शिमला, राज्य ब्यूरो। प्रदेश में फर्जी डिग्री के सहारे पांच जिलों के कुछ पूर्व सैनिक अध्यापक बन बैठे। इनमें से 12 सैनिकों ने सेना में रहकर ही बिहार के बोधगया स्थित मगध विश्वविद्यालय से फर्जी डिग्रियां हासिल की। विजिलेंस जांच में पता चला है कि 12 तत्कालीन सैनिकों ने (अब पूर्व) और चार सिविल व्यक्तियों ने शिक्षा विभाग में टीजीटी की नौकरी की। इनमें से कुछ अभी भी नौकरी कर रहे हैं, जबकि कुछ सेवानिवृत्त हो चुके हैं। एक शिक्षक के खिलाफ 2012 में नाहन में कानूनी कार्रवाई की गई थी। कुल 17 डिग्रियां संदेह के घेरे में आई हैं। अब 16 शिक्षकों के खिलाफ इस वर्ष के अंत तक विजिलेंस हमीरपुर की एक अदालत में चार्जशीट दाखिल करेगी। आरोपित शिक्षक कांगड़ा, हमीरपुर, मंडी, कुल्लू और सिरमौर के रहने वाले हैं।

शिक्षा विभाग के माध्यम से टीजीटी की 2004-05 में भर्ती हुई थी। आरोप है कि उक्त आरोपितों ने मगध विवि से बीएड, बीएससी, एमएससी की डिग्रियां फर्जी तरीके से हासिल कीं। सेना से रिटायरमेंट के बाद इन पूर्व सैनिकों ने शिक्षा विभाग में नौकरी हासिल कर ली।

कब दर्ज हुई एफआइआर

2018 में किसी ने 17 डिग्रियों की शिकायत विजिलेंस से की। विजिलेंस जांच में इन डिग्रियों के फर्जी होने के प्रमाण मिले। इसके आधार पर 2019 में हमीरपुर थाने में केस दर्ज किया गया। विजिलेंस ने जांच के लिए सब इंस्पेक्टर की अगुवाई में टीम गठित की है। जांच में सभी 17 डिग्रियों के फर्जी पाए जाने के पुख्ता सुबूत मिले हैं। आरोपितों से भी पूछताछ की गई है। कुछ दस्तावेजों की फारेंसिक प्रयोगशाला से और रिपोर्ट आनी बाकी है।

जांच के दौरान बोधगया के मगध विश्वविद्यालय से ली गई 17 शिक्षकों की डिग्रियां फर्जी पाई गई हैं। मामला की जांच जारी है। कितने पैसों में एक डिग्री खरीदी गई, यह पता लगाना मुश्किल है। हालांकि जल्द ही जांच पूरी कर चार्जशीट कोर्ट में दाखिल की जाएगी।

लालमन शर्मा, डीएसपी, विजिलेंस, हमीरपुर

Edited By: Neeraj Kumar Azad