कुछ पार्टी के साथ, कुछ पर सस्पेंस बरकरार... क्या 2022 की तरह फिर टूट जाएगा उद्धव गुट?
उद्धव ठाकरे की शिवसेना (यूबीटी) में एक बार फिर 2022 जैसी टूट का खतरा मंडरा रहा है, जहां 'ऑपरेशन टाइगर' के तहत सांसदों के दल-बदल की चर्चा तेज है।
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HighLights
शिवसेना (यूबीटी) में 'ऑपरेशन टाइगर' से टूट का खतरा।
उद्धव की बैठक में कम सांसदों की उपस्थिति ने बढ़ाई चिंता।
शिंदे गुट का दावा, कई सांसद उनके संपर्क में।
डिजिटल डेस्क, मुंबई। महाराष्ट्र की सियासत में एक बार फिर उद्धव की पार्टी पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं। साल 2022 में पार्टी की सबसे बड़ी टूट के बाद एक बार फिर अंदरूनी कलह की सुगबुगाहट सुनाई देने लगी है।
ऐसा इसलिए क्योंकि महाराष्ट्र में इन दिनों 'ऑपरेशन टाइगर' की चर्चा जोरो पर है। ऐसे में शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे के सामने अपने लोकसभा सांसदों को एकजुटता बनाए रखने की चुनौती खड़ी हो गई है।
क्या है 'ऑपरेशन टाइगर'?
'ऑपरेशन टाइगर' की चर्चा के बीच रविवार को उद्धव ठाकरे ने अपने आवास 'मातोश्री' पर पार्टी सांसदों की बैठक बुलाई। इस बैठक में पार्टी के 9 सांसदों में से महज चार सांसद ही पहुंचे।
इसके बाद नया सियासी तुफान खड़ा हो गया और दलबदल के कयास लगाए जाने लगे। बाद में खबर आई कि बाकी के पांच सांसद वेर्चुअल मीटिंग के जरिए बैठक में उपस्थित हुए थे।
खबर यह भी है कि शिवसेना (UBT) के पांच सांसद अलग राह पर चल रहे हैं। जब 'मोतिश्री' पर उद्धव सांसदों के साथ बैठक कर रहे थे तो उसी समय शिवसेना (यूबीटी) के सांसद संजय देशमुख ने दिल्ली में एकनाथ शिंदे खेमे के मंत्री प्रताप राव जाधव से मुलाकात की।
उद्धव के साथ कौन?
बैठक में शामिल होने वाले सांसदों में अरविंद सावंत, अनिल देसाई, राजाभाऊ वाजे और संजय पाटिल थे। बाकी पांच सांसदों के वर्चुअल जुड़ने का दावा किया गया, लेकिन उनके अनुपस्थिति और बाद की घटनाओं ने अटकलों को हवा दी।
उद्धव की पार्टी में टूट
उधर शिंदे गुट के नेताओं का दावा है कि मॉनसून सत्र से पहले उद्धव ठाकरे के कई सांसद उनके खेमे में शामिल हो सकते हैं। केंद्रीय मंत्री प्रताप राव जाधव और शिवसेना एमएलसी कृपाल तुमाने ने खुलकर कहा कि सात लोकसभा सांसदों के साथ बातचीत अंतिम चरण में है।
तुमाने के मुताबिक, 16 विधायकों के भी संपर्क में होने के संकेत मिले हैं। इस बीच, उद्धव गुट के सांसद संजय देशमुख का शिंदे खेमे के मंत्री से दिल्ली में मुलाकात करना भी सुर्खियों में रहा।
क्या 2022 वाली फाड़ दोहराने जा रही शिवसेना?
इस पूरे घटनाक्रम को साल 2022 की पुनरावृत्ति के रूप में भी देखा जा रहा है, जब एकनाथ शिंदे ने उद्धव ठाकरे से बगावत कर सत्ता हासिल की थी। लोकसभा में दो-तिहाई बहुमत (कम से कम छह सांसद) के नियम के तहत अगर छह या अधिक सांसद अलग होते हैं तो अयोग्यता से बच सकते हैं। शिंदे गुट इसी रणनीति पर काम कर रहा है।उद्धव ठाकरे और आदित्य ठाकरे अब डैमेज कंट्रोल करने में जुट गए हैं।
नाराज या सस्पेंस में दिख रहे सांसदों से सीधे संवाद शुरू किया गया है। पार्टी के राज्यसभा सांसद संजय राउत ने सभी सांसदों की निष्ठा पर जोर देते हुए कहा कि शिंदे गुट के दावे निराधार हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि शिवसेना यूबीटी जल्द ही 'ऑपरेशन वुल्फ' शुरू करेगी, जिसमें शिंदे गुट के विधायकों और सांसदों को निशाना बनाया जाएगा।
