जागरण संवाददाता, जालंधर

लंपी बीमारी के नए मामले कम होने के बावजूद खतरा बरकरार है। दूध का उत्पादन कम होने से दोधी के साथ-साथ लोग परेशान हैं। वीरवार को 281 नए मामले सामने आए और 25 गायों की मौत हो गई।

लोहिया के पशु पालक सतिदर सिंह जानिया चाहल कहते हैं कि उनके पास 40 गायों में पांच बीमारी की वजह से मर चुकी हैं। छह बीमार चल रही हैं। दूध का उत्पादन 50 प्रतिशत के करीब कम हो चुका है। रूटीन में दूध लेने वाले ग्राहकों को उनकी मांग के मुकाबले कम दूध देना पड़ रहा है। दुर्गा कालोनी में रहने वाले अजय कुमार कहते हैं कि उनके घर में गाय का दूध ही इस्तेमाल होता है। पिछले दो सप्ताह से डेयरी से डिमांड के मुकाबले आधे से कम दूध मिल रहा है। बच्चे पैकेट का दूध पसंद नहीं करते हैं। उधर, पशुपालन विभाग के सहायक डायरेक्टर डा. अनिल कपूर मानते हैं कि इन दिनों गाय के दूध का उत्पादन 50-60 प्रतिशत कम हो चुका है। इस मामले को लेकर पशु पालकों की काफी शिकायतें आई हैं। लंपी स्किन डसीसिज (एलएसडी) की वजह से पशु तनाव में हैं। उसकी प्रतिरोधक शक्ति भी कमजोर हो चुकी है। पशु खुराक भी नही ले रहे हैं। इन्हें ठीक होने में चार सप्ताह तक का समय लग जाता है।

Edited By: Jagran

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