संवाद सूत्र, परबत्ता (खगड़िया) : लेनिन नगर, तेमथा निवासी 78 वर्षीय कैलाश मंडल कहते हैं- आज हम आजादी का अमृत महोत्सव मना रहे हैं। आजादी से पहले जन जीवन इतना सामान्य नहीं था। आकाल, दुर्भिक्ष का सामना करना पड़ता था। हेजा-कोलरा से गांव के गांव, टोले के टोले साफ हो जाते थे। आज स्वास्थ्य सेवा का विस्तार हुआ है। इलाज का दायरा बढ़ा है। अब तो कैंसर का इलाज भी संभव हुआ है। जीवन आसान हुआ है। लोगों की औसत आयु बढ़ी है। वे कहते हैं, समता मूलक समाज की ओर देश आगे बढ़ रहा है। लेकिन इस राह में अभी कई बाधा है। अमीरी गरीबी की खाई पटी नहीं है। शिक्षा सुलभ हुआ है, लेकिन महंगी हुई है। सरकारी शिक्षण संस्थान की ओर विशेष ध्यान देने की जरूरत है। कैलाश मंडल कहते हैं- बंधुआ मजदूरी की प्रथा खत्म हुई है। लेकिन रोजी रोजगार को लेकर संकट कायम है। बिहार से पलायन है। इस दिशा में सरकार को सोचने की जरूरत है। रोजी रोजगार के अवसर पैदा करने होंगे। उद्योग धंधे लगाने होंगे। लघु कुटीर उद्योग को बढ़ावा देना होगा। खगड़िया में मक्का उद्योग लगाकर रोजी रोजगार का विकास हो सकता है। परबत्ता में केला उद्योग लगाकर हजारों हाथों को काम दिया जा सकता है। खेती किसानी को सशक्त करने की जरूरत है। अंग्रेज के समय में खेती किसानी बहुत ही कठिन कार्य था। अब तो सरकार भी मदद करती है। बाढ़ सुखाड़ में सरकार मुआवजा देती है। सिचाई सुविधा का विस्तार हुआ है। बिजली की सुविधा भी बढ़ी है।

Edited By: Jagran