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MBA ग्रेजुएट को 100% प्लेसमेंट गारंटी के बाद नहीं मिली जॉब तो किया केस, एडटेक कंपनी के ऊपर करीब 1 लाख का जुर्माना

Published: Thu, 24 Sep 2026 12:53 PM (IST)

एमबीए ग्रेजुएट हरीश कुमार ने 100% प्लेसमेंट वाली कंपनी में कोर्स खरीदा लेकिन कोर्स पूरा होने के बाद उन्हें जॉब ...और पढ़ें

MBA graduate Harish Kumar

MBA graduate Harish Kumar

HighLights

  1. उपभोक्ता आयोग ने एडटेक कंपनी पर लगाया जुर्माना।

  2. 100 फीसदी जॉब गारंटी के बाद अभ्यर्थी को नहीं मिली जॉब।

एजुकेशन डेस्क, नई दिल्ली। हमारे देश में बहुत से ऐसी कंपनियां हैं जो कोर्स बेचती हैं और कोर्स देने के समय 100% प्लेसमेंट गारंटी भी देती हैं। यही गारंटी अब एक एडटेक कंपनी को भारी पड़ी है। नौकरी न मिलने के बाद कोर्स लेने वाले बटाला निवासी एमबीए ग्रेजुएट हरीश मल्होत्रा ने कंपनी के खिलाफ केस कर दिया जिसका फैसला उनके पक्ष में आया।
पंजाब के गुरदासपुर जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने बेंगलुरु की एडटेक कंपनी एडुइनक्स एजुकेशन सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड (Eduinx) को करीब 1 लाख रुपये वापस करने का आदेश दिया है।

45 दिन में पैसे देने का आदेश

एमबीए ग्रेजुएट के पक्ष में फैसला आने के बाद 45 दिनों के अंदर कंपनी को फीस के रूप में जमा किये गए 84,960 रुपये वापस करने का आदेश दिया गया है। इसके साथ ही मानसिक उत्पीड़न के लिए 10,000 रुपये और कानूनी खर्च के रूप में 5,000 रुपये अतिरिक्त भुगतान करने के लिए भी कंपनी को बोला गया है।

क्या है मामला?

हरीश मल्होत्रा ने जुलाई 2025 में Eduinx के 100 फीसदी प्लेसमेंट गारंटी वाले विज्ञापन से प्रभावित होकर 'एआई इन प्रोडक्ट मैनेजमेंट' (AI in Product Management) के 6 महीने के ऑनलाइन कोर्स में दाखिला लिया था। इसके बाद उन्होंने फीस के रूप में 84,960 रुपये फीस जमा की थी। नवंबर 2025 में कोर्स पूरा होने के बाद उन्हें सर्टिफिकेट मिला लेकिन नौकरी नहीं मिली। इसी के चलते वे तो उपभोक्ता आयोग चले गए और शिकायत की।

हालांकि कंपनी ने तर्क दिया कि हरीश को नौकरी के अवसर और इंटरव्यू उपलब्ध कराए थे, लेकिन अंतिम चयन उम्मीदवार के इंटरव्यू प्रदर्शन पर निर्भर करता है। कंपनी का कहना था कि "100% प्लेसमेंट गारंटी" का मतलब करियर तैयारी और मार्गदर्शन से था, न कि सीधा नियुक्ति पत्र देना। लेकिन, उपभोक्ता आयोग ने कंपनी की दलील को नकार दिया।

आयोग के अध्यक्ष ललित मोहन डोगरा और सदस्य भगवान सिंह मथारू की पीठ ने कंपनी की दलीलों को खारिज करते हुए कहा:
1. इंटरव्यू और जॉब में अंतर: सिर्फ इंटरव्यू या नौकरी की जानकारी देना "सफल प्लेसमेंट" नहीं माना जा सकता।
2. सख्त नियम व शर्तें: यदि यह गारंटी उम्मीदवार के प्रदर्शन या लोकेशन पर निर्भर थी, तो इसे कोर्स बेचते समय स्पष्ट रूप से बताया जाना चाहिए था। कंपनी इसका कोई लिखित सबूत पेश नहीं कर सकी कि शिकायतकर्ता का प्रदर्शन खराब था।
3. सेवा में कमी और अनुचित व्यापार: वादे के मुताबिक नौकरी न दिला पाना सेवा में कमी (Deficiency in Service) और अनुचित व्यापार व्यवहार (Unfair Trade Practice) है।

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