रांची, राज्य ब्यूरो। Jharkhand News स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग के सचिव राजेश शर्मा ने झारखंड के कई सरकारी स्कूलों में नामांकन में आई कमी पर नाराजगी और चिंता जताते हुए कारणों की पहचान कर नामांकन बढ़ाने के सख्त निर्देश सभी जिला शिक्षा पदाधिकारियों और जिला शिक्षा अधीक्षकों को दिए हैं। बुधवार को रातू स्थित जेसीईआरटी सभागार में शुरू हुई दो दिवसीय समीक्षा बैठक में यह बात सामने आई कि लगभग छह हजार ऐसे स्कूल हैं जहां नामांकन में पिछले तीन वर्षों में कमी आई है। हालांकि इसकी बड़ी वजह कोरोना भी है। उन्होंने आरटीई के तहत निजी स्कूलों में 25 प्रतिशत सीटों पर बीपीएल बच्चों के नामांकन में भी कमी आने पर नाराजगी प्रकट करते हुए नामांकन बढ़ाने के निर्देश दिए। उन्होंने स्कूलों में बच्चों के ट्रांजेक्शन रेट में भी सुधार करने को कहा।

पदाधिकारियों का रोका जाएगा वेतन

सचिव ने बैठक में कहा कि बच्चों के बीच पोशाक, पाठ्य-पुस्तक आदि वितरण में लापरवाही बरतनेवाले प्रखंड व जिला स्तर के पदाधिकारियों का वेतन रोका जाएगा। साथ ही कहा कि जिन बीआरपी, सीआरपी द्वारा स्कूलों के निरीक्षण में लापरवाही बरती जा रही है, उनके विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जाए। चेतावनी के बावजूद सुधार नहीं होता है तो उनकी सेवा समाप्त की जाए।

समीक्षा में यह बात भी सामने आई कि लगभग चार हजार स्कूल ऐसे हैं जहां बच्चों की संख्या 25 से कम तथा 25 से 50 के बीच है। सचिव ने दो साल बाद हुई कक्षा एक से सात तक की वार्षिक परीक्षा में बच्चों के प्रदर्शन की भी जानकारी ली। बैठक में राज्य परियोजना निदेशक किरण कुमारी पासी व अन्य पदाधिकारी भी उपस्थित थे।

तीन दिनों में करें पारा शिक्षकों के प्रमाणपत्रों का सत्यापन

सचिव ने सभी पारा शिक्षकों के प्रमाणपत्रों का सत्यापन तीन दिनों में करने के सख्त निर्देश देते हुए कहा कि ऐसा नहीं करने पर बढ़ा हुआ मानदेय रोका जाएगाा। इससे पूर्व 31 जुलाई तक ही यह कार्य करना था।

कम से कम दो लाख बच्चे मुख्यमंत्री मेधा छात्रवृत्ति में हों शामिल

झारखंड एकेडमिक काउंसिल से जुड़े विषयों पर समीक्षा के क्रम में सचिव ने अगले वर्ष से मुख्यमंत्री मेधा छात्रवृत्ति के लिए आयोजित होनेवाली परीक्षा में कम से कम दो लाख बच्चों को शामिल कराने के लिए आवश्यक कार्रवाई के निर्देश सभी जिला शिक्षा पदाधिकारियाें को दिए। इसी साल शुरू हुई इस योजना के तहत ली गई परीक्षा में लगभग 86 हजार विद्यार्थी परीक्षा में शामिल हुए। इनमें से पांच हजार विद्यार्थियों का चयन छात्रवृत्ति के लिए किया जाना है। काउंसिल शीघ्र इस परीक्षा का परिणाम जारी करने की तैयारी कर रहा है। सचिव ने इसी तरह मेधा सह साधन छात्रवृत्ति तथा मेडिकल, इंजीनियरिंग की तैयारी के लिए आकांक्षा परीक्षा में भी अधिक से अधिक बच्चों को शामिल कराने के निर्देश दिए।

सबसे खराब रिजल्ट वाले स्कूल चिह्नित

जैक के माध्यम से प्रत्येक जिला में पांच-पांच ऐसे स्कूल चिह्नित किए गए हैं, जिनका मैट्रिक एवं इंटरमीडिएट का परिणाम इस वर्ष सबसे खराब रहा। इन स्कूलों की समीक्षा होगी। यदि इसके लिए शिक्षक जवाबदेह पाए जाएंगे तो उनके विरुद्ध कार्रवाई होगी। इसमें जो कमियां हैं उन्हें दूर किया जाएगा।

Edited By: Sanjay Kumar