IIT बॉम्बे के 2026 बैच के 50% से ज्यादा छात्र बड़े शहरों से, 25 फीसदी छात्रों ने एक या दो बार की चीटिंग; देखें सर्वे
आईआईटी बॉम्बे के 'इनसाइट' सर्वे के अनुसार, 2026 बैच के 50% से अधिक छात्र बड़े शहरों से हैं, जबकि 25% ...और पढ़ें

IIT Bombay survey
HighLights
बैच 2026 में 50% से अधिक छात्र बड़े शहरों से आए।
लगभग 25% छात्रों ने एक-दो बार नकल की।
85% से अधिक छात्रों के माता-पिता ग्रेजुएट हैं।
एजुकेशन डेस्क, नई दिल्ली। IIT बॉम्बे के स्टूडेंट मीडिया ग्रुप 'इनसाइट' के सालाना सर्वे में हिस्सा लेने वाले 50% से ज्यादा छात्र बड़े शहरों (32.6%) और मेट्रो शहरों (20.8%) से हैं। वहीं 37.5% छात्रों ने बताया कि वे छोटे शहरों या कस्बों से आए हैं, जबकि सिर्फ 9% ने गांवों से आने की बात कही। सर्वे की दिलचस्प बातों में से एक यह है कि 85% से अधिक स्टूडेंट्स ने बताया कि उनके माता-पिता ने STEM या नॉन-STEM फील्ड में अंडरग्रेजुएट या पोस्टग्रेजुएट की पढ़ाई पूरी की है।
हर साल होता है सीनियर सर्वे
'इनसाइट' हर साल ग्रेजुएट होने वाले छात्रों के बीच सीनियर सर्वे करता है, लेकिन 2026 बैच के 2400 छात्रों में से सिर्फ 144 ने ही इसमें हिस्सा लिया। सीनियर सर्वे 2026 में कैंपस लाइफ से जुड़े कई पहलुओं पर जानकारी जुटाई गई, जैसे छात्रों की डेमोग्राफिक्स (जनसांख्यिकीय जानकारी), एकेडमिक परफॉर्मेंस, करियर प्लान, लाइफस्टाइल और सोशल अनुभव। इस सर्वे में ग्रेड और प्लेसमेंट के नतीजों से लेकर मेंटल हेल्थ, कैंपस में पर्सनल ग्रोथ, माता-पिता की पढ़ाई-लिखाई की बैकग्राउंड और यहां तक कि खाने-पीने की पसंद-नापसंद जैसी सभी बातें शामिल थीं।
25 फीसदी स्टूडेंट्स ने मजबूरी में एक या दो बार की चीटिंग
संस्थान के 'ऑनर कोड' (आचार संहिता) के उल्लंघन से जुड़े एक सवाल के जवाब में, अधिकतर स्टूडेंट्स ने कहा कि उन्होंने असाइनमेंट या परीक्षा में कभी नकल नहीं की। हालांकि, लगभग एक-चौथाई लोगों ने माना कि उन्होंने 'मजबूरी में एक या दो बार' नकल की थी। इनमें वे छात्र भी शामिल थे जिनका परफॉर्मेंस इंडेक्स (CPI) काफी अच्छा था। लगभग 65% लोगों ने यह भी कहा कि उन्होंने किसी को 'अक्सर' नकल करते देखा है।
इनसाइट ने एक डिस्क्लेमर में कहा कि सर्वे में बताई गई बातें शायद ग्रेजुएट होने वाले सभी स्टूडेंट्स की राय और अनुभवों को पूरी तरह न दिखाती हों, जबकि स्टूडेंट्स ने इसे 'मजे-मजे में किया गया' सर्वे बताया। ब्रांच बदलने के बारे में पूछे जाने पर, एक-चौथाई छात्रों ने कहा कि अगर उन्हें अपनी ब्रांच बदलने का मौका मिलता, तो वे कंप्यूटर साइंस और इंजीनियरिंग चुनते। एक अलग सवाल में, 32.4% लोगों ने कहा कि बेहतर प्लेसमेंट के मौके उन्हें ब्रांच बदलने के लिए प्रेरित करते।
काउंसिलिंग या थेरेपी पर आया ये जवाब
छात्रों से जब पूछा गया कि क्या उन्होंने कैंपस में रहते हुए काउंसलिंग या थेरेपी ली थी, तो 41 स्टूडेंट्स ने कहा कि उन्हें कभी इसकी जरूरत महसूस नहीं हुई, जबकि 33 ने कहा कि उन्होंने दोस्तों और परिवार की मदद से अपनी मुश्किलों का सामना किया। वहीं, 24 लोगों ने कहा कि उन्होंने इंस्टीट्यूट की काउंसलिंग सर्विस का इस्तेमाल किया था, जबकि 25 ने कहा कि वे काउंसलिंग लेना तो चाहते थे, लेकिन कभी पहला कदम नहीं उठाया।
सर्वे में शामिल लगभग 32% लोगों ने कहा कि उन्हें पक्का नहीं है कि वे अगले पांच सालों तक इसी क्षेत्र में बने रहेंगे या नहीं, जबकि 28% ने कहा कि उनके पास पहले से ही इस क्षेत्र से बाहर निकलने की योजना है। इसके अलावा, 21% लोगों ने कहा कि अगर पैसे की कोई समस्या न होती, तो वे IIT बॉम्बे से ग्रेजुएशन के बाद आगे की पढ़ाई या रिसर्च करना पसंद करते।
