कुहू गर्ग: बैडमिंटन से जीते देश के लिए 19 इंटरनेशनल मेडल, एक हादसे ने बदली किस्मत फिर बनीं Gen Z आईपीएस
बैडमिंटन खिलाड़ी कुहू गर्ग ने चोट के बाद खेल छोड़कर यूपीएससी की तैयारी शुरू की और अपने पहले ही प्रयास ...और पढ़ें

Success Story: खिलाड़ी से कैसे बनीं आईपीएस अधिकारी।
HighLights
बैडमिंटन खिलाड़ी कुहू गर्ग ने देश के लिए कई मेडल जीते।
घुटने की चोट के कारण खेल छोड़ यूपीएससी की तैयारी की।
पहले ही प्रयास में 188वीं रैंक के साथ आईपीएस बनीं।
करियर डेस्क, नई दिल्ली। बैडमिंटन खेल के जरिये देश के लिए मैडल लाने वाली एक लड़की ने शायद ही कभी सोचा होगा कि सिर्फ एक हादसा उनकी पूरी तकदीर बदल सकता है। हम बात कर रहे हैं उत्तराखंड से आने वाली कुहू गर्ग की, जो अपने पहले ही प्रयास में UPSC की सिविल सर्विस परीक्षा पास करके IPS बन गई।
कुहू गर्ग ने खेल के दौरान न केवल पूरे देश का मान बढ़ाया, बल्कि जब वह पढ़ाई के क्षेत्र में आई तो उन्होंने यहां भी कमाल कर दिखाया। बता दें, कुहू गर्ग IPS बनने से पहले एक बैडमिंटन प्लेयर थीं। लेकिन एक हादसे के कारण उन्हें अपना पसंदीदा खेल छोड़ना पड़ा। हालांकि कुहू ने कभी हार नहीं मानी और बैडरेस्ट के दौरान की UPSC की तैयारी शुरू कर आईपीएस बनने की ठानी।
कौन हैं IPS कुहू गर्ग
कुहू गर्ग का जन्म 22 सितंबर, 1998 में हुआ था। वह देहरादून की रहने वाली है। कुहू गर्ग की परवरिश एक प्रशासनिक माहौल में हुई है। उनके पिता एक IPS अधिकारी रहे हैं। इसके साथ ही वह उत्तराखंड के पूर्व DGP भी रहे हैं। कुहू ने अपनी शुरुआती शिक्षा देहरादून के सेंट थॉमस कॉलेज से पूरी की है। शुरुआती शिक्षा पूरी करने के बाद उन्होंने दिल्ली यूनिवर्सिटी के श्री राम कॉलेज ऑफ कॉमर्स (SRCC) से अपना स्नातक पूरा किया।

बचपन में शुरू हुआ बैडमिंटन का सफर
कुहू गर्ग को बचपन से ही खेल में दिलचस्पी रही है। महज 9 साल की उम्र से ही बैडमिंटन खेलने का सफर शुरू हो गया था। कुहू ने अपने जीवन में कई राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय खेलों में भाग लिया है। बात दें, कुहू ने साल 2018 में वर्ल्ड चैंपियनशिप में भाग लिया था। इसके अलावा, वह साल 2018 और 2019 में एशियन चैंपियनशिप भी खेल चुकी हैं। उन्होंने अपने स्पोर्ट्स करियर के दौरान 56 राष्ट्रीय एवं 19 अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार जीते हैं।
हादसे ने बदली तकदीर
कुहू गर्ग की जिदंगी में एक वक्त ऐसा भी आया जब उन्हें अपने पसंदीदा खेल को हमेशा-हमेशा के लिए अलविदा कहना पड़ा। दरअसल खेल के दौरान ही कुहू के घुटने में चोट लगी, जिसके बाद डॉक्टर ने उन्हें आराम करने की सलाह दी। चोट इतनी ज्यादा गंभीर थी कि उन्हें अपने पसंदीदा खेल को छोड़ना पड़ा। हालांकि कुहू ने हार नहीं मानी और बेडरेस्ट के दौरान ही यूपीएससी की तैयारी शुरू कर दी। आज कुहू उन सभी युवाओं के लिए एक प्रेरणा की मिसाल है, जो चुनौतियों के डर से अपने सपनों से हार मान लेते हैं।

पहले ही प्रयास में क्रैक किया UPSC
बैड रेस्ट के दौरान ही कुहू ने UPSC की तैयारी शुरू कर दी थी। हालांकि यह फैसला और यह बदलाव उनके लिए आसान नहीं था। लेकिन कुहू ने परीक्षा नें सफलता पाने के लिए रोजाना 8 से 9 घंटे पूरे अनुशासन के साथ पढ़ाई की। उन्होंने साल 2023 में यूपीएससी की सिविल सर्विस परीक्षा की और अपने पहले ही प्रयास में 178वीं रैंक हासिल करके आईपीएस ऑफिसर बन गई।
