सुप्रीम कोर्ट ने उस याचिका पर सुनवाई से इनकार कर दिया है, जिसमें कहा गया है कि देश भर के विश्वविद्यालयों में पढ़ रहे स्टूडेंट्स को ट्यूशन फीस के भुगतान के लिए समय में छूट मिलनी चाहिए। वहीं इस संबंध में बीसीआई (BCI) और यूजीसी ( UGC) की ओर से दिशा-निर्देश जारी किए जाएं। कोर्ट ने इस मामले पर सुनवाई से इनकार कर दिया है।जस्टिस अशोक भूषण, जस्टिस आर सुभाष रेड्डी और जस्टिस एमआर शाह की तीन जजों वाली बेंच ने इस मामले को सुनने से मना कर दिया है।

बता दें कि लॉ फोर्थ ईयर के स्टूडेंट रमी राणा ने इस संबंध में एक याचिका दायर की थी। इसमें कहा गया था कि मौजूदा हालातों में स्टूडेंट्स पर एक समय पूरी फीस जमा करने का दबाव न बनाए जाए बल्कि उसके फीस पेमेंट के लिए कुछ समय की मोहलत दी जाए। इस बाबत छात्र का पक्ष रख रहे वकील ने कहा था कि छात्रों के हित को ध्यान में रखते हुए वह केवल फीस जमा करने में कुछ समय की मांग कर रहे हैं। वह फीस में छूट की मांग नहीं कर रहे हैं। जस्टिस भूषण ने ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट पहले भी इसी तरह के मामलों को खारिज कर दिया था और पीठ ने कहा था कि याचिकाकर्ता संबंधित हाईकोर्ट में जा सकते हैं क्योंकि सभी विश्वविद्यालयों, राज्यों की अलग-अलग शर्तें और आवश्यकताएं हैं। इसलिए स्टूडेंट्स को यह मामला हाईकोर्ट में उठाना चाहिए। याचिकाकर्ता का कहना है कि देश भर में कोविड-19 संक्रमण की वजह से पैदा हुए हालातों को देखते हुए फीस जमा करने के लिए अतिरिक्त की मांग की गई थी। 

वहीं अगर कोरोना वायरस संक्रमण की वजह से शैक्षणिक गतिविधियों की बात करें तो अभी तक स्कूल- कॉलेज बंद चल रहे हैं। मार्च से बंद हुए शैक्षणिक संस्थान सितंबर तक नहीं खोले जा सकें। हालांकि अनलॉक 4 में यह माना जा रहा था कि स्कूल- कॉलेज खुल सकते हैं लेकिन लगातर बढ़ रहे प्रकोप की वजह से फिलहाल यह मुश्किल हो रहा है। 

 

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