विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

भारतीय नौसेना के इतिहास में सबसे बड़ी उपलब्धि, इस साल बेड़े में शामिल होंगे 18 युद्धपोत; राजनाथ सिंह का एलान

Published: Wed, 30 Sep 2026 09:22 AM (GMT+05:30)

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने घोषणा की है कि 2026 में भारतीय नौसेना में 18 युद्धपोत शामिल किए जाएंगे, जो एक साल में क्षमता में सबसे बड़ी वृद्धि होगी।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह। (फोटो- पीटीआई।)

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह। (फोटो- पीटीआई।)

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने 2026 को भारतीय नौसेना के लिए एक ऐतिहासिक वर्ष बताया है। इस वर्ष 18 युद्धपोतों को नौसेना में शामिल करने या कमीशन करने की योजना है। उन्होंने इसे भारतीय नौसेना के इतिहास में एक ही साल में सेना की क्षमता में सबसे बड़ी बढ़ोतरी बताया।

नई दिल्ली में कल भारतीय नौसेना के द्विवार्षिक कमांडर सम्मेलन 2026 के दूसरे संस्करण को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि ये घटनाक्रम भारत के नौसेना के घरेलू जहाज निर्माण तंत्र की बढ़ती परिपक्वता को दर्शाते हैं। रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता प्राप्त करने की दिशा में नौसेना के प्रयासों को दर्शाते हुए रक्षा मंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि भारतीय नौसेना का युद्धपोत उत्पादन तंत्र अब वैश्विक मानकों को पूरा कर रहा है।

'युद्धपोतों में 75 प्रतिशत स्वदेशी सामग्री'

उन्होंने कहा कि हाल ही में कमीशन किए गए युद्धपोतों में 75 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी सामग्री है। रक्षा मंत्री ने मौजूदा प्रणालियों के महत्व को पहचानते हुए भारत की समुद्री निगरानी प्रणाली के महत्वपूर्ण उन्नयन का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि समुद्री यातायात की बढ़ती मात्रा और जटिलता के लिए उन्नत विश्लेषणात्मक क्षमताओं की आवश्यकता है।

कौन-कौन से जहाज होंगे शामिल?

इन जहाजों में फ्रंटलाइन कॉम्बैट प्लेटफॉर्म और खास सपोर्ट शिप शामिल होंगे। ये सभी भारतीय शिपयार्ड में बनाए जाएंगे, जो देश में ही युद्धपोत बनाने की क्षमता को मजबूत करने के सरकार के प्रयासों को दिखाता है। योजना के तहत शामिल किए जाने वाले जहाजों में आधुनिक स्टील्थ फ्रिगेट भी हैं, जो कई तरह के मिशन के लिए तैयार हैं। इनमें सतह पर होने वाली लड़ाई, हवाई सुरक्षा और पनडुब्बी-रोधी ऑपरेशन शामिल हैं।

नौसेना 2035 तक 200 से ज्यादा जहाजों का बेड़ा बनाने की दिशा में काम कर रही है, जिसमें डिफेंस प्रोडक्शन में ज्यादा आत्मनिर्भरता हासिल करने पर जोर दिया जा रहा है। नेवी की हर छह महीने में होने वाली कमांडर्स कॉन्फ्रेंस 2026 में बोलते हुए सिंह ने कहा कि भारत का अपना युद्धपोत बनाने का सिस्टम तेजी से ग्लोबल स्टैंडर्ड्स को पूरा कर रहा है।

इसके अलावा राजनाथ सिंह ने भारतीय नौसेना की बढ़ती वैश्विक मौजूदगी को रेखांकित करते हुए कहा कि भारतीय युद्धपोत दक्षिण चीन सागर, भूमध्यसागर और अटलांटिक महासागर तक अपनी मौजूदगी दर्ज करा रहे हैं। उन्होंने इसे भारत की ब्लू वाटर फोर्स क्षमता का प्रमाण बताया।

रक्षा मंत्री ने समुद्री निगरानी व्यवस्था को और मजबूत करने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि बढ़ते समुद्री यातायात और जटिलता को देखते हुए निगरानी एवं विश्लेषण क्षमताओं को उन्नत करना जरूरी है।

राजनाथ सिंह ने कहा कि ‘विकसित भारत 2047’ के लक्ष्य में नौसेना स्ट्रेटेजिक एंकर की भूमिका निभा रही है। उनके अनुसार, नौसेना केवल समुद्री सीमाओं की रक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि आर्थिक सुरक्षा, क्षेत्रीय स्थिरता और भारत की रणनीतिक क्षमता को भी मजबूत करती है।

उन्होंने पश्चिम एशिया संकट के दौरान भारतीय ध्वज वाले व्यापारिक जहाजों, विशेषकर एलपीजी टैंकरों को होर्मुज स्ट्रेट से सुरक्षित निकालने के लिए ‘आपरेशन ऊर्जा सुरक्षा’ की सराहना की।

उन्होंने कहा कि भारत के कच्चे तेल का लगभग 85-90 प्रतिशत और प्राकृतिक गैस का करीब 50 प्रतिशत समुद्री मार्गों से आता है। रक्षा मंत्री ने नौसेना के स्वदेशीकरण प्रयासों की भी प्रशंसा की।

उन्होंने बताया कि हाल में शामिल किए गए युद्धपोतों में 75 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी सामग्री है। तीन दिवसीय सम्मेलन में नौसेना के शीर्ष अधिकारी परिचालन तैयारियों, समुद्री सुरक्षा और भविष्य की क्षमताओं की समीक्षा कर रहे हैं।

यह भी पढ़ें: 'आक्रामक और गैर पेशेवर...', अरब सागर में कैसे टकरा गए भारत-पाकिस्तान के युद्धपोत?