नई दिल्ली [अरुण श्रीवास्तव]। जॉब के लिए नई स्किल्स की जरूरत और चिंता को देखते हुए केंद्र सरकार आइआइएम और आइआइटी की तर्ज पर इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ स्किल्स (आइआइएस) अब मुंबई के बाद अहमदाबाद में खोलने जा रही है। इसे देर से उठाया जा रहा एक सही कदम कहा जा सकता है। एआइ, मशीन लर्निंग, ब्लॉक चेन, साइबर टेक्नोलॉजी, ऑटोमेशन आदि तकनीक से संबंधित कोर्स और ट्रेनिंग चुनिंदा संस्थानों में ही उपलब्ध हैं। रोजगार के लिए कितना जरूरी है उच्च गुणवत्ता वाली तकनीकों में ट्रेनिंग की सुविधा उपलब्ध करवाना, यहां जानें...

हम सबने देखा है कि पिछले कुछ वर्षों में किस तरह देश-दुनिया में स्टार्टअप्स की लहर आई है। इनमें से कुछ ने तीन-चार सालों में ही जबर्दस्त कामयाबी हासिल की है, जिसे देखते हुए तमाम बड़े कारोबारी और व्यापारिक घराने भी उनमें निवेश करने लगे हैं। हालांकि इन स्टार्टअप्स में से ज्यादातर युवाओं की अपनी पहल और इनोवेटिव सोच से सामने आ रहे हैं, जिनमें से ज्यादातर रोजमर्रा की जिंदगी में आने वाली मुश्किलों को आसान बनाने से जुड़े हुए हैं और इसीलिए वे तेजी से कामयाब भी हुए हैं। इनकी सफलता से पढ़ाई पूरी कर निकलने वाले तमाम युवा भी दस से छह की बंधी-बंधाई नौकरी का मोह छोड़कर अपना खुद का स्टार्टअप लाने को लगातार प्रेरित हो रहे हैं। ऐसा नहीं है कि यह राह बहुत आसान है और कामयाबी बड़ी जल्दी मिल जाती है। आसानी से कामयाबी गिने-चुने युवाओं को ही मिलती है। ज्यादातर को इसके लिए धैर्य, लगन और सही दिशा में मेहनत के साथ लंबा इंतजार करना पड़ता है।

कौशल विकास के लिए हो तेज पहल

अमेरिका और यूरोप के तमाम देशों में इंफ्रास्ट्रक्चर की सहूलियत और कारोबार/कंपनी/स्टार्टअप शुरू करने की राह बेहद आसान होने के कारण ही वहां के युवा न सिर्फ कम उम्र में अपने आइडिए पर अमल के लिए प्रेरित होते हैं, बल्कि इन देशों के विश्वविद्यालय और कॉलेज भी अपने स्टूडेंट्स को इनोवेशन और कौशल विकास के लिए लगातार प्रेरित करते रहते हैं।

इसी का नतीजा है कि वहां फेसबुक, गूगल, इंस्टाग्राम, वाट्सएप जैसे इनोवेशन सामने आते रहे हैं और ऑटोमेशन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, मशीन लर्निंग, ब्लॉक चेन आदि जैसी टेक्नोलॉजी का उपयोग लगभग हर क्षेत्र में तेजी से हो रहा है। हमारे देश के युवा इन्हें अपनाकर इनके जरिए आगे तो बढ़ रहे हैं, पर इन तकनीकों में बुनियादी प्रशिक्षण की सुविधा का अभाव पिछले कई वर्षों से महसूस किए जाने के बावजूद इस दिशा में अभी तक कोई खास पहल नहीं की जा सकी है। आइआइए, आइआइटी और इनके समकक्ष कुछ संस्थानों ने तो अपने बलबूते इनमें कुछ सक्षमता हासिल की है, लेकिन भारत जैसी विशाल युवा आबादी वाले देश के लिए इतना ही पर्याप्त नहीं। सरकार और शैक्षणिक संस्थानों को इस बारे में त्वरित निर्णय लेते हुए उस पर तेजी से अमल भी करना चाहिए।

जरूरी है शिक्षण संस्थानों की दिलचस्पी

एडवांस स्किल्स की लगातार बढ़ती जरूरत को महसूस करने के बावजूद इनकी ट्रेनिंग की समुचित व्यवस्था की पहल फिलहाल देश के गिने-चुने विश्वविद्यालयों-कॉलेजों द्वारा ही की गई है।

व्यक्तिगत रूप से आज हर कोई एआइ और अन्य तकनीकों से संचालित स्मार्टफोन और अन्य गैजेट्स का उपयोग कर रहा है, लेकिन इन तकनीकों के बुनियादी प्रशिक्षण को बहुत कम संस्थानों ने अपने कोर्स में शामिल किया है। इंडस्ट्री की जरूरत के अनुसार कौशल न होने के कारण ही परिसरों से निकलने वाले दस में से औसतन सात-आठ युवाओं को समुचित नौकरी से वंचित रह जाना पड़ रहा है। युवाओं को रोजगार के लिए सक्षम बनाना शिक्षण संस्थानों का सबसे बड़ा दायित्व है, लेकिन ऊंची फीस लेने के बावजूद वे अपने इस दायित्व का सही तरीके से निर्वाह करने में असफल हो रहे हैं। ज्यादातर संस्थानों में कैंपस प्लेसमेंट होता है, लेकिन कुछ संस्थानों को छोड़कर ज्यादातर में चुनिंदा स्टूडेंट्स को ही उनकी मनपसंद जॉब मिल पाती है।

डिमांडिंग स्किल्स के हों फुलटाइम कोर्स

एआइ, ब्लॉकचेन, मशीन लर्निंग जैसी तकनीक की बढ़ती जरूरतों को देखते हुए कुछ संस्थानों ने इन्हें अपने पारंपरिक कोर्स के एक हिस्से के रूप में तो शामिल कर लिया है, लेकिन अब सिर्फ इससे ही काम नहीं चलने वाला। अब जरूरत है इन तकनीकों में फुलटाइम कोर्स संचालित करने की, जिसे बारहवीं के बाद ही करने का मौका मिल सके। अब परंपरागत कोर्सों को भी इन तकनीकों के परिप्रेक्ष्य में देखना और इन्हें शामिल करते हुए सिलेबस को नए सिरे से तैयार करना होगा। संस्थान संभवत: इसलिए भी इन तकनीकों मेंकोर्स शुरू करने से बचना चाह रहे हैं, क्योंकि उनके पास अभी इनमें स्किल्ड फैकल्टी ही नहीं है। इस समस्या को इंडस्ट्री के एक्सपर्ट हायर करके और उनसे अपनी फैकल्टी को नियमित रूप से लगातार ट्रेनिंग दिलवाकर दूर किया जा सकता है। हालांकि इसके लिए उन्हें अपनी जेब कुछ ज्यादा ढीली करनी पड़ सकती है, लेकिन कालांतर में इसका फायदा उन्हें ही मिलेगा।

सरकार करे निगरानी

बेशक केंद्र सरकार इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ स्किल्स खोलने की जरूरत महसूस कर रही है, लेकिन यह काम सरकार अकेले नहीं कर सकती। इस काम को निजी क्षेत्र के शिक्षण संस्थानों के जरिए बढ़ावा देना होगा। हां, इसके लिए सरकार को निजी क्षेत्र की मनमानी पर रोक लगाने के साथ उनकी लगातार कड़ी निगरानी का प्रावधान भी करना होगा। केंद्र और राज्य सरकारों द्वारा अपने अधीन आने वाले विश्वविद्यालयों/कॉलेजों का स्वरूप और इंफ्रास्ट्रक्चर बदलने पर भी ध्यान देना होगा, ताकि वे कम फीस में अत्याधुनिक तकनीक का शिक्षण-प्रशिक्षण उपलब्ध करा सकें।

खुद भी करें पहल

युवा इस बात को समझकर ही कदम आगे बढ़ाएं कि आगे का समय साधारण पढ़ाई का बिल्कुल नहीं है। उन्हें कोई न कोई स्किल सीखने की पहल खुद करनी होगी। यह भी देखना चाहिए कि जो स्किल वे सीखने जा रहे हैं, वह बदलती तकनीक के कितने अनुकूल है। अपनी सोच में लचीलापन रखें, ताकि समय की जरूरत के अनुसार बदलाव लाने में असहज न महसूस करें। एक बार जॉब में आने के बाद भी अपनी स्किल को अपडेट करते

12वीं के बाद मिलेगा आइआइएस में प्रवेश!

पहला इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ स्किल्स (आइआइएस) मुंबई में स्थापित किया जा रहा है, जबकि दूसरे आइआइएस की शुरुआत अहमदाबाद में होने जा रही है। जल्द ही कानपुर में तीसरा आइआइएस स्थापित किया जाएगा। देशभर में ऐसे छह संस्थान खोलने की योजना है। हालांकि माना जा रहा है कि इन संस्थानों में वर्ष 2021-22 से ही स्किल ट्रेनिंग शुरू हो पाएगी। इन संस्थानों में बारहवीं के बाद प्रवेश दिया जाएगा। आइटीआइ से प्रशिक्षित छात्रों को भी यहां अपने कौशल को और निखारने का मौका मिल सकेगा।

Posted By: Neel Rajput

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