नई दिल्ली, जेएनएन। सफलता सभी पाना चाहते हैं। हर कोई चाहता है कि असफलता उन्हें छू न सके। इसके लिए बड़ी-बड़ी योजनाएं बनाते हैं, अपना भरसक प्रयास करते हैं। फिर भी अधिकतर लोग असफल हो जाते हैं। आइए जानते हैं बहुत प्रयास करने के बाद भी अगर वांछित सफलता नहीं मिल रही है, तो हमें क्या करना चाहिए...

अक्सर यह कहा जाता है कि अपने काम में सौ फीसदी दो, सफलता आपके कदम चूमेगी, लेकिन हकीकत इससे परे है। इसपर विनीत टंडन (म्यूजिक मोटिवेशनल स्पीकर) ने अपना एक्सपीरियंस शेयर किया। उन्होंने बताया कि उनकी हाल ही में एक ऐसे छात्र से मुलाकात हुई, जो अमेरिका में एक प्रतिष्ठित कॉलेज में पढ़ रहा था। उसने अपनी 12वीं कक्षा में 95 प्रतिशत से अधिक अंक हासिल किए थे और भाग्यशाली था कि आगे की पढ़ाई के लिए अमेरिका के एक प्रतिष्ठित विश्वविद्यालय में उसे दाखिला और छात्रवृत्ति मिल गई थी।

उसने वहां छह महीने तक पढ़ाई की, लेकिन फिर छह महीने के बाद उसे चिकित्सीय कारणों से अमेरिका छोड़कर भारत वापस आना पड़ा। वापस आने पर वह बेहद निराश था, क्योंकि देश में कुछ ही छात्रों को इस कॉलेज में दाखिला मिल सकता था। उसने सोचा कि उसकी जिंदगी और करियर खत्म हो जाएगा।

कभी-कभी जिंदगी में हमें ऐसे मोड़ों और उतार-चढ़ाव का सामना करना पड़ता है जिनकी हमने कभी उम्मीद नहीं की थी और हमें मालूम नहीं होता है कि उनसे बाहर कैसे निकला जाए। यहां कुछ युक्तियां सुझाई गई हैं, जो जीवन में आने वाले हालातों पर काबू पाने में मददगार साबित हो सकती हैं।

खराब किस्मत को न दें दोष: मान लीजिए आपका किसी कॉलेज के लिए चयन हो जाता है और उसके बाद कॉलेज में कानून एवं व्यवस्था की स्थिति बिगड़ जाती है और कॉलेज बंद हो जाता है। तो आपकी इसमें क्या गलती है? ऐसे हालात में फंसना हर किसी की नियति नहीं है। कभी-कभी यह बस हो जाता है।

इसी तरह, आपने कड़ी मेहनत की और जब चयन का दिन आया तब आप बहुत बीमार पड़ गए? तो क्या यह आपकी बदकिस्मती है। यह पूर्ण रूप से एक घटना है। आपको इसे इसी रूप में लेना चाहिए, क्योंकि ऐसी घटना किसी के साथ भी हो सकती है।

अतिआत्मविश्वास नुकसानदेह: अक्सर हम बोलते हैं कि हमने तो अपना सौ फीसदी दिया था, फिर भी फलां परीक्षा पास नहीं हो पाया। जरा यह सवाल सच्चाई के साथ खुद से एक बार पुन: पूछिए कि क्या आपने वाकई सौ फीसदी कोशिश की थी? मेरा एक जानकार छात्र नीट परीक्षा की तैयारी कर रहा है।

वह कड़ी मेहनत करता है, लेकिन उसने भौतिकी में अपने प्रदर्शन में सुधार लाने के लिए पर्याप्त मेहनत नहीं की, जिससे सफलता के लिए उसकी संभावना प्रभावित होती है। दरअसल, अपने किसी भी प्रयास में हमें अपने आप से यह जरूर पूछना चाहिए कि क्या हम वाकई सौ फीसदी दे रहे हैं।

मूल कारणों की पहचान: जब किसी असफलता या आकस्मिक नाकामयाबी से सामना होता है तो आपका प्रत्युत्तर क्या होता है? क्या आपने अपनी असफलता में कोई पैटर्न देखा है? क्या यह आपके कौशल, ज्ञान या अनुभव के कारण है? क्या वहां ऐसा कुछ है जो अगली बार नतीजे को बेहतर बनाने के लिए आप कर सकते हैं? असफलता के मूल कारणों को समझने से अगली बार आपको इससे बेहतर ढंग से निबटने में मदद मिलेगी।

खुद पर न लगाएं आरोप: अक्सर जब हम असफल हो जाते हैं तब हम खुद पर आरोप लगाना शुरू कर देते हैं। उदाहरण के लिए, अगर आप एक ऐसे छात्र हैं जो अमेरिका में ग्रेजुएशन करने की हसरत रखता है तो यह सिर्फ उच्च अंक पाने भर से नहीं होने वाला। इसके लिए प्रवेश की पूरी प्रक्रिया, अनुशंसा पत्र कैसे लिखे जाते हैं, प्रयोजन का वक्तव्य और छात्रवृत्ति मांगने के लिए कारणों को समझने की जरूरत भी होती है। आपको अंतरराष्ट्रीय परामर्श देने वाले सलाहकारों की जरूरत है, जो आपको दाखिला प्रक्रिया से जुड़ी सभी चीजों के बारे में सिखा सकें।

प्रतिबद्धता जरूरी
प्रतिबद्ध बने रहना बनाम छोड़ देना एक आसान फैसला नहीं है। खास तौर पर, अगर आप फैसला लेने की प्रक्रिया में भावनात्मक रूप से शामिल हैं तो छोड़ देने या प्रतिबद्ध बने रहने का फैसला बहुत ज्यादा पेचीदा बन जाता है। इस हालत के लिए एक आसान मापदंड यह है कि खुद से दो सवाल पूछिए-क्या प्रतिबद्ध बने रहने या छोड़ देने का आपका फैसला आपके लिए और ज्यादा दरवाजे खोलता है।

अगर किसी मुकाम पर आपको लगता है कि आपने गलत फैसला किया था तो आप कितना गंवाएंगे और फैसले को पलटने से आप पर कितना असर पड़ेगा। इन दो पहलुओं की बारीक परख से आपको बहुत जल्दी फैसला करने में मदद मिलेगी।

Edited By: Nitin Arora