शिमला, राज्य ब्यूरो। Himachal Pradesh News, हिमाचल प्रदेश में 9163 बेसहारा गौवंश सड़क पर है और इन्हें गौसदन तक पहुंचाने के लिए कार्य किया जा रहा है। यह जानकारी पशुपालन मंत्री वीरेंद्र कंवर ने भाजपा विधायक जीतराम कटवाल के पूछे प्रश्न के लिखित जवाब में दी है। मंत्री ने बताया कि गौसेवा आयोग के लिए वित्तीय संसाधन जुटाने के लिए सरकार ने मंदिर न्यासों की 15 प्रतिशत आय व शराब पर एक रुपये पचास पैसे गौवंश सेस प्रति बोतल लगाया है। मंदिर न्यासों से 1.03 करोड़ रुपये व शराब पर सेस से 24.66 करोड़ रुपये की प्राप्ति हुई है। वहीं 2022-23 से शराब पर गौवंश सेस प्रति बोतल दो रुपये पचास पैसे कर दिया है।

गौसेवा आयोग ने 34.88 करोड़ रुपये गौसदनों, गौ अभ्यारण्य को दिया है। 2018 के आरंभ में गैर-सरकारी संस्थाओं की ओर से 146 गौसदनों का संचालन किया जा रहा था, जिसमें से 82 गौसदन हिमाचल प्रदेश गौवंश संवर्धन बोर्ड से पंजीकृत थे। वर्तमान में प्रदेश में 203 गौसदन और 12 गौ अभ्यारण्य हैं। इनमें 20,053 गौवंश को आश्रित किया गया है। वहीं सातगौ अभ्यारण्य का कार्य निर्माणाधीन है।

तीन वर्ष में 288 औद्योगिक इकाइयों को दी जमीन

उद्योग स्थापित करने के लिए तीन वर्ष के दौरान पट्टे पर 288 ईकाइयों को जमीन दी गई। लीज होल्ड राइट के तहत 264 ईकाइयों को जमीन दी गई। यह लिखित जानकारी सरकार ने विपक्ष के नेता मुकेश अग्निहोत्री के प्रश्न के जवाब में दी। यह जमीन सोलन, ऊना और कांगड़ा जिलों में सबसे अधिक दी गई, जो औद्योगिक क्षेत्र हैं।

Edited By: Rajesh Kumar Sharma