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जम्मू-कश्मीर से विमान से बंगाल लाए गए 150 बांग्लादेशी घुसपैठिए, डिटेंशन कैंप में रखा गया

Published: Wed, 07 Oct 2026 05:40 AM (IST)Updated: Wed, 07 Oct 2026 06:58 AM (IST)

जम्मू-कश्मीर में अवैध रूप से रहने के आरोप में हिरासत में लिए गए करीब 150 बांग्लादेशी घुसपैठियों को बंगाल के ...और पढ़ें

जम्मू-कश्मीर से विमान से बंगाल लाए गए 150 बांग्लादेशी घुसपैठिए (फोटो- AI Generated)

जम्मू-कश्मीर से विमान से बंगाल लाए गए 150 बांग्लादेशी घुसपैठिए (फोटो- AI Generated)

HighLights

  1. सभी को जलपाईगुड़ी के डिटेंशन कैंप में रखा गया

  2.  प्रक्रिया पूरी कर उन्हें बांग्लादेश डिपोर्ट करने की तैयारी है

जागरण संवाददाता, सिलीगुड़ी। जम्मू-कश्मीर में अवैध रूप से रहने के आरोप में हिरासत में लिए गए करीब 150 बांग्लादेशी घुसपैठियों को बंगाल के जलपाईगुड़ी जिला स्थित डिटेंशन कैंप लाया गया है।

सभी को भारतीय वायुसेना के विशेष विमान से पहले बागडोगरा एयरपोर्ट लाया गया। यहां से सेना के वाहनों से कड़ी सुरक्षा के बीच डिटेंशन कैंप पहुंचाया गया।

इन सभी को सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) के हवाले किया जाएगा। इसके बाद फूलबाड़ी इमिग्रेशन सेंटर के माध्यम से निर्धारित प्रक्रिया पूरी कर उन्हें बांग्लादेश डिपोर्ट करने की तैयारी है।

बीएसएफ और केंद्रीय खुफिया विभाग से जुड़े सूत्रों के अनुसार जम्मू-कश्मीर में संदिग्ध अवैध प्रवासियों की पहचान के लिए चलाए गए विशेष सर्वे के दौरान करीब 500 संदिग्ध बांग्लादेशी नागरिकों को हिरासत में लिया गया है।

पहले चरण में 150 लोगों को यहां भेजा गया है। शेष लोगों को भी निर्धारित प्रक्रिया के तहत चरणबद्ध तरीके से बांग्लादेश भेजे जाने की बात सामने आई है।

यह घटनाक्रम केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा सीमावर्ती क्षेत्रों में रहने वाले अवैध अप्रवासियों की पहचान करने के लिए जनसांख्यिकीय परिवर्तन पर एक उच्च स्तरीय समिति (एचएलसीडीसी) के गठन के बाद सामने आया है।

जम्मू और कश्मीर प्रशासन ने एचएलसीडीसी को सूचित किया था कि केंद्र शासित प्रदेश के विभिन्न जिलों में लगभग 600 बांग्लादेशियों की पहचान की गई है।

गृह मंत्रालय ने अवैध आप्रवासन और अन्य कारकों से उत्पन्न जनसांख्यिकीय परिवर्तनों का अध्ययन करने और उनसे निपटने के उपायों की सिफारिश करने के लिए 26 मई को एचएलसीडीसी का गठन किया। इसे एक वर्ष के भीतर अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा गया है।

अधिकारियों ने बताया कि एचएलसीडीसी ने पिछले 15 वर्षों में जिलों, औद्योगिक समूहों और सीमावर्ती जिलों में धार्मिक जनसांख्यिकी में स्पष्ट परिवर्तनों के संबंध में राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से विवरण मांगा था।