रांची, {संजीव रंजन}। Cricketer Sachin Tendulkar Tips रांची की अंतरराष्ट्रीय महिला फुटबाल खिलाड़ी अंशु कच्छप के हौसले और संघर्ष से मास्टर ब्लास्टर सचिन तेंदुलकर भी प्रभावित हैं। पिछले दिनों यूनिसेफ द्वारा आयोजित कार्यक्रम के तहत ओरमांझी प्रखंड के इरबा पाहन टोली निवासी 24 वर्षीय अंशु कच्छप को सचिन तेंदुलकर आनलाइन बात करने का मौका मिला। इस दौरान अंशु के प्रयासों की सचिन ने जमकर तारीफ की। सचिन ने अंशु से कहा कि हमेशा संघर्षों से तप कर निकले लोग बहुत ऊंचाई पर जाते हैं। तुम्हारी कहानी दूसरों को भी संघर्ष के लिए प्रेरित करेगी। इस दौरान तेंदुलकर ने अपने अनुभव भी साझा किए।

गांव में 160 बच्चों को फुटबाल का प्रशिक्षण देती हैं अंशु

बता दें कि खुद खेलने के साथ ही अंशु आसपास के गांवों के करीब 160 बच्चों को फुटबाल का प्रशिक्षण दे रही हैं। शाम के चार बजे से लेकर छह बजे तक गांव के ही एक छोटे से मैदान में वह बच्चों, खासकर लड़कियों को फुटबाल की ट्रेनिंग देती है। सचिन ने अंशु से कहा कि वह चुनौतियों से कभी हार नहीं माने और अपने लक्ष्य को पूरा करे। सचिन ने कहा कि अगर जीवन में सफल होना है तो खुद को फिट बनाए रखना भी बहुत जरूरी है। इसलिए फिट रहें।

भाग्यशाली हूं कि सचिन तेंदुलकर से बात करने का मौका मिला

अंशु कच्छप ने बताया कि वह बहुत भाग्यशाली है कि उसे महान क्रिकेटर सचिन तेंदुलकर से बात करने का मौका मिला। सचिन ने उससे फुटबाल करियर के साथ साथ संघर्ष की कहानी के संबंध में पूछा। साथ ही मैने खुद को कैसे फिट रखा, इसकी भी जानकारी ली। मैने जब बताया कि कोरोना काल में जब सारी खेल गतिविधियां बंद थीं, तब घर के बगल में एक छोटे से मैदान में अकेल घंटों अभ्यास कर खुद को फिट रखने का प्रयास करती थी तो वह प्रभावित हुए। मेरे इस प्रयास को उन्होंने सराहा तथा आगे भी फुटबाल में बेहतर करने की शुभकामना दी।

जब बेहतर प्रदर्शन करते हैं तो लोगों की अपेक्षाएं बढ़ जाती: सचिन

अंशु ने कहा कि मैने भी सचिन तेंदुलकर से प्रश्न किए और पूछा जब आप अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट खेलते थे तब पूरा देश आपसे अपेक्षा करता था कि आप जीत की गारंटी हैं। उस स्तर पर ये दबाव आप कैसे संभालते थे। सचिन ने जबाव दिया कि पहले मैने अपने आप को उस स्तर तक पहुंचने के लिए जमकर परिश्रम किया और मैदान में बेहतर खेल दिखाया। आप जब लोगों की अपेक्षाओं के अनुरूप प्रदर्शन करते हैं तब उनकी अपेक्षाएं बढ़ जाती है। फिर आप हर हालात का सामना करने में सक्षम हो जाते हैं। अपने लंबे क्रिकेट करियर के संबंध में कहा कि फिटनेस और प्रदर्शन यह दो चीजें हैं जो आपके खेल के करियर को लंबा करती हैं। अगर आप भी यह करने में सक्षम हैं तो आपका करियर भी लंबा होगा।

अंशु को कदम-कदम पर करना पड़ा संघर्ष, छेड़खानी भी हुई

अंतरराष्ट्रीय महिला फुटबाल खिलाड़ी अंशु कच्छप ने फुटबाल खेलने की शुरुआत 2013 में की थी। परिवार से सहयोग नहीं मिलने के बाद भी अंशु ने खेलना जारी रखा। प्रारंभिक दौर में उसे काफी मुसीबतों का सामना करना पड़ा। गांव में छोटे कपड़े पहन कर फुटबाल खेलने की मनाही थी। लड़के फब्तियां कसते थे। मैदान में शाट््स पहनकर खेलने आते-जाते समय कई बार छेडख़ानी का भी सामना करना पड़ा। कभी-कभी तो जानबूझकर गांव के मनचले मैदान में ही डेरा जमा लेते थे और परेशान करते थे। मैंने उनका चटकर मुकाबला किया और ना तो उनसे कभी डरी ना ही हार मानी।

मैं गलत तत्वों का विरोध करते हुए फुटबाल खेलती रही : अंशु

गलत तत्वों का विरोध करते हुए फुटबाल खेलती रही। कई लोगों का साथ मिला। अंशु का कहना है कि सरकार से अगर मदद मिले तो वह और बेहतर तरीके से खिलाडिय़ों को प्रशिक्षण देकर उनके आगे बढऩे में मददगार बन सकती है। खिलाडिय़ों को जर्सी, बूट व पौष्टिक भोजन की आवश्यकता होती है। कहीं से कोई मदद नहीं मिलने से यह सब पूरा नहीं हो पाता है। अंशु ने बताया कि फुटबाल प्रशिक्षक आनंद प्रसाद गोप इस काम में उसकी भरपूर मदद करते हैं।

अंशु कच्छप की उपलब्धियां

  • 2018 में भारतीय महिला फुटबाल टीम के साथ इंगलैंड में खेली।
  • 2019 में डेनमार्क में आयोजित डाना कप की विजेती भारतीय टीम की सदस्य रही।
  • आल इंडिया फुटबाल फेडरेशन से संबंधित डी लाइसेंसधारी फुटबाल कोच है अंशु
  • जूनियर से लेकर सीनियर वर्ग तक के खेलों में झारखंड का कर चुकी है प्रतिनिधित्व

Edited By: M Ekhlaque