देश के 35 मिलियन हेक्टेयर क्षेत्रफल में फैल चुका है गाजर घास

संवाद सूत्र, पंतनगर : गोविंद बल्लभ पंत कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय में भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद की वित्त पोषित खरपतवार नियंत्रण परियोजना के तहत कृषि महाविद्यालय के सस्य विज्ञान विभाग की ओर से गाजर घास जागरूकता सप्ताह कार्यक्रम का शुभारंभ मंगलवार को फसल अनुसंधान केंद्र के सभागार में किया गया।

वक्ताओं ने कहा कि गाजर घास (पार्थेनियम हिस्ट्रोफोरस) जिसे विभिन्न स्थानों पर कांग्रेस घास, चटक चांदनी, गंधी बूटी आदि नामों से जाना जाता है। यह बहुत ही हानिकारक एवं विषैला पौधा है, जिसके प्रभाव से मनुष्यों में डरमेटाइटिस, एलर्जी, चर्मरोग, हे-फीवर एवं अस्थमा आदि बीमारियां एवं पशुओं द्वारा खाने से दूध में कमी तथा विषाक्तता उत्पन्न हो जाती है। यह पौधा एक वर्ष में तीन बार अपना जीवन-चक्र पूर्ण कर लेता है। इसके एक पौधे से 10,000-25,000 तक बीज उत्पन्न होते हैं। यह पौधा पर्यावरण को भी प्रदूषित करता है। इस घास से फसलों को 35-40 प्रतिशत तक हानि हो रही है। गाजर घास देश के लगभग 35 मिलियन हेक्टेयर क्षेत्रफल में फैल चुका है, जिसका समय रहते नियंत्रित नहीं किया गया तो भविष्य में बहुत जल्दी ही अधिक क्षेत्रफल में फैल जाएगा। यह कार्यक्रम परिसर के अलावा जनपद के अन्य हिस्सों जैसे स्कूल, कालेजों, गांवों में विद्यार्थियों, युवाओं, एवं कृषकों के बीच किया जाता है, जिससे समाज में जागरूकता लाई जा सके। कार्यक्रम का संचालन डा. एसपी सिंह ने किया। कार्यक्रम में डा. एसके वर्मा, डा. सुभाष चंद्रा, डा. एपी सिंह, डा. वीरेंद्र प्रताप सिंह, वरिष्ठ शोध अधिकारी, डा. तेज प्रताप सिंह, डा. एसपी सिंह मौजूद थे।

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