Gandhi Jayanti 2026 Speech: गांधी जयंती पर दें ये बेहतरीन भाषण, स्कूल हॉल में दनादन बजेंगी तालियां
2 अक्टूबर को गांधी जी की 157वीं जयंती मनाई जा रही है। इस मौके पर आप यहां से एक कविताओं से लैस बेहतरीन भाषण तैयार करके सुना सकते हैं।

Gandhi Jayanti 2026 पर भाषण हिंदी में
HighLights
गांधी जयंती पर कविताओं से लैस स्पीच।
इस वर्ष 157वीं गांधी जयंती की जा रही सेलिब्रेट।
एजुकेशन डेस्क, नई दिल्ली। 2 अक्टूबर 2026 को हमारे देश के राष्ट्रपिता महात्मा गांधी जिन्हें हम "बापू" के नाम से जानते हैं उनकी 157वीं जयंती मनाई जा रही है। देश के साथ ही विदेश में भी महात्मा गांधी को बहुत सम्मान और प्यार दिया जाता है, इसलिए इसे इंटरनेशनल लेवल पर भी बड़े पैमाने पर मनाया जाता है। स्कूल, कॉलेज के साथ ही सार्वजनिक मंचों से इस दिन पर भाषण सहित अन्य प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जाता है।
अगर आप भी इस बार गांधी जयंती पर स्पीच देना चाहते हैं तो यह पेज आपके लिए बेहद उपयोगी है। आप यहां से कविताओं से लैस बेहतरीन भाषण प्राप्त कर सकते हैं।
Gandhi Jayanti par Bhashan: गांधी जयंती पर स्पीच
नमस्कार, यहां पर उपस्थित सभी अतिथि गढ़, गुरुजन एवं प्यारे भाई-बहनों का आभार। जैसा का हम सभी जानते हैं कि हम यहां पर महात्मा गांधी यानी कि हमारे प्यारे बापू की जयंती के उपलक्ष्य में उपस्थित हुए हैं। इस बार गांधी जी की 157वीं जयंती मनाई जा रही है। गांधी जी कोई साधारण व्यक्ति नहीं थे। आज जो हम दुनिया के सबसे बड़े लोकतांत्रिक देश के रूप में पहचाने जाते हैं वो इसी दुबले-पतले से बापू की ही देन है। देश को एकत्र करके भारत निर्माण और उसके बाद अंग्रेजो से स्वतंत्रता दिलाने में गांधी जी का अविश्वसनीय योगदान है। देश की आजादी में अपने प्राणों की चिंता न करते हुए अपना सर्वस्व न्योछाबर कर दिया। ऐसे महापुरुष को श्रद्धांजलि देते हुए मैं सुमित्रानन्द पंत द्वारा लिखित कविता सुनना चाहता हूं।
- तुम मांस-हीन, तुम रक्तहीन,
- हे अस्थि-शेष! तुम अस्थिहीन,
- तुम शुद्ध-बुद्ध आत्मा केवल,
- हे चिर पुराण, हे चिर नवीन!
- तुम पूर्ण इकाई जीवन की,
- जिसमें असार भव-शून्य लीन;
- आधार अमर, होगी जिस पर
- भावी की संस्कृति समासीन।
आज के तकनीकी और भागदौड़ भरे दौर में महात्मा गांधी के विचार पहले से कहीं अधिक प्रासंगिक हैं। जब दुनिया हिंसा, जलवायु परिवर्तन, और बढ़ते सामाजिक तनावों से जूझ रही है, तब गांधी जी का सत्य और अहिंसा का मार्ग एक मार्गदर्शक दीपस्तंभ है। उनका 'अपरिग्रह' यानी कि कम संसाधनों में जीने की कला का सिद्धांत आज के दौर में पर्यावरण संरक्षण और सतत जीवनशैली के लिए सबसे बड़ा मंत्र है। डिजिटल युग में, जहां सहिष्णुता की कमी देखी जाती है, वहां गांधी जी की सहानुभूति, शांति और आत्मनिर्भरता की सीख हमें समाज में एकजुटता और संवाद बनाए रखने का रास्ता दिखाती है। अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए मैं एक कविता सउना रहा हूं-
- युग बदला, बदले विचार, पर बदला नहीं तुम्हारा सार,
- अहिंसा का जो दिया संदेश, आज भी पूजे उसे स्वदेश।
- हिंसा और नफरत के दौर में, शांति की राह दिखाता कौन?
- सत्य की शक्ति से जग को, जीना नए सिरे सिखाता कौन?
- सादा जीवन, उच्च विचार, यही जीवन का असली आधार,
- गांधी! तुम सिर्फ अतीत नहीं, तुम ही हो आने वाला कल का प्रकाश-पुंज अपार।
आपको पता होना चाहिए कि गांधी जी एक दूरदर्शी व्यक्ति थे। वे उस समय भी ग्राम स्वराज, पंचायती-राज, ग्रामोद्योग, महिलाओं की शिक्षा, गांवों में स्वच्छता और विकास के पक्षधर थे। मैं यहां उपस्थित सभी लोगों से यही कहना चाहूंगा गांधी जी के इस विजन को हम आगे तक लेकर जाने का संकल्प लें। उनके इस विजन के लिए मैं कहना चाहूंगा-
- सौगंध मुझे इस मिट्टी की,
- मैं देश नहीं मिटने दूंगा,
- मैं देश नहीं मिटने दूंगा,
- मैं देश नहीं झुकने दूंगा।
अपने इन्हीं शब्दों के साथ मैं अपनी वाणी को विराम देता हूं। जय हिन्द, जय भारत।
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