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Success Story: समाज के तानों के बीच पिता के अधूरे सपने को किया पूरा, जानिए सोनभद्र जिले की पहली महिला SSP की प्रेरणादायक कहानी

Published: Tue, 29 Sep 2026 01:11 PM (IST)

राजस्थान की मूल निवासी मेविस टाक सोनभद्र जिले की पहली महिला SSP हैं। उन्हें यह सफलता रातोंरात नहीं मिली। उन्होंने ...और पढ़ें

Mavis Tak: कौन हैं मेसिव टाक।

Mavis Tak: कौन हैं मेसिव टाक।

HighLights

  1. तीसरे प्रयास में हासिल की सफलता।

  2. सोनभद्र जिले की पहली महिला SSP अधिकारी।

करियर डेस्क, नई दिल्ली। कहते हैं जिनके हौसले बुलंद और जीवन में कुछ बड़ा करने की चाह होती है। चुनौतियां भी उनका रास्ता रोक नहीं सकती है। अपने पिता के अधूरे सपने को पूरा करने के लिए उन्होंने यूपीएसससी सिविल सर्विस परीक्षा की तैयारी शुरू की। परीक्षा में दो बार असफलता और समाज के तानों के बीच भी उनका हौसला नहीं टूटा।

हम बात रह रहे हैं उत्तर प्रदेश की IPS अधिकारी मेविस टाक की। मेविस टाक साल 2022 में यूपीएससी क्रैक करके आईपीएस अधिकारी बनीं। उन्हें सोनभद्र जिले की पहली महिला SSP बनने का गौरव भी प्राप्त है। मेविस टाक आज उन सभी महिलाओं के लिए एक प्रेरणा की मिसाल है, जो समाज के तानों के बीच अपने सपनों को बीच में ही अधूरा छोड़ देती हैं।

मेविस टाक के बारे में

सोनभद्र जिले की पहली महिला SSP मेविस टाक मूल रूप से राजस्थान की रहने वाली हैं। हालांकि उनका पूरा परिवार मुंबई में रहता है। मेविस टाक के पिता का नाम अब्दुल करीम है, जोकि एक फ्रीलांस ट्रांसलेटर हैं। इसके साथ ही मां एक गृहिणी है। आपको बता दें, मेविस टाक मुंबई के मीरा भायंदर क्षेत्र से यूपीएससी की परीक्षा पास करने वाली पहली महिला है। इसके साथ ही मेविस टाक ने अपनी शुरूआती पढ़ाई मुंबई से ही पूरी की है। उन्होंने कक्षा 10वीं न्यू कैंब्रिज स्कूल और कक्षा 12वीं रॉयल कॉलेज ऑफ आर्ट्स, साइंस एंड कॉमर्स से पूरी की है। कक्षा 12वीं पूरी करने के बाद उन्होंने राजनीतिक विषय में स्नातक की डिग्री हासिल की और मास्टर पूरी करने के बाद UPSC की तैयारी शुरू कर दी।

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पिता के अधूरे सपनों को किया पूरा

मेविस टाक ने अपने पिता के अधूरे सपनों को पूरा करने के लिए UPSC CSE परीक्षा की तैयारी शुरू की। बता दें, मेविस के पिता का सपना एक सिविल सर्वेंट बनना था। लेकिन कुछ परिस्थितियों के कारण वह अपने सपनों को पूरा नहीं कर सकें। हालांकि उन्होंने अपनी तीनों बेटियों को पढ़ाने के लिए पूरी जी जान लगी दी।

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समाज से मिले तानों के बीच बनाई अलग पहचान

मेसिव के लिए यूपीएससी परीक्षा की तैयारी का सफर बिल्कुल भी आसान नहीं था। एक तरफ उन्हें यूपीएससी में दो बार असफलता का सामना करना पड़ा, तो दूसरी ओर मेसिव के रिश्तेदार और समाज उनके पिता को ताने देते थे कि बेटियों को इतना पढ़ा-लिखा रहे हो। कौन-सा वे कलेक्टर बन जाएगी। लेकिन समाज के तानों के बीच भी मेसिव के पिता ने समाज की नकारात्मक सोच का साया अपनी बेटियों पर पड़ने नहीं दिया और अपनी तीनों बेटियों को पढ़ाने के लिए उन्होंने दिन-रात एक कर दी।

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तीसरे अटेम्प्ट में पास की परीक्षा

मेसिव टाक के लिए यूपीएससी की तैयारी का सफर बिल्कुल भी आसान नहीं था। तैयारी के दौरान उन्हें दो बार असफलताओं का सामना करना पड़ा। वह अपने शुरुआती दो प्रयास में प्रारंभिक परीक्षा में असफल रही। लेकिन उन्होंने कभी भी अपनी असफलताओं को अपनी कमजोरी नहीं बनने दिया। उन्होंने दोबारा यूपीएससी की तैयारी शुरू की और तीसरे प्रयास में UPSC CSE परीक्षा पास करके आईबीएस बन गई। बता दें, मेसिव ने अपने तीसरे अटेम्प्ट में 386वीं रैंक हासिल की थी। वह यूपी के सोनभद्र जिले की पहली महिला SSP हैं।

 

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