नई दिल्ली, जेएनएन। विजयादशमी के पावन अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों को शुभकामनाएं दी। पीएम मोदी ने कहा कि दशहरे का ये पर्व, असत्य पर सत्य की जीत का पर्व है, लेकिन साथ ही ये एक तरह के संकटों पर धैर्य की जीत का पर्व भी है। उन्होंने कहा कि कोरोना के खिलाफ जो लड़ाई हम लड़ रहे हैं उसमें जीत सुनिश्चित है। कोरोना के इस संकट काल में, हमें संयम से ही काम लेना है, मर्यादा में ही रहना है।

'मन की बात' की 10 बड़ी बातें

लॉकडाउन के दौरान टेक्नोलॉजी बेस सर्विस डिलीवरी के कई प्रयोग देश में हुए हैं। झारखंड की महिलाओं ने किसानों के खेतों से सब्जियां और फल सीधे घरों तक पहुंचाने का काम किया है। इन महिलाओं ने 'आजीविका फार्म फ्रैश' नाम से एक ऐप बनवाया जिसके जरिए लोग आसानी से सब्जियां मंगा सकते थे। इस पूरे प्रयास से किसानों को अपनी सब्जियों और फलों के अच्छे दाम मिल रहे हैं।

कश्मीर का पुलवामा पूरे देश को पढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। आज देश-भर में बच्चे वर्क फ्रॉम होम कर रहे हैं, नोट्स बना रहे हैं, तो कहीं न कहीं इसके पीछे पुलवामाम के लोगों की कड़ी मेहमनत है। कश्मीर घाटी पूरे देश की करीब 90 फीसद पेंसिल की लकड़ी की मांग को पूरा करती है और उसमें बहुत बड़ी भूमिला पुलवामा की है।

तीर्थाटन अपने आप में भारत को एक सूत्र में पिरोता है। ज्योर्तिलिंगों और शक्तिपीठों की श्रृंखता भारत को एक सूत्र में बांधती है। त्रिपुरा से लेकर गुजरात तक जम्मू-कश्मीर से लेकर तमिलनाडु तक स्थापित हमारे आस्था के केंद्र हमें एक करते हैं। भक्ति आन्दोलन पूरे भारत में एक बड़ा जन आन्दोलन बन गया है, जिसने हमें भक्ति के माध्यम से एकजुट किया है।

केरल में जन्मे पूज्य आदि शंकराचार्य जी ने भारत की चारों दिशाओं में चार महत्वपूर्ण मठों की स्थापना की- उत्तर में बद्रिकाश्रम, पूर्व में पूरी, दक्षिण में श्रृंगेरी और पश्चिम में द्वारका। उन्होंने श्रीनगर की यात्रा भी की, यही कारण है कि वहां एक शंकराचार्य हिल (Shankaracharya Hill) है।

जब हमें अपनी चीजों पर गर्व होता है तो दुनिया में भी उनके प्रति जिज्ञासा बढ़ती है। जैसे हमारे आध्यात्म ने, योग ने पूरी दुनिया को आकर्षित किया है। हमारे कई खेल भी दुनिया को आकर्षित कर रहे हैं। भारत में तो प्रचीन काल से कई ऐसे खेल रहे हैं, जो हमारे भीतर, एक असाधारण विकास करते हैं। हमारे माइंड, बॉडी बैलेंस को एक नए आयाम पर ले जाते हैं।

सरदार वल्लभ भाई पटेल जी की जन्म जयंती 31 अक्टूबर को हम 'राष्ट्रीय एकता दिवस' के तौर पर मनाएंगे। बहुत कम लोग मिलेंगे जिनके व्यक्तित्व में एक साथ कई तत्व मौजूद हों-वैचारिक गहराई, नैतिक साहस, राजनैतिक विलक्षणता, कृषि क्षेत्र का गहरा ज्ञान और राष्ट्रीय एकता के प्रति समर्पण

जब हमें अपनी चीजों पर गर्व होता है तो दुनिया में भी उनके प्रति जिज्ञासा बढ़ती है। जैसे हमारे आध्यात्म ने, योग ने पूरी दुनिया को आकर्षित किया है। हमारे कई खेल भी दुनिया को आकर्षित कर रहे हैं। आजकल हमारा मलखम्ब भी अनेकों देसों में प्रचलित हो रहा है।

खादी की लोकप्रियता लगातार बढ़ रही है। दुनिया में कई जगह खादी बनाई भी जा रही है। मेक्सिको में एक जगह है 'ओहाका (Oaxaca) इस इलाके में कई गांव ऐसे हैं जहां स्थानीय ग्रामीण खादी बुनने का काम करते हैं। दिल्ली के कनॉट प्लेस के खादी स्टोर में इस बार गांधी जयंती पर एक ही दिन में एक करोड़ रुपये से ज्यादा की खरीदारी हुई। इसी तरह कोरोना के समय में खादी के मास्क भी बहुत लोकप्रिय हो रहे हैं।

हमें अपने उन जांबाज सैनिकों को भी याद रखना है जो त्योहारों में भी सीमाओं पर डटै हैं। भारत माता की सेवा और सुरक्षा कर रहे हैं।हमें उनको याद करके ही अपने त्योहार बनाने हैं। हमें घर पर एक दीया भारत माता के इन वीर बेटे-बेटियों के सम्मान में भी जलाना है।

जब हम त्योहार की बात करते हैं, तैयारी करते हैं, तो सबसे पहले मन में यही आता है कि बाजार कब जाना है? इस बार जब आप खरीदारी करने जाएं तो 'Vocal for Local' का अपना संकल्प अवश्य याद रखें। बाजार से सामान खरीदते समय हमें स्थानीय उत्पादों को प्राथमिकता देनी है।

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