Essay on Diwali: दीपावली पर कविताओं से लैस 500 शब्दों का निबंध, प्रतियोगिता में अवश्य मिलेगा पहला स्थान
यह निबंध दीपावली के महत्व, पौराणिक कथाओं और सामाजिक समरसता पर प्रकाश डालता है, जो अंधकार पर प्रकाश की विजय ...और पढ़ें

दीपावली पर निबंध हिंदी में
HighLights
दीपावली अंधकार पर प्रकाश, ज्ञान की विजय का प्रतीक।
भगवान राम की वापसी, लक्ष्मी-गणेश पूजा का पौराणिक महत्व।
एजुकेशन डेस्क, नई दिल्ली। दीपावली का त्योहार हमारे देश का प्रमुख त्योहार है। इस वर्ष दीवाली 8 अक्टूबर को मनाई जा रही है। दीपावली के दौरान स्कूलों और कॉलेजों में निबंध प्रतियोगिताएं करवाई जाती हैं और जीतने वाले को प्राइज भी मिलता है। इसके साथ ही परीक्षा में भी दीवाली पर निबंध लिखने को कहा जाता है। ऐसे में यहां से आप कविताओं से लैस एक बेहतरीन निबंध प्राप्त कर सकते हैं।
Essay on Diwali in 500 words: दीवाली पर 500 शब्दों का निबंध
प्रस्तावना
दीपावली जिसे हम 'दीवाली' के नाम से भी जानते हैं, केवल दीपों का त्योहार नहीं बल्कि अंधकार पर प्रकाश, अज्ञान पर ज्ञान और बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक है। कार्तिक माह की अमावस्या की काली रात को जब अनगिनत दीये एक साथ जलाये जाते हैं तो हमारा देश विश्व पटल पर छा जाता है और पूरे भारत के नक्शे पर उजाला ही उजाला दिखाई देता है। त्योहार का माहौल और उल्लास हर मन को एक नए उत्साह से भर देता है।
आई दिवाली, आई दिवाली, संग लाई खुशियों की थाली।
मिटे अंधेरा जग से सारा, चमके हर घर-आंगन प्यारा।
दीपावली का एतिहासिक एवं पौराणिक महत्व
दीपावली का त्योहार अपने साथ समृद्ध पौराणिक और एतिहासिक धरोहर समेटे हुए है। मान्यता के अनुसार इसी दिन मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम चौदह वर्षों के कठिन वनवास के बाद अपनी पत्नी सीता और भाई लक्ष्मण, भक्त हनुमान और विभीषण के साथ अयोध्या लौटे थे। रावण के वध के बाद अयोध्या आगमन की खुशी में संपूर्ण नगर को घी के दीयों से सजाया गया था। तबसे लेकर अब तक यह परंपरा लगातार चलती आ रही है।
लक्ष्मी जी की क्यों होती है पूजा
भगवान राम के अलावा इसी दिन माता लक्ष्मी समुद्र मंथन से प्रकट हुई थीं। इसीलिए इस दिन पर लक्ष्मी जी और गणेश जी की पूजा भी होती है। इन अबके अतिरिक्त सिख परंपरा में इसे 'बंदी छोड़ दिवस' के रूप में भी बड़ी श्रद्धा के साथ मनाया जाता है।

image: magnific
उत्सव और सामाजिक समरसता
दीपावली से कई दिन पहले ही घरों और प्रतिष्ठानों की सफाई तथा रंग पुताई का कार्य प्रारंभ हो जाता है। माना जाता है कि स्वच्छ और पवित्र स्थान पर ही देवी लक्ष्मी का वास होता है। इस दिन घर के मुख्य द्वार पर सुंदर रंगोली बनाई जाती है और आम के पत्तों व गेंदे के फूलों से 'वंदनवार' बांधे जाते हैं।
शाम के समय पूरा परिवार एक साथ एकत्र होकर धन-धान्य की देवी मां लक्ष्मी, बुद्धि के दाता भगवान श्री गणेश और धन के देवता कुबेर की विधिवत पूजा-अर्चना करता है। पूजा के उपरांत एक-दूसरे को मिठाइयां बांटी जाती हैं और बड़ों का आशीर्वाद लिया जाता है।
दीप जलाकर हर कोने में, नया उजाला फैलाएं।
भेदभाव सब भूल परस्पर, गले सभी को लगाएं।
भाईचारे का संदेश देने वाला त्योहार है दीवाली
दीपावली समाज में भाईचारे और समरसता का संदेश देती है। इस दिन लोग अपने गिले-शिकवे भुलाकर एक-दूसरे को शुभकामनाएं देते हैं, जिससे रिश्तों में मिठास बढ़ती है।

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निष्कर्ष
दीवाली आनंद, उत्साह और आध्यात्मिकता का प्रतीक त्योहार है। यह त्योहार हमें यह संदेश देता है कि सत्य और धर्म की विजय हमेशा होती है और असत्य का नाश निश्चित है। दीपावली हमें अपने भीतर के अहंकार, ईर्ष्या और द्वेष रूपी अंधकार को मिटाकर प्रेम, करुणा और सद्भावना रूपी दीप जलाने की प्रेरणा देती है। दीपावली का प्रकाश हम सबके जीवन में सुख, शांति और समृद्धि लेकर आए — यही कामना है।
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