यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Feb 01, 2020 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
Education Budget 2020: शिक्षा और कौशल विकास केंद्रित बजट पेश किया वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने
Education Budget 2020शिक्षा से संबंधित कई महत्वपूर्ण घोषणाएं की गयीं।आइए नज़र डालते हैं बजट 2020-21 में शिक्षा और रोजगार के प्रस्तावों पर।

नई दिल्ली, ऑनलाइन डेस्क। Education Budget 2020: केंद्रीय वित्त मंत्री, निर्मला सीतारमण ने आज, 1 फरवरी 2020 को देश का केंद्रीय बजट 2020-21 पेश किया। वित्त मंत्री ने अपने भाषण में बजट को तीन प्रमुख सिद्धांतों – एस्पीरेशनल इंडिया, इकनॉमिक डेवेलपमेंट और केयरिंग सोसायटी पर केंद्रित बताया। वित्त मंत्री ने अपने भाषण में बताया कि पिछले वर्ष ‘स्टडी इन इंडिया’ के साथ उच्च शिक्षा पर ध्यान केंद्रित किया गया था। इस वर्ष बेरोजगारी की चिंताओं और युवाओं को रोजगार प्रदान करने की अधिक आवश्यकता पर ध्यान केंद्रित करते हुए केंद्रीय बजट 2020 शिक्षा और कौशल विकास पर केंद्रित किया गया है।
वित्त मंत्री ने अपने भाषण में शिक्षा के क्षेत्र से संबंधित कई महत्वपूर्ण घोषणाएं कीं। आइए नज़र डालते हैं केंद्रीय बजट 2020-21 में शिक्षा और रोजगार से सम्बन्धित महत्वपूर्ण प्रस्तावों पर:-
• वर्ष 2030 तक भारत दुनिया का सबसे अधिक ‘वर्किंग एज’ जनसंख्या वाला देश होगा। इसलिए शिक्षा के क्षेत्र में सुधार और इसके युवाओं को कौशल प्रदान करने का महत्व दिया जा रहा है।
• शिक्षा क्षेत्र के लिए कुल 99300 करोड़ का व्यय का प्रस्ताव किया गया और कौशल विकास के लिए अतिरिक्त 3000 करोड़ आवंटित किए गए।
• राष्ट्रीय शिक्षा नीति जल्द ही लागू की जाएगी। सरकार को इसके लिए 2 लाख से अधिक सुझाव मिले हैं, जिन्हें नीति में शामिल किया जाएगा।
• शिक्षा के क्षेत्र में वित्त को बढ़ावा देने के लिए एफडीआई को प्रोत्साहित किया जाएगा।
• नॉन-गजेटेड सरकारी नौकरियां के लिए कॉमन इलिजिबिलिट टेस्ट (CET) का आयोजन किया जाएगा।
• शहरी स्थानीय निकाय 1 वर्ष के लिए इंजीनियरों को इंटर्नशिप प्रदान करेंगे।
• वंचित वर्ग को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करने के लिए डिग्री स्तर की ऑनलाइन शिक्षा दी जाएगी।
• एक राष्ट्रीय पुलिस विश्वविद्यालय और राष्ट्रीय फोरेंसिक विज्ञान विश्वविद्यालय प्स्तावित किया गया।
• राज्यों के लिए जिला अस्पतालों में मेडिकल कॉलेज स्थापित करने में सहायता की जाएगी।
• शिक्षकों, नर्सों, पैरामेडिकल स्टाफ और केयरगीवर्स के लिए विदेशों में भारी मांग मौजूद है। सरकार नौकरियों में कौशल की जरूरतों के अनुसार ब्रिज-कोर्सेस का प्रस्ताव करती है ताकि उन्हें जॉब की आवश्यकताओं के अनुरूप बनाया जा सके।
• सामान्य चिकित्सकों और विशेषज्ञों दोनों के लिए योग्य चिकित्सा डॉक्टरों की कमी है इसलिए पीपीपी मोड में हर जिला अस्पताल से एक मेडिकल कॉलेज को अटैच किया जाएगा।
• अल्पसंख्यक और वंचित युवाओं के लिए शीर्ष 100 एनआईआरएफ रैंकिंग संस्थानों द्वारा डिग्री स्तर ऑनलाइन शिक्षा कार्यक्रम शुरू किया जाएगा।
Economic Survey 2020: नौकरी और शिक्षा क्षेत्र के लिए क्या कहता है आर्थिक सर्वेक्षण 2019-20?
