मथुरा, विनीत मिश्र। Janmashtami 2022 Live भादो अष्टमी की आधी रात को ब्रज वसुंधरा पर जग के तारणहार देवकीनंदन अपने चरण रखेंगे। उनके चरण स्पर्श करने को यमुना भी हिलोरें मारने लगी हैं। जन्मस्थान के चारों दिशाओं में लल्ला को निहारने के लिए दर्शनार्थियों ने अपने डेरा डाल लिया है। मन को आनंदित करने वाली मंद्ध-मंद्ध चल रही भक्ति की बयार के संग-संग आकाश का भी रंग बदल गया है। सूर्य के ताप को कम करने के लिए काले सफेद बादल की सेना उमड़-घुमड़ने लगी है। 

श्रीकृष्ण जन्मस्थान पर गुरुवार की शाम भगवान को श्रीहरिकांता पाेशाक अर्पित की गई। कलाकार और भक्तों के नृत्य करने पर प्रांगण में भक्ति की सुंगध फैल गई। उल्लास में श्रद्धालु सुधबुध खो बैठे। श्रीकृष्ण जन्मस्थान स्थान पर शाम छह बजे अन्नपूर्णेश्वर महादेव क्षेत्र से श्रीठाकुरजी की पोशाक व श्रृंगार अर्पण यात्रा निकाली गई। सुसज्जित थाली में श्रीठाकुरजी को करधनी, कुंडल, पायल, चूड़ी, बिंदी, नथ, हार आदि अनेकानेक दिव्य वस्त्र, आभूषण सजाकर भक्त उल्हास से नाचते-गाते चल रहे थे।

शोभायात्रा में प्रस्तुति देते कलाकार।

शोभायात्रा में उज्जैन के डमरु, मजीरा बजाते कलाकार, झांसी राई कलाकार प्रस्तुतियां दे रहे थे। सर्वप्रथम भगवान श्रीकेशवदेव महाराज को पोशाक अर्पित की गई। भगवती अष्टभुजा मां योगमायाजी, श्रीगर्भगृह, श्रीराधाकृष्ण युगल सरकार को पोशाक अर्पित की गई। श्रीराधाकृष्ण युगल सरकार के सम्मुख शोभायात्रा पहुंचने पर दृश्य निराला हो गया। शोभायात्रा में चल रहे भक्त, कलाकार वाद्ययंत्राें की ध्वनि पर संकीर्तन व नृत्य कर रहे थे। संस्थान के सचिव कपिल शर्मा व सदस्य गोपेश्वरनाथ चतुर्वेदी ने बताया कि जन्मभूमि के पूजाचार्यों ने शास्त्रीय विधि से पोशाक व आभूषण श्रीठाकुरजी के चरणाें में अर्पित किए हैं। दिव्य पोशाक व आभूषणाें को धारण कर ठाकुरजी जन्मोत्सव में दर्शन देंगे।

श्रीकृष्ण जन्मभूमि के बाहर सैंकड़ों की संख्या में पहुंचे भक्त।

योगेश्वर की लीला भूमि पर अद्भुत नजारे दिखाई देने लगे हैं। मुक्ति, आत्मिक सुख-शांति और अपनी मनोकामना पूर्ण होने की आस लिए गुजरात, राजस्थान, मध्यप्रदेश, बिहार, पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, ओडिशा और दक्षिण भारत समेत सात समंदर पार बसे वसुदेव सुत के भक्त उनके शौर्य, पराक्रम से ओतप्रोत लीला भूमि की तरफ खींचे चले आ रहे हैं। बालक, युवा, युवतियां, बूढ़े सभी करतल ध्वनि करते हुए श्रीकृष्ण जन्मभूमि की ओर बढ़ रहे हैं। देर रात तक आसपास कहीं भी पग भर भूमि रिक्त नहीं थी। दर्शनार्थियों के स्वागत को तोरण द्वार बनाए गए हैं। तिराहे-चौराहों पर लीला मंच श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र बन हुए हैं। कहीं माखनचोरी तो कहीं कंस वध की लीला का मंचन होगा। कालिया का मर्दन कर कान्हा उसके फन पर बंशी बजाते हुए नजर आ रहे हैं। दीवारों की चित्रकारी कान्हा की एक-एक लीला का मूक वर्णन करती नजर आ रही है। अद्भुत लग रहे ब्रज के मंदिर रंग-रंग बिरंगी रोशनी में रात होते ही डूब गए। संकीर्तन पर भक्तगण भक्ति भाव विभोर होकर अपने आराध्य का ध्यान कर रहे हैं। भादो की अष्टमी को आधी रात में यहां आने वाले हैं। उनके आने की खुशी में घरों में उपवास के लिए व्यंजन बनाने की तैयारियां कर ली है। कोई भूखा न रहे, इसके लिए ब्रजवासियों ने जगह-जगह भंडारे लगाने के लिए तंबू डेरा तान दिए हैं। सुबह से ही भंडारे आरंभ हो जाएंगे, जो देर रात चलेंगे।

मथुरा नगरी पहुंचे दूर दराज से श्रद्धालु।

दिन भर खुले रहेंगे पट

श्रीकृष्ण जन्मभूमि पर गर्भ गृह, योगमाया, केशवदेव और भागवत भवन स्थित राधाकृष्ण मंदिर के पट सुबह साढ़े पांच बजे ही खुल जाएंगे। रात को डेढ़ बजे तक भक्तों को कान्हा दर्शन देंगे। हालांकि, श्रीकृष्ण जन्मभूमि पर दर्शनार्थियों की संख्या गुरुवार को भी खूब रही। मुख्य गेट, वीआइपी गेट और गोविंद नगर गेट से श्रद्धालु दर्शन करने के लिए पहुंच रहे हैं। गोकुल, महावन, बलदेव, नंदगांव, बरसाना और गोवर्धन के दर्शन कर श्रद्धालु देररात यहां लौटने लगे।

कान्हा के जन्म के लिए दूर दराज से मथुरा पहुंचे भक्त।

तन गई संगीन, ठाड़े हो गए पहरेदार 

कान्हा के जन्मोत्सव में शामिल होने का आए लाखों श्रद्धालुओं की पग-पग पर सुरक्षा करने के लिए सुरक्षा बल दोपहर में संगीन लेकर ड्यूटी प्वाइंट पर खड़े हो गए। मथुरा-वृंदावन की नाकाबंदी कर दी गई और श्रीकृष्ण जन्मस्थान, द्वारकाधीश मंदिर, बांके बिहारी मंदिर समेत अन्य मंदिरों पर पहरा कड़ा कर दिया गया है। पहरेदारों को पहले ही समझा दिया गया कि, श्रद्धालुओं को दर्शन करने में कोई दिक्कत न आए। जितने भी लोग दर्शन करने करने जन्मभूमि पर पहुंचें, उनको आसानी से दर्शन कराए जाएं। डीएम नवनीत चहल और एसएसपी अभिषेक यादव हर स्थिति पर नजर रखे हुए हैं। 

Edited By: Tanu Gupta