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कौन हैं प्रोफेसर महेश काकड़े? अलजेब्रिक नंबर थ्योरी में योगदान के मिला रामानुजन पुरस्कार 2026

Published: Wed, 07 Oct 2026 04:10 PM (IST)

वर्ष 2026 के लिए रामानुजन पुरस्कार (Ramanujan Prize 2026) बेंगलुरु के इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस (IISc) के प्रोफेसर महेश काकड़े ...और पढ़ें

Ramanujan Prize 2026; प्रोफेसर महेश काकड़े

Ramanujan Prize 2026; प्रोफेसर महेश काकड़े

HighLights

  1. प्रोफेसर महेश काकड़े को दिया गया रामानुजन पुरस्कार।

  2. US $10,000 मिलेगी पुरस्कार राशि।

एजुकेशन डेस्क, नई दिल्ली। इंटरनेशनल सेंटर फॉर थियोरेटिकल फिजिक्स (ICTP) द्वारा इंटरनेशनल मैथमेटिकल यूनियन (IMU) के सहयोग से दिए जाने वाले रामानुजन पुरस्कार (Ramanujan Prize 2026) की घोषणा कर दी गई है। इस वर्ष के लिए यह पुरस्कार बेंगलुरु के इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस (IISc) के प्रोफेसर महेश काकड़े को 'अलजेब्रिक नंबर थ्योरी' में उनके योगदान के लिए प्रदान किया गया है।

उनकी रिसर्च 'अलजेब्रिक नंबर थ्योरी' पर केंद्रित है; यह गणित की एक शाखा है जिसमें संख्याओं और गणितीय संरचनाओं के गुणों का अध्ययन करने के लिए बीजगणित (अलजेब्रा) का इस्तेमाल किया जाता है। यह पुरस्कार आधुनिक गणित के एक महत्वपूर्ण क्षेत्र में उनके शोध को मान्यता देता है।

क्या है पुरस्कार और इसे जीतने पर कितनी मिलती है धनराशि

रामानुजन पुरस्कार प्रतिवर्ष विकासशील देश के ऐसे गणितज्ञ को दिया जाता है जिनकी उम्र 45 साल से कम हो और जिन्होंने गणितीय विज्ञान में बेहतरीन योगदान दिया हो। इस पुरस्कार के साथ US $10,000 की नकद राशि दी जाती है। जो लगभग 968155.50 भारतीय रुपये होते हैं।

महेश काकड़े का जीवन परिचय

महेश काकड़े IISc बेंगलुरु के गणित विभाग में प्रोफेसर हैं। काकड़े ने बेंगलुरु के इंडियन स्टैटिस्टिकल इंस्टीट्यूट से गणित में अपनी बैचलर डिग्री पूरी की। बाद में उन्होंने कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी से प्योर मैथमेटिक्स में मास्टर डिग्री और PhD की पढ़ाई की। 2008 में अपनी PhD पूरी करने के बाद, उन्होंने प्रिंसटन यूनिवर्सिटी, यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन और किंग्स कॉलेज लंदन जैसे संस्थानों में काम किया। 2019 में वे IISc में प्रोफेसर के तौर पर शामिल हुए।

प्रोफेसर काकड़े उपलब्धियां

एकेडमिक करियर में रामानुजन पुरस्कार एक और बड़ी उपलब्धि है। उन्हें 2022 में गणितीय विज्ञान (मैथमैटिकल साइंसेज) में इन्फोसिस पुरस्कार मिला और उन्हें अपने शोध के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी पहचान मिली है। उनकी यह नई उपलब्धि भारत और IISc में एडवांस्ड मैथमेटिक्स रिसर्च के क्षेत्र में हो रहे काम को उजागर करती है।

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