नई दिल्ली, ऑनलाइन डेस्क। Jammu and Kashmir: अधिवास से जुड़ी नीतियों की हाल ही में 18 मई 2020 को की गयी घोषणा के बाद अब जम्मू एवं कश्मीर प्रशासन ने राज्य के शिक्षण संस्थानों, स्कूल और हायर एजुकेशन में दाखिले के लिए डोमिसाइल स्टेटस को योग्यता मानदंडों में शामिल करने की घोषणा की है। जेएण्डके ऐडमिनिस्ट्रेशन द्वारा बुधवार 20 मई को जारी सर्कुलर के अनुसार संघ शासित क्षेत्र में स्थित विभिन्न शिक्षण संस्थानों में दाखिले के लिए, जहां भी पर्मानेंट रेजीडेंट सर्टिफिकेट लगाना अनिवार्य था, वहां अब डोमिसाइल सर्टिफिकेट लगाना होगा।

वहीं, दूसरी तरफ जम्मू एवं कश्मीर प्रशासन ने कश्मीरी प्रवासियों और विस्थापितों के लिए ‘फ्रेश रजिस्ट्रेशन’ को सोमवार से फिर से शुरु कर दिया है ताकि यूनियन टेरिटरी से प्रवास के लिए गये ‘बोनाफाइड रेजीडेंट्स’ को शामिल किया जा सके।

जम्मू एवं कश्मीर अपनी पार्टी (जेकेएपी) ने जम्मू एवं कश्मीर के उप-राज्यपाल गिरीश चंदर मुर्मु से अपील की है कि वर्तमान रेजीडेंट्स के स्टेट सब्जेक्ट्स को ही अधिवास प्रमाण पत्र माना जाए। पार्टी के वरिष्ठ नेता विक्रम मल्होत्रा के मुताबिक जिन लोगों के पास पहले के जम्मू एवं कश्मीर राज्य के स्टेट सब्जेक्ट्स हैं, उन्हें यूटी का निवासी माना जाना चाहिए। इन लोगों को अधिवास प्रमाण-पत्र लेने के लिए लंबी कतारों में खड़े होने के लिए बाध्य नहीं किया जाना चाहिए। जिन लोगों के पास पहले से डॉक्यूमेंट्स हैं, उनके साथ यह अन्याय होगा और इससे समाज में सिर्फ अव्यवस्था फैलेगी। बल्कि सरकार को चाहिए कि टेक्नोलॉजी की मदद से स्टेट सब्जेक्ट्स का दर्ज प्राप्त लोगों का पता करे और उन्हें अधिवासी माने।

हालांकि, जेकेएपी नेता ने जम्मू एवं कश्मीर में कई वर्षों से रह रहे लोगों को अधिवास जारी करने की प्रक्रिया शुरु किये जाने की सराहना भी की और कहा कि इससे उन लोगों को फायदा होगा जिन्हें कई दशकों से यहां रहने के बावजूद मूलभूत अधिकारों से वंचित रहे हैं।

यहां देखें ऑफिशियल सर्कुलर

Posted By: Rishi Sonwal

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