कानपुर, जागरण संवाददाता। आखिर खुशी खातून को शुक्रवार देर रात जेल से रिहाई मिल गई। जेल गेट से जैसी ही वह बाहर निकली, पति ने उसे गले से लगा लिया और रो पड़ा। खुशी घर पहुंची तो बेटियां भी छह माह बाद मां से मिलकर भावुक हो गईं।

खुशी की रिहाई के बाद पति ने दैनिक जागरण को धन्यवाद दिया। हाईकोर्ट से जमानत मिलने के बाद खुशी का रिहाई परवाना जेल पहुंच गया था, इसके बावजूद जेल प्रशासन ने उसे एक दिन बाद तब छोड़ा जब दैनिक जागरण ने इसके लिए आगे बढ़कर प्रयास किया।

नौबस्ता के राजीव विहार निवासी प्रापर्टी डीलर रवि वर्मा ने चार जून 2019 को फातिमा खातून से शादी की थी। शादी के बाद फातिमा ने नाम बदलकर खुशी रख लिया था। रवि का 2018 में पहली पत्नी रोली से तलाक हो चुका था।

पहली पत्नी को रवि की दूसरी शादी नागवार गुजरी, जिस पर उसने पुलिस को सूचना दी कि फातिमा उर्फ खुशी बांग्लादेश की रहने वाली है। वह आतंकी गतिविधियों में लिप्त है और उसकी तीनों बेटियों को बेचने की योजना बना रही है। शिकायत के बाद पुलिस और आइबी (इंटेलीजेंस ब्यूरो) सक्रिय हुई। पुलिस ने रवि और खुशी दोनों के खिलाफ 16 फरवरी 2022 को मुकदमा दर्ज कर जेल भेज दिया था।

इस मामले में बीती छह मई को रवि हाईकोर्ट से जमानत पर बाहर आया और फिर पत्नी खुशी को बाहर निकालने के लिए पैरवी शुरू कर दी। हाईकोर्ट ने चार अगस्त को मामले में सुनवाई करते हुए गुण दोष पर कोई टिप्पणी किए बिना महिला होने के आधार पर खुशी को जमानत दे दी।

कोर्ट द्वारा तय किए गए बंधपत्र जमा करने और उनका परीक्षण होने के बाद कोर्ट ने 11 अगस्त 2022 को रिहाई परवाना जारी कर दिया, जिसे गुरुवार को ही जेल भेज दिया गया था। जेल प्रशासन ने भी रिहा होने वाले बंदियों की सूची में खुशी का नाम दिया, लेकिन उसे रिहा नहीं किया। रवि ने जेल प्रशासन से कारण जानना चाहा, लेकिन उसे कोई उचित उत्तर नहीं मिला।

रवि के मुताबिक पुलिस ने जो चार्जशीट लगाई थी उसमें खुशी को भारतीय नागरिक लिखा था। ऐसे में खुशी को रिहा किया जाना चाहिए था। शुक्रवार को वह फिर जेल पहुंचा और खुशी को रिहा न किए जाने का कारण जानने का प्रयास करता रहा।

जब कोई वाजिब जवाब उसे नहीं मिला तो उसने दैनिक जागरण कार्यालय से संपर्क किया। दैनिक जागरण के संवाददाता आलोक शर्मा को उसने पूरी बात बताई। रवि ने कहा कि वह आत्महत्या कर लेगा, वह बहुत परेशान हो चुका है।

इस पर संवाददाता ने उसे ढांढस बंधाया और मदद का आश्वासन दिया। इसके बाद उन्होंने अपने साथी संवाददाता अतुल मिश्र को जेल अधीक्षक से इस संबंध में बात करने को कहा।

हाईकोर्ट से जमानत मिलने और कोर्ट से रिहाई परवाना जारी होने के बावजूद महिला को रिहा न करने के सवाल पर जेल प्रशासन का कहना था कि मामला विदेशी अधिनियम से जुड़ा होने के कारण एलआइयू और पुलिस को सूचना दी है। हालांकि, इसके बाद शुक्रवार रात नौ बजे जेल प्रशासन ने खुशी को रिहा कर दिया।

मामला संज्ञान में आने के बाद एलआइयू और नौबस्ता पुलिस से संपर्क कर उन्हें महिला की जमानत की जानकारी दी गई थी। मामला विदेशी अधिनियम से जुड़ा था, इसलिए प्रक्रिया पूरी करने में एक दिन का समय लग गया।- डा. बीडी पांडेय, जेल अधीक्षक

 

Edited By: Abhishek Agnihotri