी कर दिया, जबकि दूसरे आरोपित अशोकन को दोषी ठहराया। चूंकि आशोकन का सुनवाई के दौरान निधन हो गया था, इसलिए उसके खिलाफ कोई सजा नहीं सुनाई गई।

पुलिस अधिकारी अब्दुल सलाम और वन अधिकारी सशिधरण की हत्या के प्रयास के मामले में अदालत ने गीतानंदन, बिनू, रमेशन और अनिल कुमार को दोषी ठहराया और उन्हें पांच साल की कठोर कारावास की सजा सुनाई। हालांकि विभिन्न धाराओं के तहत उन्हें दी गई कुल सजा 19 साल थी।

अदालत ने निर्देश दिया कि सजाएं समवर्ती चलेंगी, जिससे उन्हें पांच साल की सजा भुगतनी होगी। अदालत ने पीड़ित के लिए मुआवजे के भुगतान करने का भी निर्देश दिया, जिसमें विनोद के परिवार को सात लाख रुपये, अब्दुल सलाम को पांच लाख और सशिधरण को दो लाख रुपये का मुआवजा दिया गया।

कन्नूर निवासी विनोद 19 फरवरी, 2003 को मुथंगा वन्यजीव अभयारण्य के अंदर भूमि अधिकारों की मांग कर रहे आदिवासी प्रदर्शनकारियों को हटाने के लिए पुलिस कार्रवाई के दौरान मारा गया था।

विनोद और वन अधिकारी सशिधरण को प्रदर्शनकारियों ने एक अस्थायी शेड में बंधक बनाया था, जहां आदिवासी नेताओं सीके जानू और एमजी गीतानंदन के नेतृत्व में 47 दिन तक भूमि पर कब्जा करने का प्रदर्शन चरम पर पहुंच गया था।

अभियोजन पक्ष ने आरोप लगाया कि विनोद को बंधक रहते हुए मारा गया। ट्रायल के दौरान अभियोजन पक्ष ने 47 गवाहों का परीक्षण किया और 13 सामग्री वस्तुओं को चिह्नित किया। लगभग 15 आरोपितों का ट्रायल के दौरान ही निधन हो गया।

हत्या के मामले में बरी किए जाने पर निराशा व्यक्त करते हुए विनोद के भाई सेवानिवृत्त सहायक पुलिस अधीक्षक केवी बाबू ने कहा कि साढ़े 23 साल बाद यह बेहद निराशाजनक है।