प्रयागराज, जागरण संवाददाता। प्रदेश के अशासकीय सहायता प्राप्त (एडेड) महाविद्यालयों की प्राचार्य भर्ती का रास्ता साफ हो गया है। उच्च शिक्षा निदेशालय ने विज्ञापन संख्या 49 के तहत पदों में बदलाव कर दिया है। लिखित परीक्षा का कार्यक्रम दिसंबर माह के अंत तक घोषित किया जा सकता है, हालांकि लिखित परीक्षा व साक्षात्कार नए साल में ही हो पाएगा।

एडेड महाविद्यालयों में पहली बार परीक्षा के आधार पर प्राचार्यों की नियुक्ति होगी। उच्चतर शिक्षा सेवा आयोग ने विज्ञापन संख्या 49 के तहत 290 पदों की भर्ती निकाली है। ऑनलाइन आवेदन 15 मार्च से 17 अप्रैल तक लिया गया। इसमें 1100 के लगभग आवेदन आए हैं। लिखित परीक्षा दिसंबर माह में कराने की तैयारी थी, लेकिन, आयोग उसके अनुरूप कार्रवाई पूरी नहीं करा पाया। इधर उच्च शिक्षा निदेशालय ने पदों की संख्या को संशोधित कर दिया है। इससे भर्ती उसी के अनुरूप कराई जाएगी। पूर्व में जारी विज्ञापन के अनुसार स्नातकोत्तर पुरुष महाविद्यालयों में 172 व महिला महाविद्यालयों में प्राचार्य के 36 पद थे। जबकि स्नातक पुरुष महाविद्यालयों में 64 व महिला महाविद्यालयों में प्राचार्य के 18 पदों के लिए आवेदन मांगा गया था।

उच्च शिक्षा निदेशालय ने पदों को संशोधित करते हुए स्नातकोत्तर पुरुष महाविद्यालयों में 134 व महिला महाविद्यालयों के लिए प्राचार्य का 30 पद निर्धारित किया है। जबकि स्नातक पुरुष महाविद्यालयों में 105 व महिला स्नातक महाविद्यालयों में 21 पदों पर भर्ती की जाएगी।

नहीं लिया जाएगा नया आवेदन

उच्चतर शिक्षा सेवा आयोग की सचिव डॉ. वंदना त्रिपाठी का कहना है कि पदों की संख्या में संशोधित होने से भर्ती पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। इसके लिए नए सिरे से आवेदन नहीं लिया जाएगा। बल्कि पूर्व में प्राप्त आवेदनों के आधार पर ही भर्ती कराई जाएगी।

उच्च शिक्षा निदेशालय में व्याप्त अनियमितताओं की जांच करने आयी टीम ने अपनी रिपोर्ट शासन को सौंप दी है। शासन रिपोर्ट की समीक्षा करके दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करेगा। शासन की नाराजगी का अंदेशा होने पर निदेशालय के कुछ पटल परिवर्तित किए गए हैं लेकिन शिकायत करने वाले कर्मचारी उसे उचित नहीं मान रहे हैं। उनका कहना है कि दोषियों को बचाने के लिए दिखावटी कार्रवाई की गई है।

शासन पहुंची उच्च शिक्षा निदेशालय में अनियमितता मामले की रिपोर्ट

उच्च शिक्षा निदेशालय में व्याप्त अनियमितताओं की शिकायत कुछ कर्मचारियों ने राज्यपाल, डिप्टी सीएम व वरिष्ठ अधिकारियों से की थी। शिकायत को गंभीरता से लेते हुए शासन ने उच्च शिक्षा के संयुक्त सचिव डॉ. अमित भारद्वाज के नेतृत्व में 20 व 21 नवंबर को निदेशालय में जांच कराई। जांच अधिकारी ने निदेशक, असिस्टेंट निदेशक, वित्त नियंत्रक, लेखाधिकारी सहित सालों से एक पटल में जमे प्रशासनिक अधिकारी व लिपिकों से अलग- अलग पूछताछ की। प्रतिदिन होने वाले काम व लंबित फाइलों का ब्योरा लिया। इसमें उन्हें काफी खामियां मिली थी।

डॉ. भारद्वाज ने बीते दिनों अपनी रिपोर्ट शासन को सौंप दी। अब सबकी नजर शासन की कार्रवाई पर टिकी है। कार्रवाई की जद में कौन आता है और कौन छूटता है?

Posted By: Neel Rajput

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