दिल्ली में आम आदमी पार्टी की जीत में उसके एजुकेशन मॉडल की सबसे बड़ी भूमिका रही है। पार्टी ने अपने पूरे गवर्नेंस मॉडल को कमोबेश शिक्षा के इर्द-गिर्द ही बनाया और अपने शैक्षिक सुधारों को केंद्र में रखकर लोगों से वोट मांगे। कोई शक नहीं कि पिछले पांच साल में दिल्ली के एजुकेशन मॉडल की सबसे अधिक चर्चा हुई। लंबे समय से दो तरह की शिक्षा व्यवस्था रही है- एक ऊंचे लोगों के लिए और दूसरा आम लोगों के लिए। शायद दिल्ली की आप सरकार ने शिक्षा मंत्री मनीष सिसोदिया के नेतृत्व में पहली बार दोनों मॉडल के बीच के इस अंतर को पाटने की कोशिश की।

दिल्ली सरकार की शिक्षा नीति इस बात से प्रेरित रही कि क्वालिटी एजुकेशन लोगों की जरूरत है, न कि लग्जरी। यही कारण है कि राज्य सरकार ने अपने बजट का लगभग 25 प्रतिशत हिस्सा शिक्षा के लिए आवंटित किया। स्कूली शिक्षा में आई इस बेहतरी से शिक्षा के क्षेत्र में आगे के सुधार का रास्ता भी साफ हुआ।

दिल्ली सरकार ने अपने शिक्षा मॉडल के तहत मुख्य रूप से पांच पहल की है। इनमें पहला है- स्कूली इन्फ्रास्ट्रक्चर को बेहतर बनाना, ताकि सरकारी स्कूलों में सभी जरूरी सुविधाएं उपलब्ध हों। कोई शक नहीं कि इससे छात्रों के साथ शिक्षकों का भी उत्साहवर्धन होता है। इस क्रम में नई बिल्डिंग, अच्छे क्लासरूम, फर्निचर, स्मार्ट बोर्ड, स्टाफ रूम, ऑडिटोरियम, लेबोरेटरी, लाइब्रेरी, खेल से जुड़ीं सुविधाएं आदि उपलब्ध कराने के प्रयास किए गए।

दूसरी पहल के तहत शिक्षकों और प्रिंसिपल के लिए ट्रेनिंग की व्यवस्था की गई। शिक्षकों के आपस में एक-दूसरे से सीखने यानी पीयर लर्निंग के अलावा उन्हें प्रोफेशनल ग्रोथ के लिए ट्रेनिंग समेत अन्य अवसर भी दिए गए। उदाहरण के लिए, शिक्षकों को कैंब्रिज यूनिवर्सिटी, सिंगापुर स्थित नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ एजुकेशन, आईआईएम अहमदाबाद और देश के अंदर अन्य बड़े संस्थानों में वहां की शैक्षिक व्यवस्था, पाठ्यक्रम, उपलब्ध सुविधाओं की स्टडी के लिए भेजा गया। शिक्षकों को देश और विदेश में उपलब्ध सर्वश्रेष्ठ तौर-तरीकों से अवगत कराया गया। इन सबका असर साफ तौर पर शिक्षा की गुणवत्ता पर दिखा।

तीसरी पहल के तहत शिक्षकों और कम्युनिटी (पेरैंट्स) के बीच संवाद और सम्पर्क पर फोकस किया गया। इसके लिए स्कूल मैनेजमेंट कमिटी (एसएमसी) का पुनर्गठन किया गया। हर कमिटी का वार्षिक बजट 5-7 लाख रुपए तय किए गए, जिनका उपयोग किसी चीज या सुविधा की खरीद, किसी क्रियाकलाप, कम समय के लिए शिक्षकों की नियुक्ति आदि पर किया जा सकता है।

इस तरह शिक्षकों और अभिभावकों के बीच नियमित और सीधा संवाद शुरू हुआ। इसके लिए पैरेंट्स-टीचर्स मीटिंग (पीटीएम) आयोजित की जाने लगी। शिक्षकों को यह भी बताया गया कि वे कैसे पैरेंट्स के साथ संवाद बढ़ाएं। पीटीएम़ के लिए एफएम रेडियो और न्यूजपेपर आदि में विज्ञापन दिए जाने लगे।

चौथी पहल के तहत पाठ्यक्रम में बड़े बदलाव पर काम शुरू हुआ। 2016 में 9वीं कक्षा में लगभग 50 प्रतिशत छात्र फेल करते थे। देखा गया कि इसके लिए बच्चों की कमजोर शुरुआती शिक्षा अधिक जिम्मेदार है, यानी छोटी कक्षाओं में उन्हें बेहतर करने पर सही तरीके से फोकस नहीं किया गया। इसके लिए अलग से अभियान चलाया गया और छोटे बच्चों को गणित के साथ पढ़ने और लिखने के लिए सिखाया गया।

सरकार ने नर्सरी से 8वीं कक्षा तक के सभी बच्चों के लिए एक हैप्पीनेस करीकुलम शुरू किया। इसका मकसद बच्चों को मनोवैज्ञानिक तौर पर मजबूत बनाना है। इसके अलावा, 9 से 12वीं तक के बच्चों के लिए एक आंत्रप्रेन्यरशिप माइंडसेट करिकुलम शुरू किया गया। इसका मकसद बच्चों को खुद समस्या के समाधान खोजने में सक्षम बनाना, रचनात्मक तरीके से सोचने के लिए प्रेरित करना और नई पहल करने में सक्षम बनाना है। इससे नए विषयों के साथ ही परंपरागत विषयों में भी बच्चों का प्रदर्शन बेहतर हुआ और वे 10वीं और 12वीं कक्षाओं में बेहतर प्रदर्शन करने लगे।

पांचवीं पहल के तहत प्राइवेट स्कूलों में मनमानी फीस बढ़ोतरी पर लगाम लगा दी गई। पहले की चार पहल से जहां सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले 34 प्रतिशत बच्चे लाभान्वित हुए, वहीं, निजी स्कूलों में पढ़ने वाले लगभग 40 प्रतिशत बच्चे सरकार की पांचवीं पहल से लाभान्वित हुए।

पहले लगभग सभी स्कूल हर साल 8-15 प्रतिशत के बीच फीस बढ़ा देते थे। यहां तक कि अधिक फीस लेने वाले स्कूलों द्वारा पैरेंट्स को उसे वापस करने की बात भी सामने आई है। इस तरह पिछले दो साल से किसी स्कूल को फीस बढ़ाने की अनुमति नहीं दी गई। इससे मध्य वर्ग से आने वाले लाखों परिवारों को बड़ी राहत मिली है, जो बच्चों के उज्ज्वल भविष्य की आस में बड़ी मुश्किल से उनकी शिक्षा का खर्च वहन कर पाते हैं।

आप ने पिछले वर्षों में 16 हजार क्लासरूम बनाए हैं और सैकड़ों शिक्षकों को ट्रेनिंग दी है। दिल्ली के इन स्कूलों में 15 लाख से अधिक बच्चे पढ़ते हैं और उनके लिए 65 हजार के करीब शिक्षक हैं। पार्टी ने दिल्ली में एक स्पोर्ट्स यूनिवर्सिटी बनाने की भी घोषणा की है। शिक्षा को पटरी पर लाने में ऑक्सफोर्ड से पढ़ीं और पहली बार विधायक चुनी गईं आतिशी का भी अच्छा योगदान रहा।

Posted By: Umanath Singh

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