प्रयागराज, जेएनएन। नागों के राजा तक्षक का नाम सुनकर लोग कांप जाते हैं, लेकिन प्रतापगढ़ के बाघराय में कहानी कुछ अलग है। यहां के 12 गांवों में तक्षक को रक्षक के रूप में पूजा जाता है। वह यहां के लोगों के लिए मंगलकारी देवता भी हैं। उनका उत्सव मेले के रूप में हर साल मनाया जाता है।

किसान के रूप में आए राजा तक्षक, तब से हो रही वहां पूजा

बाघराय के पास एक गांव है बारौ और रोर। यहां पर उनका मंदिर है। उसमें मूर्ति लगी है। भादों प्रथम पक्ष षष्ठी के दिन लोग राजा तक्षक की पूजा करने की परंपरा को निभाते हैं। रोर, तिलोकपुर, बारौ, रायपुर, मंडल भासौ, जलालपुर, डिहवा, तारापुर समेत 12 गांवों के मुख्य देवता राजा तक्षक ही हैं। यहां के बुजुर्ग बताते हैं कि रोर गांव में हजारों वर्ष पहले तक्षक किसान के रूप में आए थे। एक किसान बैलों से खेत की जोताई कर रहा था। तक्षक ने उससे पानी मांगा। किसान घर गया, लोटा में जल लेकर आया तो देखा कि उसका पूरा खेत अपने आप जोत उठा था। तब स्वयं राजा तक्षक ने प्रकट होकर कहा कि यहां मेरा मंदिर बनवाकर पूजा करो, खेती उन्नत होगी व सर्पदंश का डर नहीं रहेगा। तभी से यहां पूजा हो रही है।

नागराज को अपने हाथ से बनाकर चढ़ाते हैं चांदनी

दोनों गांव में देवखरी बनी हुई है। गांव में सर्पदंश से मृत्यु नहीं होती। अभी तक मेला स्थल का सर्वांगीण विकास नहीं हो सका है। मेला व्यवस्थापक एवं प्रधान संघ अध्यक्ष बिहार वीरेंद्र तिवारी सुग्गा कहते हैं कि मेला मंगलवार से शुरू हो गया है। मुख्य मेला 17 अगस्त को है। पुलिस-पीएसी के साथ ही मेला कमेटी के लगभग 501 सक्रिय वालंटियर मेले की व्यवस्था में लगे हैं। प्रमुख पुजारी प्रमेश श्रीवास्तव के अनुसार राजा तक्षक की पूजा करने पर बहुत शांति मिलती है। आत्मबल बढ़ता है। मुख्य पूजा की शुरुआत गांव के सूर्य बली श्रीवास्तव ने की थी। इसे उनके परिवार ने संभाल रखा है। नागराज को अपने हाथ से बनाकर चांदनी चढ़ाने की परंपरा है।

Edited By: Ankur Tripathi