[अरुण श्रीवास्तव]। इन दिनों काउंसिलिंग के लिए मेरे पास ऐसी ईमेल्स की संख्या बढ़ गई है, जिनमें यह लिखा होता है कि मैं इन-इन विषयों से ग्रेजुएशन कर रहा हूं और अभी मैं दूसरे साल में हूं, लेकिन मन नहीं लग रहा है। क्या करूं? क्या अपनी पसंद के विषयों के साथ फिर से बीए करूं? ऐसी समस्या तमाम स्टूडेंट्स के साथ होती है। बारहवीं के बाद वे समझ नहीं पाते कि उन्हें आगे क्या करना चाहिए? इस बारे में वे सोच-विचार भी नहीं करते। अनिर्णय की स्थिति में नतीजा यह होता है कि वे किसी भी कॉलेज और कोर्स में प्रवेश ले लेते हैं। लेकिन कुछ महीने कक्षाएं करने के बाद उन्हें महसूस होता है कि उनका तो उसमें मन ही नहीं लग रहा है। मन न लगने के कारण उन्हें न तो कुछ समझ में आता है और न ही वे कक्षा के दौरान अपनी पहचान ही बना पाते हैं। ऐसा कतई नहीं है कि यह लाइलाज समस्या है और इसका कोई समाधान नहीं है। दरअसल, इस समस्या का समाधान किसी और के पास नहीं, बल्कि आपके पास ही है। हां, इसके लिए आपको पहले अपनी रुचि/पसंद को जानना-समझना होगा।

हर किसी की होती है पसंद: अगर आपने कभी अपनी पसंद के बारे में नहीं सोचा है, तो अब सोच लें। अभी भी देर नहीं हुई है। दूसरों की तरफ देखने या उनकी नकल करने की बजाय खुद के भीतर झांकें। ऐसा तो हो ही नहीं सकता कि आपकी कोई पसंद न हो। हां, अगर आप इस बारे में कोई निर्णय नहीं कर पा रहे हैं, तो एक बार फिर नये सिरे से कोशिश करें। अपने को टटोलें। क्या अच्छा लगता है और क्या खराब, इस पर बारीकी से गौर करें। अपनी आदतों और व्यवहार पर थोड़ा ध्यान दें। हो सके, तो माता-पिता, भाई-बहनों, दोस्तों और अध्यापकों की राय भी लें। जल्दबाजी न करें। कुछ दिन इस पर मनन करें, तब किसी निष्कर्ष पर पहुंचे। हो सकता है कि आपकी रुचियां एक से अधिक हों। ऐसी स्थिति में यह देखें कि उसमें भी आपको सबसे ज्यादा क्या पसंद है। न भागें कॉलेज के पीछे: वह अच्छा कॉलेज है, इसलिए आपको एडमिशन उसी में लेना चाहिए, इस सोच से बचने का प्रयास करें।

आज के प्रतिस्पर्धी दौर में सबका कोर्स कमोबेश एक जैसा ही होता है। सभी को अपना परिणाम बेहतर रखने और प्लेसमेंट की चिंता होती है, चाहे वह सरकारी शिक्षण संस्थान हो या फिर निजी। ऐसे में कॉलेज को प्राथमिकता देने की बजाय उस कोर्स को प्राथमिकता दें, जो आपको सबसे ज्यादा पसंद हो। अपनी पसंद के कोर्स में दाखिला लेने की स्थिति में आपका मन तो उसमें रमेगा ही, आप नियमित रूप से उसमें बेहतर प्रदर्शन कर सकेंगे। मन लगने की स्थिति में आप उस कोर्स का भरपूर लुत्फ उठा सकेंगे और भविष्य में उससे संबंधित क्षेत्र में करियर की राह पर भी उतनी ही आसानी से आगे बढ़ सकेंगे। अगर किसी वजह से आपको अपनी पहली प्राथमिकता वाले कोर्स में दाखिला न मिल सके, तो अपने पास प्लान बी भी तैयार रखें।

सीखने पर हो जोर: आप जिस भी कोर्स में प्रवेश लें, उसमें खुद को रमाने पर पूरा ध्यान दें। सिर्फ किताबी कीड़ा बनने यानी रटने की बजाय उससे संबंधित व्यावहारिक चीजों के बारे में भी सीखने-जानने पर पूरा ध्यान दें। अब आपके पास तो स्मार्टफोन/ इंटरनेट भी है। ऐसे में आप इसका इस्तेमाल अपनी नॉलेज बढ़ाने के लिए कर सकते हैं। अगर कोई तकनीकी कोर्स कर रहे हैं, तो और भी जरूरी है कि आप उससे संबंधित इंडस्ट्री की जरूरतों को समझते हुए खुद को शिक्षित-प्रशिक्षित करने पर ध्यान दें।

न भटकें कदम

बारहवीं के बाद स्कूल की चारदीवारी से बाहर निकलना एक तरह से खुली हवा में सांस लेने जैसा होता है। बेशक यह हर युवा को अच्छा लगता है, लेकिन इसमें गलत संगत में पड़कर भटकने का डर भी होता है। इसलिए यह दौर हर युवा के लिए चुनौतीपूर्ण भी होता है कि अचानक माहौल बदलने की स्थिति में वह खुद को किस तरह से संभालता है। किनसे दोस्ती करता है। कक्षा, लाइब्रेरी, गेम्स आदि पर कितना ध्यान देता है। यह सब कुछ अपने व्यक्तित्व को प्रभावशाली और बेहतर बनाने के लिए होना चाहिए। अगर आपके कदम बहक गए, तो फिर संभलना मुश्किल होगा। बेशक आप अपनी युवावस्था का आनंद लें, पर अनुशासित रहकर। यह समय आपके लिए टर्निंग प्वाइंट की तरह है। इसमें आपने खुद को संभाल और गढ़ लिया, तो आगे निश्चित रूप से चमकदार करियर मिलेगा। उससे आपको भी खुशी मिलेगी और आपके परिजनों को भी।

Posted By: Sanjay Pokhriyal

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